कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को दो शंकराचार्यों का आशीर्वाद मिला है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने यात्रा के लिए शुभकामना संदेश भेजे हैं। दिग्विजय सिंह ने दोनों के पत्र साझा करते हुए इसे अपने संकल्प और सहयात्रियों के लिए प्रेरणादायी बताया है। अविमुक्तेश्वरानंद ने देवस्थानों की मर्यादा का मुद्दा उठाया स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने संदेश में लिखा कि दिग्विजय सिंह भगवान श्रीराम की प्रेरणा से धर्म के नाम पर हो रहे अधर्म और मंदिरों में चढ़ावा चोरी के खिलाफ जनजागरण के लिए पदयात्रा कर रहे हैं। उन्होंने 20 अक्टूबर से दशहरा पर्व के अवसर पर भगवान महाकालेश्वर का आशीर्वाद लेकर उज्जैन से अयोध्या तक यात्रा करने के संकल्प के लिए शुभकामनाएं दीं। संदेश में सनातन धर्म को सत्य, अहिंसा, पवित्रता, नीति और देवालयों की मर्यादा से जुड़ा बताया गया है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर होने वाला अनाचार, असत्य या छद्म रूप सनातन नहीं हो सकता। देवस्थानों की मर्यादा और अर्पित सामग्री के सम्मान के लिए आवाज उठाना वास्तविक धर्म-स्वाभिमान है। सदानंद सरस्वती ने धर्म और राजनीति पर रखे विचार द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने अपने संदेश में धर्म और राजनीति के वास्तविक स्वरूप पर विचार रखे। उन्होंने लिखा कि भारत धर्म और नीति का देश है। नीति का प्रयोग धर्म को बल देने के लिए किया जाना चाहिए। संदेश में सनातन धर्म की व्यापकता और उसके मूल सिद्धांतों का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने दिग्विजय सिंह की यात्रा को भगवान महाकाल के श्रीचरणों में समर्पित बताते हुए उनके लिए आध्यात्मिक शक्ति की प्रार्थना की। दिग्विजय सिंह ने संदेश के लिए आभार जताते हुए कहा कि शंकराचार्य के विचार समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं और उनके आशीर्वचन यात्रा के संकल्प को नई दिशा और शक्ति देंगे। दिग्विजय बोले- आशीर्वाद से संकल्प और दृढ़ हुआ दिग्विजय सिंह ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रति आभार जताते हुए लिखा कि सत्य, शुचिता और सनातन धर्म की मर्यादा की रक्षा के संकल्प को उनका आशीर्वाद मिलना प्रेरणादायी है। उन्होंने यात्रा को धर्म के नाम पर अधर्म के खिलाफ और सत्य सनातन के स्वाभिमान की रक्षा का संकल्प बताया। दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित पदयात्रा 20 अक्टूबर से उज्जैन में महाकालेश्वर का आशीर्वाद लेकर अयोध्या तक निकलेगी। यात्रा के जरिए धर्म के नाम पर हो रहे कथित अधर्म, धार्मिक स्थलों की पवित्रता और सनातन धर्म के वास्तविक स्वरूप को लेकर जनजागरण करने की बात कही गई है।
