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चलती सड़क पर रेट पूछा, ऑटो में गंदी हरकत:9 महीने में 26% बढ़े महिला अपराध, भोपाल में महिलाएं कितनी सुरक्षित?

मैं क्लास खत्म होने के बाद घर जाने के लिए नूतन कॉलेज के पास सुभाष स्कूल वाले बस स्टैंड पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इंतजार करती थी। वहां अकसर कुछ अंकल बैठे रहते थे। हमारे खड़े रहने के दौरान वे अपने मोबाइल पर तेज आवाज में पॉर्न वीडियो चला देते थे। ऐसा तीन-चार बार हुआ। एक बार तो उनमें से एक ने हमारे सामने ही अश्लील हरकत शुरू कर दी। यह आपबीती भोपाल के एक कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा की है। सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को किस तरह की असहज और डरावनी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, यह घटना उसकी एक बानगी है। महिला सुरक्षा और अधिकारों को लेकर अक्टूबर में भोपाल में दो बार लड़कियों और महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। 2 अक्टूबर को कमला पार्क से गैमन इंडिया तक और 10 अक्टूबर को बोट क्लब पर पैदल मार्च निकाला गया। दोनों जगह 100 से ज्यादा महिलाएं और लड़कियां ‘रिक्लेम द स्पेस’ का नारा लगाते हुए सड़कों पर उतरीं। दैनिक भास्कर ने शहर में महिलाओं से बात की और उनकी आपबीती जानी। पांच महिलाओं के अनुभव सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठाते हैं। आज संडे बिग स्टोरी में इसी मसले पर बात.. केस 1: निशातपुरा फाटक- बाइक सवारों ने पूछा रेट भोपाल के करोंद में रहने वाली सरिता बताती हैं कि करीब 10-12 दिन पहले वह अपनी दोस्त के साथ काम से बाहर गई थीं। लौटने में देर हो गई। ऑटो नहीं मिला, इसलिए दोनों रात करीब 10 बजे निशातपुरा फाटक से पैदल घर जा रही थीं। तभी दो-तीन बाइक सवार उनके पास रुके और पूछा कि एक रात के कितने पैसे लोगी। सरिता बताती हैं, “मैं सामाजिक काम करती हूं और कुछ संगठनों से जुड़ी हूं। इसलिए मैंने डरने के बजाय उन्हें जवाब दिया और सबक सिखाने की बात कही। इसके बाद वे भाग गए।” उन्होंने कहा कि यह घनी आबादी वाला इलाका है। आसपास दुकानें हैं और सड़क पर लोगों की आवाजाही भी रहती है। इसके बावजूद बाइक सवारों ने ऐसा कमेंट पास किया। उन्होंने सहमते हुए कहा कि अगर यही घटना किसी सुनसान जगह पर होती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। केस 2: बोट क्लब- परिवार के साथ थी, फिर भी पीछा 18 वर्षीय सीता मरियम बताती हैं कि करीब एक महीने पहले वह परिवार के साथ बोट क्लब घूमने गई थीं। वह अपनी कजिन के साथ परिवार से थोड़ा अलग होकर फोटो खींचने निकलीं। इसी दौरान दो अधेड़ उम्र के पुरुष उनके पीछे आने लगे। जहां जातीं, दोनों पुरुष भी उसी दिशा में चलने लगते। इससे वह और उनकी कजिन घबरा गईं। परिवार के साथ मौजूद होने के बावजूद, जब ऐसा अनुभव हुआ तो दूसरे इलाकों को लेकर चिंता स्वाभाविक है। केस 3: एमपी नगर से अयोध्या बायपास- ऑटो में चालक की अश्लील हरकत भोपाल की एक कंपनी में काम करने वाली आरुषि रोज अयोध्या बायपास से एमपी नगर आती-जाती हैं। वह बताती हैं कि एक दिन ऑफिस से निकलने में देर हो गई। घर लौटने के लिए उन्होंने एमपी नगर से पब्लिक ऑटो लिया। रास्ते में बाकी सवारियां उतर गईं। आरुषि के मुताबिक, अयोध्या बायपास पहुंचने पर उन्होंने देखा कि ऑटो चालक अश्लील हरकत कर रहा था। यह देखकर वह डर गईं और तुरंत पास की एक दुकान पर चली गईं। वह कहती हैं कि इस घटना के बाद से पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करते समय डर लगता है, लेकिन नौकरी के लिए उन्हें रोज आना-जाना पड़ता है। उनके लिए मुश्किल यह है कि घटना के बाद भी रोजमर्रा की जरूरतों के