जिसके कंधों पर कानून की जिम्मेदारी थी, उसकी संपत्तियों का हिसाब अब जांच एजेंसी खंगाल रही है। अब तक जांच में विवादित जमीनों के सौदे, परिजनों के नाम फ्लैट और फर्में, बैंक खातों में करोड़ों का लेन-देन और एक किसान परिवार की जमीन का एग्रीमेंट सामने आया है। इंदौर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान के मामले में लोकायुक्त की जांच ने कई सवाल खड़े किए हैं। देवास में मकान, इंदौर की पॉश कॉलोनियों में फ्लैट, गांवों में कृषि भूमि और कारोबारी फर्में जांच के दायरे में हैं। शुरुआती जांच में आय से कई गुना अधिक संपत्ति का मामला सामने आया है। आखिर पुलिस विभाग में ड्राइवर की नौकरी करने वाला शख्स इतना बड़ा धनपति कैसे बन गया। पढ़िए इस रिपोर्ट में… करीब एक साल पहले प्रधान आरक्षक ड्राइवर फिरोज खान का देवास से इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीएस) में तबादला हुआ था। इंदौर में पदस्थ होने के बावजूद वह यहां ड्यूटी पर नहीं आया। मेडिकल और अन्य कारणों का हवाला देकर वह दोबारा देवास स्थानांतरण की कोशिश कर रहा था। इसी बीच लोकायुक्त की कार्रवाई में उसकी संपत्तियों का मामला सामने आ गया। लोकायुक्त ने देवास में 11 और इंदौर में चार स्थानों पर दस्तावेजों और संपत्तियों की पड़ताल की। अब तक की जांच में साढ़े छह करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति सामने आने की जानकारी दी गई है। संपत्तियों का अंतिम मूल्यांकन और आय के स्रोतों की पूरी जांच अभी बाकी है। किसान परिवार के विवाद से खुला जमीनों का नेटवर्क फिरोज खान के संपत्ति नेटवर्क की पड़ताल में सांवेर तहसील के ग्राम गुरान की करीब 21.75 बीघा कृषि भूमि का मामला सामने आया। यहां एक किसान परिवार में जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि इसी का फायदा उठाकर फिरोज ने इंदौर की महिला परिचित रोशनी वर्मा के नाम जमीन का पंजीकृत एग्रीमेंट करा लिया।
किसान गौरव चौधरी के मुताबिक, उनके पिता के साथ जमीन को लेकर विवाद था। इसी दौरान फिरोज ने पिता से संपर्क किया और पूरी जमीन का सौदा 35 लाख रुपए प्रति बीघा के हिसाब से कर लिया। बाद में अदालत ने जमीन पर स्थगन दिया और परिवार में समझौता भी हो गया। गौरव का आरोप है कि इसके बावजूद फिरोज ने उनके पिता पर दबाव बनाया और कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराकर जमीन को बाजार में ऊंचे दाम पर बेचने की कोशिश की। गौरव के मुताबिक, फिरोज के बारे में जानकारी जुटाने पर उज्जैन, इंदौर और देवास में जमीनों के अन्य सौदों की बात सामने आई। इसके बाद शिकायत की गई और मामला लोकायुक्त तक पहुंचा। विवादित जमीन खरीदकर महंगे दाम पर बेचने का आरोप लोकायुक्त की जांच में बागली और राजोद की जमीनों से जुड़े मामले भी सामने आए। बागली में टीम को पता चला कि फिरोज ने संबंधित जमीन वर्ष 2003 में खरीदी थी, लेकिन वह कब्जा लेने मौके पर नहीं पहुंचा था। राजोद में भी विवादित जमीन खरीदने और उसे बाजार में बेचने से जुड़ा मामला जांच के दायरे में आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिरोज परिवारों के जमीन विवादों का फायदा उठाता था। वह एक पक्ष से संपर्क कर विवादित जमीन कम कीमत पर खरीदने का सौदा करता और दूसरे पक्ष पर पुलिस विभाग में पदस्थ होने का रौब दिखाकर दबाव बनाता था। इसके बाद जमीन अपने परिचितों के नाम कराने और बाजार में अधिक कीमत पर बेचने का आरोप है। इन मामलों में उसकी भूमिका और कथित दबाव की जांच भी होगी। मां-पत्नी के नाम फ्लैट, परिचित के नाम कारोबारी फर्म लोकायुक्त की जांच में फिरोज की मां और पत्नी के नाम संपत्तियों के साथ कारोबारी फर्मों का भी उल्लेख