जिले की कोलारस, बदरवास और लुकवासा उपमंडी में इन दिनों मक्के की बंपर आवक से दीपावली की खुशियां दोगुनी हो गई हैं। कम लागत में बेहतर मुनाफे और हाइब्रिड बीज के कारण इस साल तय लक्ष्य से 31% कम बोवनी के बावजूद मक्का का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। मंडी में उमड़ रही किसानों की भीड़ बता रही है कि इस बार अन्नदाताओं की दिवाली मक्के के सुनहरे दानों से रोशन होने वाली है। सोयाबीन की जगह मक्के का राज: कभी ‘पीले सोने’ के रूप में सोयाबीन के लिए जाने जाने वाले इस इलाके में मक्के का रकबा 17 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 90 हजार हेक्टेयर के पार पहुंच चुका है। दिवाली से पहले मंडी में लगा मेला: अकेले लुकवासा, बदरवास और कोलारस मंडियों में हर दिन 2 हजार से अधिक ट्रॉलियों की डाक लग रही है। मंडी परिसर फुल होने के कारण फोरलेन हाईवे के किनारे ट्रॉलियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। बाज़ार में रौनक, किसानों के चेहरे खिले: मंडी में मक्का 1,800 से 2,600 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रहा है। -(लुकवासा मंडी प्रभारी अरविंद दुबे के अनुसार रोज)
