मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। भाजपा के कोर ग्रुप का विभीषण कौन?
बंद कमरे में हुई बातें बाहर आईं तो भाजपा की अंदरूनी सियासत में हलचल मच गई। अब डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने साफ शब्दों में चेतावनी दे दी है कि कोर ग्रुप की बैठक की बातें बाहर लीक करने वालों को भविष्य में इस बैठक में बैठने का मौका नहीं मिलेगा। दरअसल, हाल ही में भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में कई मंत्रियों ने अपनी ही सरकार और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने भी अफसरों को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा था कि अधिकारी उनकी सुनते ही नहीं हैं। बैठक में हुई इन चर्चाओं के बाहर आने के बाद जब राजेंद्र शुक्ल से इस बारे में सवाल पूछा गया तो वे नाराज नजर आए। उन्होंने कहा कि कोर ग्रुप में जो बातें होती हैं, उन्हें बाहर बोलने वाला भविष्य में कोर ग्रुप में बैठने लायक नहीं रहेगा। शुक्ल के इस बयान के बाद अब सवाल उठ रहा है कि आखिर भाजपा के कोर ग्रुप की गोपनीय बातें बाहर पहुंचाने वाला विभीषण कौन है? क्या पार्टी ने उस चेहरे को पहचान लिया है या अब भी उसकी तलाश जारी है? बता दें कि डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल रीवा में मीडिया से बात कर रहे थे। जब उन पर सवालों की बौछार हुई तो परेशान होकर उन्होंने कह दिया कि ये पत्रकार वार्ता किसने बुलाई थी? मामा की बुराई पर टोका, विधायक के सुर बदले
रतलाम के सैलाना से विधायक कमलेश्वर डोडियार सीहोर में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ बोल रहे थे। तभी वहां मौजूद एक शख्स ने उन्हें टोक दिया। कहा कि मामा हमारे साथ हैं। हमारे सुख-दुख के साथी हैं। इसके बाद विधायक को ट्रैक चेंज करना पड़ा। हुआ यूं कि भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार सीहोर में घर तोड़े जाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे आदिवासी परिवारों से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह यहां आए और महिलाओं के साथ रोने लगे, जबकि वे मुख्यमंत्री रहे हैं। आदिवासियों को पट्टे देना उनके हाथ में था, जो वे नहीं दे पाए। विधायक बोल ही रहे थे कि एक शख्स खड़ा हुआ और उनके कान में कहा कि मामा के बारे में ऐसा मत बोलिए। वे तो हमारा साथ दे रहे हैं। फिर क्या था, विधायक के सुर बदल गए। उन्होंने कहा- मैंने कब बोला कि मामा जी बुरे आदमी हैं। फिर उन्होंने कहा कि वे सीएम मोहन यादव से हजार गुना अच्छे आदमी थे। अब लोग आदिवासी विधायक की इस राजनीति पर तंज कर रहे हैं। कह रहे हैं कि विधायक यह भूल गए थे कि वे मामा के इलाके में हैं। कहने वाले यह भी कह रहे हैं कि विधायक ने मौके की नजाकत भांपते हुए जिस तरह रंग बदला, नेताओं में यह भी गजब का हुनर होता है। इलॉन मस्क पर भड़क गए भाजपा सांसद
भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा दुनिया के सबसे अमीर शख्स इलॉन मस्क पर जमकर बरसे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि दो घूंसे मारकर मस्क को भगा देंगे। सांसद रीवा में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के दम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के 56 इंच सीने वाले को कोई झुका नहीं सकता। उन्होंने यह भी कहा कि मस्क प्रधानमंत्री की शर्त मानेंगे, तभी हिंदुस्तान में अलाऊ होंगे, और शर्त नहीं मानेंगे तो ठुकराऊ होंगे। अब सांसद के इस वीडियो पर लोग चुटकी ले रहे हैं। कह रहे हैं कि सांसद कहीं मुक्केबाजी की ट्रेनिंग लेकर तो नहीं आए हैं। लोग यह भी तंज कस रहे हैं कि सांसद मस्क को मुक्का मारेंगे या नहीं, यह तो पता नहीं, लेकिन उन्हें अल्टीमेटम देकर सुर्खियां जरूर बटोर ली हैं। और अब अंदर की बात.. अफसर के पर कतरने चले थे, और पावरफुल हो गए
मध्य प्रदेश में सचिव स्तर के एक अधिकारी के पर कतरने की कोशिश हो रही थी। कुछ अफसर उनकी मौजूदा पावर कम कराने के लिए लॉबिंग में जुटे थे। लेकिन दांव ऐसा उल्टा पड़ा कि अधिकारी की ताकत घटने के बजाय और बढ़ गई। हाल ही में जारी आईएएस अफसरों की तबादला सूची में इस अधिकारी की मौजूदा जिम्मेदारियां बरकरार रखी गईं, साथ ही उन्हें एक अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। अब वे केंद्र सरकार के साथ मध्य प्रदेश से जुड़े राजनीतिक मामले भी देखेंगे। दरअसल, वे केंद्र सरकार में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सुना है इन्हें हटाने की कोशिश में जुटे अधिकारियों ने समय-समय पर बड़े साहब को कन्विंस करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। फिर क्या था, बड़े साहब ने भी सरकार से इस अफसर को हटाने की सिफारिश कर दी थी। ‘सरकार’ ने भी बात सुनी, लेकिन बड़े साहब से उनकी जगह जिम्मेदारी संभालने के लिए दो-तीन अफसरों के नाम सुझाने को कह दिया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि बड़े साहब कोई नाम ही नहीं सुझा पाए। अब हुआ यह कि जिस अधिकारी की पावर कम कराने की कोशिश हो रही थी, वे अतिरिक्त जिम्मेदारी के साथ ‘सरकार’ के और करीब आ गए। अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि अफसर के पर कतरने की कोशिश करने वाले हाथ मलते रह गए और अधिकारी पर ‘सरकार’ की मेहरबानी और बढ़ गई। इनपुट सहयोग – अभिलाष मिश्रा (रीवा), केके शर्मा (रतलाम) ये भी पढ़ें –
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