इंदौर में इस बार कमजोर मानसून ने अगले साल गर्मी में जल संकट की आशंका बढ़ा दी है। शहर में सामान्य तौर पर होने वाली करीब 37 इंच बारिश के मुकाबले इस मानसून में लगभग 23 इंच पानी ही बरसा। यानी करीब 14 इंच बारिश कम हुई। इसका असर जलस्रोतों के साथ भूजल रिचार्ज पर भी दिखाई दे रहा है। यशवंत सागर सहित शहर के प्रमुख तालाबों में भी पिछले वर्षों की तुलना में कम पानी जमा हुआ है। वहीं, 2026 में भूजल रिचार्ज का आंकड़ा पिछले चार वर्षों के मुकाबले काफी नीचे आ गया है। 2008 में भी बनी थी जलसंकट की स्थिति इंदौर में वर्ष 2008 में भी करीब 20 इंच बारिश हुई थी और उस समय भी जल संकट की स्थिति बनी थी। अब 18 साल बाद कम बारिश के कारण एक बार फिर गर्मी में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। शहर की बड़ी आबादी नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक नर्मदा से मिलने वाले पानी की मात्रा बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है। ऐसे में तालाबों में कम जलभराव, भूजल का लगातार दोहन और सप्लाई नेटवर्क में होने वाला नुकसान चुनौती बढ़ा सकते हैं। शहर की आबादी करीब 35 से 40 लाख मानी जाती है। घरेलू जरूरतों के लिए प्रतिदिन करीब 620 एमएलडी पानी की आवश्यकता का अनुमान है। औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य उपयोग जोड़ने पर कुल मांग 750 से 800 एमएलडी तक बताई जाती है। नर्मदा से 440 एमएलडी पानी मिलने का आंकड़ा इसके मुकाबले नर्मदा से करीब 440 एमएलडी पानी मिलने का आंकड़ा दिया गया है। वितरण के दौरान लीकेज और अन्य कारणों से 20 से 22 प्रतिशत तक पानी का नुकसान होने की बात भी सामने आती है। ऐसे में उपलब्ध पानी का बेहतर प्रबंधन और वैकल्पिक स्रोतों को सुरक्षित रखना जरूरी है। पिछली गर्मियों में बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा था। हालात संभालने के लिए करीब 700 टैंकरों से पानी पहुंचाना पड़ा। शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल और नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल व हाइड्रेंट बताए जाते हैं। लेकिन भूजल का लगातार दोहन भविष्य के लिए चिंता का विषय है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखे जाने का उल्लेख है। भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत बताया गया है, जो बढ़ने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। इंदौर शहर में 27 तालाब शहर में तालाबों की भूमिका भी अहम है। इंदौर में 27 तालाब हैं, जिनमें से सात प्रमुख तालाबों की निगरानी नगर निगम करता है। इनकी संयुक्त क्षमता करीब 2,880 करोड़ लीटर बताई गई है, जबकि उपलब्ध पानी का एक अन्य आकलन करीब 2,260 करोड़ लीटर है। तालाबों में नहीं हुआ जलभराव इस बार कम बारिश के कारण तालाबों में अपेक्षित जलभराव नहीं हुआ। कुछ तालाबों में जलस्तर क्षमता के मुकाबले काफी नीचे है, जबकि कुछ के आंकड़ों का दोबारा मिलान जरूरी है। शहर के कई वार्डों में अपनी ओवरहेड टंकियां नहीं हैं। ऐसे क्षेत्रों में दूसरे वार्डों की टंकियों से पानी पहुंचाया जाता है। कुछ जगहों पर एक ही टंकी से तीन वार्डों तक आपूर्ति होती है। इससे सप्लाई के समय और वितरण पर दबाव बढ़ता है। पिछले साल मालवा मिल स्थित हाइड्रेंट को भी पहली बार बंद करना पड़ा था। इस बार संकट से बचने के लिए जलस्रोतों की स्थिति, टैंकरों की जरूरत, पाइपलाइन लीकेज और भूजल रिचार्ज पर समय रहते काम करने की जरूरत है। सीएम से 50 करोड़ का का पैकेज मांगा इस बीच महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपए के पैकेज की मांग की है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की 15 अक्टूबर को नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव, मंत्री तुलसी सिलावट और जलप्रदाय व नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसमें नर्मदा-गंभीर लिंक के जरिए यशवंत सागर और बिलावली तालाबों तक पानी पहुंचाने की संभावना सहित जल संकट से निपटने के उपायों पर चर्चा हो सकती है। वार्डवार संकट का आकलन, टैंकरों की व्यवस्था, लीकेज सुधार, रिचार्ज पिट और वर्षा जल संचयन जैसे उपाय भी अहम होंगे। भूजल पर बढ़ती निर्भरता पानी की गुणवत्ता भी चिंता 2019 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 70 स्थानों पर बोरवेल के पानी के नमूनों की जांच किए जाने का उल्लेख है। इनमें से 69 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। इस आंकड़े का उपयोग करते समय जांच के मानक, प्रदूषण के प्रकार और रिपोर्ट का संदर्भ स्पष्ट करना जरूरी है। भूजल की उपलब्धता के साथ उसकी गुणवत्ता की नियमित जांच भी जरूरी है। ये खबर भी पढ़ें… मानसून की विदाई के 14 दिन बाद जलसंकट की आहट मानसून की विदाई के 14 दिन बाद ही इंदौर में आगामी गर्मियों में जलसंकट की आहट सुनाई देने लगी है। शहर की करीब 40 लाख आबादी के सामने पानी की उपलब्धता बनाए रखने की चुनौती को देखते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लोगों से अभी से पानी बचाने की अपील की है। पूरी खबर पढ़ें
