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इंदौर में ठेका 28 लाख का, भुगतान 6 करोड़ पार:सिक्योरिटी गार्ड टेंडर में घोटाले का आरोप; कांग्रेस अध्यक्ष बोले-12 साल से एक ही एजेंसी पर मेहरबानी

इंदौर नगर निगम में सिक्योरिटी गार्ड की नियुक्ति के ठेके को लेकर कांग्रेस ने घोटाले का आरोप लगाया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने दावा किया कि साल 2014 में प्राणी संग्रहालय के लिए एक साल का ठेका दिया गया था, लेकिन उसी एजेंसी से करीब 12 साल तक निगम के विभिन्न विभागों, जोनल कार्यालयों और अन्य स्थानों पर सिक्योरिटी गार्ड की सेवाएं ली जाती रहीं। चौकसे ने दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठाया कि सीमित अवधि और निर्धारित काम के लिए हुए एग्रीमेंट के आधार पर इतने लंबे समय तक पूरे निगम में सेवाएं कैसे ली जाती रहीं। उन्होंने मामले में निगम अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और लोकायुक्त में शिकायत करने की बात कही है। चौकसे ने आरोप लगाया कि साल 2014 में नगर निगम ने टेंडर जारी कर सुरक्षा गार्ड, गनमैन और सुपरवाइजर उपलब्ध कराने के लिए इंदौर की आशापुरी सिक्योरिटी सर्विस को एक साल का ठेका दिया था। एजेंसी के संचालक देवेंद्र सिंह चौहान हैं। ठेके की अवधि पूरी होने के बाद भी एजेंसी से काम लिया जाता रहा। साल 2016 में जिंसी स्थित निगम की टकसाल वर्कशॉप की सुरक्षा के लिए भी तत्कालीन आयुक्त की स्वीकृति के आधार पर इसी एजेंसी से मैनपावर लेने का निर्णय लिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए साल 2026 तक एजेंसी से सेवाएं ली गईं और भुगतान किया गया। चौकसे ने इस मामले में निगम के कई अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। 6 करोड़ से ज्यादा भुगतान पर उठाए सवाल चौकसे के मुताबिक, साल 2016 से 2026 के बीच एजेंसी को 6 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया गया। उन्होंने दावा किया कि मूल काम और निर्धारित अवधि के हिसाब से एजेंसी को देय राशि करीब 28.35 लाख रुपए ही बनती थी। कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि यदि ठेका प्राणी संग्रहालय के लिए था, तो उसके आधार पर निगम के दूसरे विभागों, जोनल कार्यालयों और विभिन्न आयोजनों के लिए भी मैनपावर लेने की व्यवस्था कैसे लागू रही। एग्रीमेंट में प्राणी संग्रहालय का उल्लेख, नए टेंडर पर सवाल चौकसे ने बताया कि महापौर परिषद के संकल्प क्रमांक 274, दिनांक 13 अगस्त 2014 के तहत सुरक्षा गार्ड, गनमैन और सुपरवाइजर की सेवाएं लेने की मंजूरी दी गई थी। इसके बाद 25 अगस्त 2016 को एजेंसी के साथ एग्रीमेंट किया गया। उन्होंने एग्रीमेंट की शर्त क्रमांक 39 का हवाला देते हुए कहा कि टेंडर की वैधता 180 दिन निर्धारित थी। ऐसे में सवाल है कि निर्धारित अवधि वाले टेंडर के आधार पर एजेंसी को इतने सालों तक काम कैसे मिलता रहा। कांग्रेस ने इस पूरे मामले में नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। चौकसे ने निगम अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। साथ ही मामले की शिकायत लोकायुक्त में करने की बात कही है।

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