सिवनी जिले के भूतबंधानी क्षेत्र का जंबो सीताफल अपनी मिठास और बड़े आकार के कारण देश के कई बड़े शहरों के बाजारों तक पहुंच रहा है। जीआई टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और मांग बढ़ी है। दिल्ली, आगरा, झांसी, बनारस, प्रयागराज, गोरखपुर, नागपुर, रायपुर और मुंबई तक यह सप्लाई किया जा रहा है। इस बार किसानों को पिछले साल के मुकाबले डेढ़ से दो गुना तक ज्यादा कीमत मिल रही है। फिलहाल गुणवत्ता और आकार के आधार पर एक कैरेट सीताफल 500 से 1,500 रुपए तक बिक रही है। पिछले साल 400 से 800 रुपए था कैरेट का भाव इस बार सीताफल के दाम पिछले साल के मुकाबले बढ़े हैं। पिछले साल एक कैरेट के 400 से 800 रुपए तक मिल रहे थे, जबकि इस बार भाव 500 से 1,500 रुपए तक पहुंच गया है। फल के आकार और गुणवत्ता के आधार पर कीमत तय हो रही है। व्यापारी दूसरे राज्यों से भूतबंधानी पहुंचकर सीधे किसानों और संग्राहकों से खरीदी कर रहे हैं। कई जगह बुकिंग के जरिए ही फलों की बिक्री हो रही है। इससे किसानों को उपज बाजार तक पहुंचाने में लगने वाला समय और परिवहन खर्च बच रहा है। 8.25 लाख से अधिक पेड़ों से हो रहा प्रोडक्शन जिले में करीब 695 हेक्टेयर क्षेत्र में सीताफल के बगीचे हैं। यहां 6,090 मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग की गणना में 8.25 लाख से अधिक सीताफल के पेड़ सामने आए हैं। पिछले 3 सालों में 250 हेक्टेयर क्षेत्र में नए बगीचे भी तैयार किए गए हैं। इससे आने वाले सालों में सीताफल का उत्पादन बढ़ने की संभावना है। कुछ फलों का वजन एक किलो तक पहुंचा इस बार 20 अक्टूबर तक फल तोड़ने पर प्रतिबंध के कारण पेड़ों पर फलों को पर्याप्त समय मिला। परिणामस्वरूप फलों का औसत वजन 200 से 650 ग्राम तक रहा। कुछ फलों का वजन 800 ग्राम से एक किलोग्राम तक पहुंच गया। हालांकि, कम बारिश के कारण कुल उत्पादन प्रभावित हुआ है। सीजन आगे बढ़ने के साथ फलों का आकार भी छोटा होने लगा है। खैरमटाकोल के किसान राजकुमार भलावी के अनुसार, उद्यानिकी विभाग के बिक्री काउंटर के माध्यम से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। व्यापारी सीधे खेतों और बगीचों से भी सीताफल खरीद रहे हैं। गूदे से बनते हैं रबड़ी, बासुंदी और आइसक्रीम सीताफल के गूदे से रबड़ी, बासुंदी, शेक, आइसक्रीम और मिठाइयां बनाई जा सकती हैं। जिले में पल्प प्रोसेसिंग की तीन युनिट्स हैं। इससे फल को प्रोसेस करके उत्पादों के रूप में बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं हैं। किसानों और आदिवासी संग्राहकों को संगठित करने के लिए भूतबंधानी सीताफल क्रॉप प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड सहित दो किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाए गए हैं। जीआई टैग के बाद ब्रांडिंग-बिक्री पर जोर उद्यानिकी विभाग की उपसंचालक आशा उपवंशी के अनुसार, जीआई टैग मिलने के बाद सीताफल की पहचान और बाजार विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। कंपनी गार्डन के बाहर बिक्री काउंटर भी शुरू किया गया है। विभाग का फोकस सीताफल की बेहतर ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग पर है। इससे आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है।
