बड़वानी शहर में नवरात्रि के अवसर पर मां गरबा रास समिति द्वारा अयोध्या धाम फुटबॉल ग्राउंड पर नौ दिवसीय ओपन गरबा रास महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। 11 से 19 अक्टूबर तक चल रहे इस आयोजन में गुजराती और निमाड़ी सहित विभिन्न पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुतियां हो रही हैं। आकर्षक पंडाल, रंग-बिरंगी रोशनी और संगीत की धुनों के बीच गरबा प्रेमी उत्साह के साथ गरबा कर रहे हैं। आयोजन में प्रवेश निशुल्क रखा गया है। 2014 से लगातार हो रहा आयोजन समिति के दिनेश शर्मा सहित सदस्यों ने बताया कि मां गरबा रास महोत्सव वर्ष 2014 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष भी शहरवासियों को ओपन गरबा में शामिल होने का अवसर मिल रहा है। निशुल्क प्रवेश होने से बड़ी संख्या में गरबा प्रेमी आयोजन में पहुंच रहे हैं। समिति ने आयोजन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की हैं। गुजरात, खंडवा और रतलाम के कलाकार दे रहे प्रस्तुतियां महोत्सव में गुजरात से आए गायक और वादक अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध रहे हैं। खंडवा और रतलाम के कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। गुजराती और निमाड़ी गरबा सहित पारंपरिक नृत्य आयोजन के प्रमुख आकर्षण हैं। संगीत की लय और गरबा की थाप पर प्रतिभागी उत्साह से झूम रहे हैं। बीडीसी ग्रुप की वेशभूषा बनी आकर्षण आयोजन में बीडीसी ग्रुप बड़वानी के सदस्य भी प्रतिदिन गरबा और नृत्य प्रस्तुतियों में शामिल हो रहे हैं। ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि उनकी खासियत आकर्षक और अलग वेशभूषा है। इसके लिए कपड़ों को विशेष रूप से कस्टमाइज कराया जाता है। ग्रुप शहर के विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में प्रस्तुतियां देता है। टीम के सदस्य गरबा और नृत्य के माध्यम से पारंपरिक संस्कृति को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। दर्शकों के लिए उपहार और बैठक व्यवस्था आयोजन स्थल पर अतिथियों के लिए अलग से बैठक व्यवस्था की गई है। विशेष दिनों में गरबा प्रेमियों और दर्शकों के लिए फ्रिज, कूलर, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी और वाटर कूलर सहित आकर्षक उपहार भी रखे गए हैं। म्यूजिक, साउंड सिस्टम और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी मुख्य रूप से मयंक शर्मा (मय्यू) संभाल रहे हैं। 19 अक्टूबर तक शामिल हो सकेंगे शहरवासी समिति ने शहरवासियों से 19 अक्टूबर तक चलने वाले महोत्सव में शामिल होने की अपील की है। लोग निशुल्क ओपन गरबा में भाग लेकर नृत्य कर सकते हैं और मां की आराधना में सहभागी बन सकते हैं। समिति के अनुसार, ऐसे आयोजन भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर देते हैं।