है। इंदौर की स्कीम नंबर 94 स्थित मनोरमा अपार्टमेंट में मां वहीदा खान के नाम दो फ्लैट, श्रीनगर कॉलोनी में एक अन्य फ्लैट और देवास में मकान व प्लॉट जांच के दायरे में हैं। मां और पत्नी के नाम साहिल ट्रेडिंग कंपनी का उल्लेख है। इस फर्म के बैंक खातों में करोड़ों रुपए के लेन-देन की जानकारी सामने आई है। रोशनी वर्मा के नाम रोशनी सेल्स एंड सर्विस और रियल एस्टेट निवेश से जुड़ी रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट का भी जांच में उल्लेख किया गया है। अब इन फर्मों की वास्तविक कारोबारी गतिविधियों, घोषित आय और बैंक खातों के लेन-देन का मिलान किया जाएगा। जांच का मुख्य सवाल यह है कि संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल हुई रकम कहां से आई और दस्तावेजों में दर्ज मालिक ही वास्तविक निवेशक हैं या नहीं। 15 ठिकानों पर संपत्तियों की पड़ताल लोकायुक्त की सर्चिंग में देवास के आदर्श नगर स्थित निवास के अलावा पुष्पकुंज कॉलोनी और विजय नगर कॉलोनी के मकान-प्लॉट, इंदिरा गांधी नगर की जमीन, जेतपुरा के व्यावसायिक और कृषि भूखंड तथा गद्दूखेड़ी की कृषि भूमि की जानकारी सामने आई है। ग्राम गुरान और गजीपुरा के साथ बागली क्षेत्र की संपत्तियां भी जांच के दायरे में हैं। बागली क्षेत्र की एक जमीन पर टीम को दूसरा व्यक्ति खेती करता मिला। दूसरी ओर, राजस्व रिकॉर्ड में वर्ष 2023 से फिरोज या उसके परिचितों के नाम दर्ज होने की बात सामने आई है। अब जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण और वास्तविक कब्जे की स्थिति का मिलान किया जाना है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि दूसरा व्यक्ति किस आधार पर जमीन पर खेती कर रहा है। महंगी गाड़ियां और लकड़ी के कारोबार की भी जांच शिकायत में फिरोज खान के पास महंगी गाड़ियां होने और लकड़ी के कारोबार से जुड़े होने के आरोप भी लगाए गए हैं। स्कॉर्पियो सहित अन्य वाहनों का उल्लेख सामने आया है। जांच में यह देखना होगा कि वाहन कब खरीदे गए, उनका भुगतान किसने किया और संबंधित कारोबार से कितनी आय हुई। जमीनों के सौदों, वाहनों की खरीद और कारोबारी फर्मों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से संपत्तियों के वास्तविक स्रोत का पता लगाया जा सकेगा। बेटी की शादी में नोट उड़ाने के वीडियो हुए थे वायरल फरवरी में फिरोज खान की बेटी की शादी इंदौर के ग्रैंड शेरेटन और रॉयल पैलेस होटल में होने की जानकारी सामने आई थी। शादी में नोट उड़ाने के वीडियो भी वायरल हुए थे। इसके बाद पुलिस विभाग में उसकी आर्थिक हैसियत को लेकर चर्चा शुरू हुई। बेटी की पढ़ाई पर लाखों रुपए खर्च होने की बात भी कही गई, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। शादी में खर्च और महंगी जीवनशैली अपने आप में आय से अधिक संपत्ति का प्रमाण नहीं हैं। हालांकि, जांच में सामने आए वित्तीय रिकॉर्ड के साथ इन खर्चों की जानकारी का मिलान किया जा सकता है। जांच में अभी और संपत्तियां सामने आने की संभावना लोकायुक्त के डीएसपी सुनील तालान के मुताबिक, फिरोज खान की संपत्तियों और जमीनों के कारोबार से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। अब तक सामने आई संपत्तियों के अलावा अन्य संपत्तियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही उसकी कुल संपत्ति, आय के स्रोत और कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ये खबर भी पढ़ें… ड्राइवर की नौकरी, 30 करोड़ का मालिक बना पुलिसकर्मी लोकायुक्त पुलिस ने इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (PTC) में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की। पढ़ें पूरी खबर…
