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मुआवजे और जवाबदेही की मांग पर चिता आंदोलन:पन्ना कलेक्टर से चर्चा में अमित भटनागर ने उठाए घर तोड़ने, गांव डूबने के सवाल

पन्ना में मझगवां और रुंझ परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का चिता आंदोलन गुरुवार को भी जारी रहा। कलेक्टर हर्ष सिंह और जिला प्रशासन की टीम ने बनहरी कला में आंदोलनकारियों से चर्चा की। जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने मुआवजा बांटने और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने से पहले घर तोड़े जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने पुराने सर्वे और लंबित आवेदनों की समीक्षा के साथ जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। हर गांव में नए सर्वे का आश्वासन गुरुवार, 29 अक्टूबर को कलेक्टर हर्ष सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बनहरी कला पहुंची। टीम में जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी, अजयगढ़ एसडीएम आलोक मार्को, तहसीलदार सुरेंद्र अहिरवार और जनपद सीईओ सतीश नागवंशी शामिल थे। यहां अधिकारियों और अमित भटनागर के बीच प्रभावितों की समस्याओं पर चर्चा हुई। कलेक्टर हर्ष सिंह ने कहा कि अगले दिन से हर गांव में नया सर्वे शुरू कराया जाएगा और समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस पर भटनागर ने सवाल किया कि प्रभावितों का सर्वे और मुआवजा बांटने का काम पूरा होने से पहले घर कैसे तोड़े गए और गांव डूब क्षेत्र में कैसे आए। पुराने सर्वे और लंबित आवेदनों की समीक्षा की मांग अमित भटनागर ने कहा कि नया सर्वे शुरू करने से पहले पुराने सर्वे, मुआवजा वितरण और घर तोड़े जाने की कार्रवाई में प्रशासन की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनके मुताबिक, मार्च में कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान हर प्रभावित की समस्या का अलग-अलग सर्वे कराने पर सहमति बनी थी। इसके बाद जय किसान संगठन ने चार दिन में प्रभावित परिवारों के दस्तावेज और समस्याओं का ब्यौरा प्रशासन को सौंप दिया था। भटनागर ने बताया कि उस समय हर मामले की जांच कर पात्रता या अपात्रता का कारण बताने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन मार्च से अब तक आवेदनों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मांग की कि नया सर्वे कराने के बजाय पहले जमा दस्तावेजों की समीक्षा कर लंबित मामलों का जल्द निपटारा किया जाए। मुआवजे के बिना घर तोड़ने की जांच की मांग आंदोलनकारियों ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 38 का हवाला देते हुए पुनर्वास की शर्तों का पालन किए बिना घर तोड़े जाने का मुद्दा उठाया। भटनागर ने आरोप लगाया कि करीब छह महीने पहले मकान तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई, जबकि कई परिवारों को मुआवजा नहीं मिला और उनके घर पानी में डूब गए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यह तय करने की मांग की कि किन अधिकारियों की निगरानी में यह कार्रवाई हुई। साथ ही, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की। दस्तावेज देखकर कार्रवाई का आश्वासन चर्चा के दौरान कलेक्टर हर्ष सिंह ने कहा कि वे पूरे मामले के दस्तावेज और प्रभावितों की फाइलें खुद देखेंगे। उन्होंने गड़बड़ी या लापरवाही मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। अमित भटनागर ने आंदोलन के दौरान दिव्या अहिरवार सहित अन्य आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमों को फर्जी बताते हुए उनकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग भी की। जय किसान संगठन ने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर आंदोलन खत्म नहीं होगा। संगठन के मुताबिक, मुआवजे, पुनर्वास और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के मामले में ठोस कदम उठाए जाने तक चिता आंदोलन जारी रहेगा। नए कलेक्टर और एसपी की तैनाती के बाद प्रभावित ग्रामीणों को निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद है।

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