देश में वायु प्रदूषण कम करने के लिए 2019 से अब तक 13 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा जारी किए गए, लेकिन खर्च की गई रकम का 68% हिस्सा सिर्फ सड़कों की धूल हटाने पर लगा। अर्थ5आर की इंडिया एयर पॉल्यूशन 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में प्रदूषित हवा से 20 लाख लोगों की मौत प्रदुषण से जुड़ी मिली। यह संख्या 2000 के मुकाबले 43% ज्यादा है। भारतीयों की औसत उम्र साफ हवा से 3.5 साल बढ़ सकती रिपोर्ट के मुताबिक, अगर हवा डब्ल्यूएचओ के मानकों के मुताबिक साफ हो जाए तो भारतीयों की औसत जीवन प्रत्याशा 3.5 साल बढ़ सकती है। रिपोर्ट बताती है कि 2025 में भारत में पीएम2.5 का औसत स्तर 48.9 रहा। यह डब्ल्यूएचओ की तय सीमा से 10 गुना से ज्यादा है। बीते साल दुनिया के 143 देशों में भारत छठा सबसे प्रदूषित देश रहा। प्रदूषण की निगरानी में कमी, 28 शहरों में जांच स्टेशन नहीं 2025 में वायु गुणवत्ता जांचने के 1,600 स्टेशन थे। इनमें 565 लगातार व 1,035 मैनुअल जांच वाले थे। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के 130 शहरों में से 28 में लगातार प्रदूषण मापने वाला एक भी स्टेशन नहीं था। वहीं, 40 शहरों में यह जांच भी पूरी नहीं हुई कि वहां किन वजहों से कितना प्रदूषण फैलता है। 2025 में देश के 229 में से 190 शहरों में पीएम10 का स्तर मानक से ज्यादा रहा। गंगा के मैदानी इलाकों के 61 में से 60 शहरों में प्रदूषित रहे। दिल्ली-एनसीआर के सभी 14 शहरों में भी पीएम10 का स्तर सीमा से ज्यादा दर्ज किया गया। ———- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- पटाखों पर पूरी तरह बैन नहीं:लेकिन 24 घंटे आतिशबाजी की परमिशन भी नहीं, सरकार समय तय करे सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पटाखों पर बैन हटाने की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने कहा- पूरे देश में पटाखों पर बैन लगाना मुमकिन नहीं है। पूरी पाबंदी से लोगों की भावनाएं आहत होंगी। पूरी खबर पढ़ें…
