6 महीने की उम्र में मां से बिछड़ी बेटी 42 साल बाद उन्हें तलाशते हुए रायपुर पहुंची। नीदरलैंड में रहने वाली 43 साल की सुनीता अब्दुला को जब पता चला कि उनकी मां जमुना दत्ता जिंदा हैं और रायपुर में रहती हैं, तो उन्होंने उनसे मिलने का फैसला किया। इसके बाद सुनीता 7,200 किलोमीटर का सफर तय कर रायपुर पहुंचीं। 13 अक्टूबर को फाफाडीह, स्टेशन रोड और बैरनबाजार जैसे इलाकों में मां को तलाशने के बाद जब उन्हें पता चला कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं हैं, तो वे फूट-फूटकर रो पड़ीं। उनकी मां की मौत 6 महीने पहले ही हो गई थी। दरअसल, सुनीता की मां भारत की मूल निवासी थीं, जबकि उनके पिता सऊदी अरब में रहते थे। शादी के बाद दोनों अलग हो गए। सुनीता को उनके चाचा और दादी ने पाला। नाना की नौकरी के कारण उनकी मां और छोटी बहन छत्तीसगढ़ आ गए थे। वे रायपुर के गुढ़ियारी में रहते थे। सुनीता के पिता ने आखिरी वक्त में उन्हें यह जानकारी दी। इसके बाद सुनीता उम्मीद लेकर छत्तीसगढ़ आई थीं। अब वे अपनी बहन से मिलने मुंबई जाएंगी। सऊदी अरब में हुई थी माता-पिता की शादी सुनीता के मुताबिक, उनकी मां जमुना दत्ता मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली थीं। वह नौकरी के लिए सऊदी अरब गई थीं। वहां 1981 में उनकी मुलाकात अब्दुला मुस्तफा से हुई। इसके बाद दोनों ने शादी कर ली। उनके 2 बच्चे हुए। बड़ी बेटी सुनीता के जन्म के 3 साल बाद उनकी छोटी बहन शर्मिला का जन्म हुआ। जमुना दत्ता अपने घर वापस लौटना चाहती थीं, लेकिन अब्दुला मुस्तफा सऊदी अरब में ही रहना चाहते थे। इसके बाद दोनों अलग हो गए। अब्दुला मुस्तफा वहीं सऊदी अरब में रहने लगे, जबकि जमुना कोलकाता आ गईं। धीरे-धीरे टूटा माता-पिता का संपर्क सुनीता को सऊदी अरब में उनके चाचा और दादी-बुआ ने पाला। साल 1991 में जमुना दत्ता अपने पिता की नौकरी के कारण सभी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने लगे। इस बीच अब्दुला मुस्तफा कभी-कभी रायपुर मिलने आया करते थे। उस समय सुनीता की छोटी बहन शर्मिला फाफाडीह के सेंट जेवियर स्कूल में पढ़ती थीं। इस मुलाकात के बाद अब्दुला दोबारा रायपुर नहीं आए। धीरे-धीरे जमुना से उनका संपर्क भी टूट गया। इसके बाद सुनीता को मां और बहन के बारे में कोई नई जानकारी नहीं मिल सकी। सुनीता नीदरलैंड में रहती है सुनीता सऊदी में अपने चाचा और बुआ के साथ पली बढ़ी। वह नीदरलैंड के लिम्बर्ग प्रांत के लैंडग्राफ में रहती हैं। वह वहां की सरकार में अनुवादक (ट्रांसलेटर) के पद पर काम करती हैं। 16 साल की उम्र में उनकी शादी हुई और 4 बच्चे हुए। अपनी उम्र से 20 साल बड़े पति से अनबन के बाद वह बच्चों के साथ अलग रहने लगीं। उन्हें अपने माता-पिता के बारे में बहुत कम जानकारी थी। मां की कोई तस्वीर या उनसे जुड़ी याद भी नहीं थी, जिससे वह उन्हें पहचान सकें। पिता ने आखिरी वक्त में मां का पता बताया 2025 में पिता अब्दुला मुस्तफा की तबीयत बिगड़ी, तो सुनीता उनसे मिलने सऊदी अरब गईं। इसी दौरान पिता ने बताया कि उनकी मां जमुना दत्ता जिंदा हैं और छत्तीसगढ़ के रायपुर में रहती हैं। उनकी एक छोटी बहन शर्मिला भी है। यह जानकर सुनीता भावुक हो गईं। सालों तक मां के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उनके जिंदा होने की खबर से सुनीता को उनसे मिलने की उम्मीद जगी। उन्होंने इंटरनेट पर मां को तलाशने की कोशिश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। आखिर में उन्होंने खुद रायपुर आकर मां को तलाशने का फैसला किया। बहन से मिलने मुंबई जाएंगी वे 14 दिन के वीजा पर रायपुर पहुंचीं। यहां आने पर उन्हें पता चला कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं हैं और बहन मुंबई में रहती हैं। इसके बाद पुलिस प्रशासन की मदद से उनकी बहन से संपर्क किया गया और वीडियो कॉल पर दोनों की बात कराई गई। अब सुनीता अपनी बहन से मिलने मुंबई जाएंगी। …………………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… 11 महीने बाद लापता मां से मिली, फूट-फूटकर रोई, VIDEO: बेटी बोली-खो चुकी थी उम्मीद, प्रेमानंद महाराज ने दिलाया भरोसा, फिर भिलाई से आया फोन बिहार के भागलपुर की रहने वाली पूजा की अपनी मां को तलाश की 11 महीने लंबी जद्दोजहद आखिरकार भिलाई आकर खत्म हुई। उनकी मां बबीता देवी अब सुरक्षित रूप से घर लौट चुकी हैं। इससे पहले पूजा ने संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर अपनी पूरी परेशानी बताई थी। पढ़ें पूरी खबर…
