मध्य प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले सिंडिकेट पर एसटीएफ ने शिकंजा कस दिया है। मुख्य सरगना रियाल चौधरी और उसके साथी सम्यक बौधी को जेल से वापस पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। दोनों की क्रॉस-पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब पुलिस की जांच दो सबसे बड़े बिंदुओं ‘मनी ट्रेल’ और ‘फॉरेन ट्रिप’ मतलब‘पैसा कहां से आया और कितने लोग विदेश भाग गए’ पर टिक गई है। इतना जरुर पता लगा है कि गुलाब राय गौतम के जिस अकाउंट को कमीशन पर लेकर रियाल चौधरी यूज करता था उसमें लाखों रुपए का लेनदेन हुआ है। सम्यक बौधी के बैंक खाते खोलेंगे ‘मनी ट्रेल’ के राज एसटीएफ ने आरोपी सम्यक बौधी के सभी बैंक खातों के स्टेटमेंट निकाल लिए हैं। पुलिस इस समय पूरे ‘मनी ट्रेल’ (पैसे का लेन-देन) का ब्योरा खंगाल रही है। जैसे अकाउंट में पैसा कहां से आया?, किसने और किस मकसद से रकम ट्रांसफर की?, कैश में निकासी किसने और कब-कब की? जांच अधिकारियों के हाथ इस आर्थिक लेन-देन का पूरा ब्योरा लग रहा है, जिससे यह साफ होगा कि इस फर्जीवाड़े में किस-किस को कितना कमीशन बांटा गया। पासपोर्ट ऑफिस से तलब किया डेटा फर्जीवाड़े का सबसे खतरनाक पहलू देश की सुरक्षा से जुड़ा है। संदिग्ध रूप से बनाए गए 70 पासपोर्ट्स का पूरा डेटा एसटीएफ ने पासपोर्ट ऑफिस से तलब किया है। पुलिस यह पता लगा रही है कि इन 70 संदिग्ध पासपोर्ट धारकों में से कितने बांग्लादेशी नागरिक भारत का फर्जी पासपोर्ट इस्तेमाल करके विदेश जा चुके हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि विदेश जाने वालों में से कितने लोग वापस भारत नहीं लौटे। दो साल से जानने का दिया फर्जी एफिडेविट जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि सम्यक बौधी ने कई बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय साबित करने के लिए ‘दो साल से जानने’ का फर्जी शपथ पत्र दिया था। अब एसटीएफ यह कड़ियां जोड़ रही है कि रियाल और सम्यक का नेटवर्क पहली बार कैसे जुड़ा और बांग्लादेशियों को भारतीय पासपोर्ट दिलाने का यह मास्टरप्लान किसने तैयार किया। डबरा से भोपाल और बैतूल तक ‘मठ-विहार’ बने ठिकाना 70 फर्जी पासपोर्ट्स का ठिकाना कोई साधारण मकान नहीं, बल्कि डबरा, भोपाल और बैतूल के बौद्ध विहार और मठ बने हुए थे। इन संदिग्धों के फर्जी दस्तावेज (पहचान व निवास प्रमाण) किसने तैयार कराए? आधार कार्ड, मूल निवासी प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र जारी करने वाले अफसरों व कर्मचारियों ने नियमों को ताक पर रखकर मदद की या कोई बड़ी साठगांठ थी, इसकी जांच जारी है। पुलिस वेरिफिकेशन और पासपोर्ट शाखा पर भी शक केवल दस्तावेज बनाना ही नहीं, बल्कि लोकल लेवल पर हुआ पुलिस सत्यापन और पासपोर्ट शाखा के अंदर दस्तावेजों की जांच भी जांच के दायरे में है। एसटीएफ यह पता लगा रही है कि फाइल क्लियर कराने के लिए विभाग के किस-किस स्तर पर मदद ली गई थी। आगे क्या? बैंक खातों के स्टेटमेंट और पासपोर्ट ऑफिस से मिलने वाले ट्रेवल रिकॉर्ड के मिलते ही एसटीएफ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले सरकारी अमले पर भी बड़ा एक्शन ले सकती है।