कारण उसी तरह यात्रा जारी रखना मजबूरी है। केस 4: रचना नगर- छेड़छाड़ पर पुलिस ने बोली- देर शाम बाहर मत निकलाे रचना नगर में रहने वाली विशाखा बताती हैं कि करीब एक साल पहले वह अपनी दोस्त से मिलने उसके हॉस्टल गई थीं। शाम करीब 7 बजे दोनों हॉस्टल से गौतम नगर मार्केट की तरफ जा रही थीं। उन्होंने बताया कि हॉस्टल से करीब 100 मीटर दूर एक युवक ने पीछे से मारा और छूने का प्रयास किया। इससे पहले कि मैं कुछ समझ पातीं, वह स्कूटी से भाग गया। विशाखा ने तुरंत महिला हेल्पलाइन और पुलिस हेल्पलाइन पर फोन किया। दोस्तों को भी सूचना दी। उनके दोस्त कुछ ही मिनट में पहुंच गए, लेकिन पुलिस करीब आधे घंटे बाद आई। विशाखा का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनसे कहा कि इतनी देर तक बाहर नहीं निकलना चाहिए। इस पर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शाम 7 बजे भी महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल सकतीं? उन्होंने पुलिस के देर से पहुंचने पर भी नाराजगी जताई। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने युवक का पता लगाने की बात कही। केस 5: करोंद से डीआईजी बंगला मार्ग- ऑटो में बैठाकर दूसरी सवारियों ने की छेड़छाड़ करोंद की रहने वाली मनीषा बताती हैं कि उनकी एक दोस्त कॉलेज से लौट रही थी। रास्ते में कोई दूसरा साधन नहीं मिलने पर वह ऑटो में बैठ गई। मनीषा के मुताबिक, रास्ते में चालक ने दो अन्य लड़कों को भी ऑटो में बैठा लिया। इसके बाद वे उसकी दोस्त के साथ छेड़छाड़ करने लगे और उसे गलत तरीके से छूने की कोशिश की। मनीषा बताती हैं कि उनकी दोस्त ने शोर मचाकर किसी तरह खुद को छुड़ाया और वहां से निकल पाई। उनके मुताबिक, करोंद से डीआईजी बंगला और मंडी गेट की तरफ जाने वाले रास्ते पर भी लड़कियां असुरक्षित महसूस करती हैं।
वह कहती हैं कि सार्वजनिक जगहों पर लड़कियों को घूरना और अश्लील नजरों से देखना भी उनके लिए रोजमर्रा की परेशानी है। सवाल वही: महिलाओं को सुरक्षित माहौल कब मिलेगा? इन पांच अनुभवों में जगह और परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन एक बात समान है-महिलाओं को बस स्टैंड, सड़क, पर्यटन स्थल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे सामान्य सार्वजनिक स्थानों पर भी असहजता और डर का सामना करना पड़ रहा है। दर्ज अपराधों के आंकड़े बढ़ रहे हैं और महिलाएं अपने अनुभव साझा कर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रही हैं। उनका कहना है कि सुरक्षित शहर का मतलब सिर्फ बड़े आयोजनों या प्रमुख स्थलों पर व्यवस्था करना नहीं, बल्कि रोजाना घर से कॉलेज, नौकरी या बाजार जाने वाली महिलाओं को भी सुरक्षित माहौल देना है। ‘रिक्लेम द स्पेस’ के जरिए उनकी मांग है कि सार्वजनिक स्थानों पर बिना डर आने-जाने का अधिकार सुनिश्चित हो और शिकायत मिलने पर पुलिस समय पर कार्रवाई करे। पुलिस का कहना- तुरंत करते हैं कार्रवाई
भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार का कहना है कि महिला अपराध के केस पुलिस की टॉप प्रायोरिटी है। बच्चियों को गुड टच-बैड टच के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। सभी अधिकारियों और जवानों को महिला संबंधी शिकायतों पर संवेदनशीलता से तत्काल वैधानिक कार्रवाई के निर्देश हैं। पॉक्सो मामलों में दो महीने के भीतर चालान पेश किया जाता है, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके। भीड़भाड़ और संवेदनशील इलाकों में नियमित पेट्रोलिंग की जा रही है। त्योहारों पर सक्रिय रहने वाली ‘शी-शक्ति’ पेट्रोलिंग को भी नियमित रूप से शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।

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