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मुस्कान-रविता को फांसी, क्या सोनम को भी यही सजा मिलेगी?:नीला ड्रम और सांप कांड जैसा ही राजा हत्याकांड, फिर भी सजा में अंतर मुमकिन

मेरठ के दो चर्चित हत्याकांडों में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और रविता कश्यप को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों मामलों में उनके प्रेमियों को भी मृत्युदंड दिया गया है। इन फैसलों के बाद इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम का मामला भी चर्चा में है। मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद राजा की मां उमा रघुवंशी ने भी सोनम समेत अपने बेटे की हत्या के पांचों आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। तीनों मामलों में हत्या और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं, लेकिन क्या समान धाराओं के कारण सोनम को भी फांसी की सजा हो सकती है? क्या उसे उम्रकैद या बरी होने जैसी राहत मिल सकती है और तीनों मामलों में कानूनी अंतर क्या हैं? इन सवालों के जवाब जानने के लिए भास्कर ने मामलों की पड़ताल की और कानून के जानकारों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट…
तीनों मामलों में BNS की धाराएं समान, लेकिन सजा कैसे तय होती है? मुस्कान, रविता और सोनम के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कुछ समान धाराएं लगाई गई हैं। हालांकि, तीनों मामलों के फैक्ट और लीगल पोजिशन अलग हैं। धारा 103(1): हत्या। धारा 61(2)(a): आपराधिक साजिश। धारा 238: अपराध के सबूत मिटाना या अपराधी को बचाने के लिए गलत जानकारी देना। अब जानिए क्या है राजा रघुवंशी हत्याकांड में सोनम की भूमिका 11 मई 2025 को इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी और सोनम की शादी हुई थी। 20 मई को दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए। 22 मई को राजा-सोनम मेघालय के सोहरा पहुंचे। इसी दिन रात को नोंग्रियाट के होम स्टे में रूके। अगले दिन 23 मई को दोनों सोहरा पहुंचने से पहले लापता हो गए। 26 मई को राजा के भाई ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 2 जून 2025 को मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले की एक गहरी खाई से पुलिस ने राजा का शव बरामद किया था। दो पॉइंट में समझिए सोनम के मामले में क्या होगा? हाईकोर्ट के अधिवक्ता ओमेंद्र मिश्रा के मुताबिक हत्या के हर मामले में फांसी की ही सजा हो, ये जरूरी नहीं है। सजा तय करते समय कोर्ट अपराध की गंभीरता, आरोपी की भूमिका और मामले की परिस्थितियों पर विचार करती है। 1.उम्रकैद या बरी होने की संभावना मिश्रा के मुताबिक, यदि सोनम पर हत्या का आरोप साबित होता है, लेकिन मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में नहीं आता, तो अदालत मृत्युदंड के बजाय आजीवन कारावास दे सकती है। उम्रकैद का अर्थ हर मामले में केवल 14 साल की कैद नहीं होता। यदि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाता, तो आरोपी बरी भी हो सकता है। 2.साजिश में भूमिका साबित करना जरूरी अदालत यह जांचेगी कि सोनम की कथित साजिश में क्या भूमिका थी और अभियोजन पक्ष उसे किन सबूतों से साबित करता है। पैसे देकर हत्या की योजना बनाने संबंधी आरोपों की पुष्टि सबूतों के आधार पर होगी। तीनों मामलों में क्या हैं कानूनी अंतर? कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, तीनों मामलों में सजा तय करते समय अलग-अलग तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार होगा। मुस्कान और रविता के मामलों में बच्चों के पालन-पोषण का पहलू भी सजा पर बहस के दौरान उठ सकता है। मुस्कान के दो और रविता के तीन बच्चे होने की जानकारी कोर्ट को दी गई है। दोष साबित होने के बाद सजा पर सुनवाई के दौरान पारिवारिक परिस्थितियों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, केवल बच्चों का होना मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने की गारंटी नहीं है। सोनम के मामले में भी अदालत मौजूदा सबूतों, उसकी कथित भूमिका और अन्य प्रासंगिक परिस्थितियों के आधार पर फैसला करेगी। केवल बच्चों की संख्या के आधार पर तीनों मामलों में सजा की तुलना नहीं की जा सकती। मृत्युदंड के बाद भी उपलब्ध हैं लीगल ऑप्शन यदि किसी निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है, तो उसे लागू करने से पहले कानून में तयशुदा लीगल प्रोसेस पूरी करनी होती है।

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