मंदसौर के शामगढ़ में मैट्रिमोनियल साइट के जरिए महिला से 7.5 लाख रुपए की साइबर ठगी के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह से जुड़े नौवें आरोपी वासील सिद्दिकी को उत्तरप्रदेश के हरदोई से रविवार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने गिरोह को आगरा और फिरोजाबाद के म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराए थे। बता दें कि इससे पहले बिहार के छह मुख्य आरोपियों सहित भोपाल के दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में सामने आया है कि गिरोह के तार पाकिस्तान और नेपाल से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी टोनी कुमार और उसके साथी शिवम गुप्ता की मुलाकात नेपाल के वीरगंज और काठमांडू के कैसीनो में हुई थी। इसके बाद महंगे शौक पूरे करने के लिए साइबर ठगी का नेटवर्क खड़ा किया गया। एटीएस मुख्य आरोपी से पूछताछ कर चुकी
पुलिस जांच में पाकिस्तान में बैठे लोगों से निर्देश मिलने, विदेशी मोबाइल नंबरों और आईपी एड्रेस के इस्तेमाल तथा क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम भेजे जाने के इनपुट मिले हैं। हालांकि, विदेशी कनेक्शन और रकम की पुष्टि के लिए तकनीकी जांच जारी है। 30 सितंबर को डीआईजी निमिष अग्रवाल ने शामगढ़ थाने पहुंचकर आरोपियों से पूछताछ की थी। मामले में एटीएस ने भी मुख्य आरोपी से करीब चार घंटे पूछताछ कर क्रिप्टो ट्रांजेक्शन, विदेशी संपर्कों, म्यूल अकाउंट और डिजिटल वॉलेट से जुड़े सवाल किए। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, खाताधारकों और कैश डिपॉजिट मशीन (सीडीएम) के जरिए रकम आगे भेजने वाले लोगों की तलाश कर रही है। 125 वारदात, 11 करोड़ से ज्यादा के ट्रांजेक्शन
शुरुआती जांच में पिछले करीब चार से छह महीने के दौरान गिरोह से जुड़े बैंक खातों में 11 करोड़ रुपए से अधिक के ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। गिरोह के देशभर में 100 से अधिक, जबकि कुछ जांच इनपुट में 125 साइबर वारदातों से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने 150 से अधिक म्यूल बैंक अकाउंट और सिम कार्ड के इस्तेमाल के साक्ष्य जुटाए हैं। कार्रवाई में अब तक 22 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 30 मोबाइल सिम और पांच एटीएम कार्ड जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। करीब 150 बैंक खातों से जुड़े साक्ष्य मिले हैं। अलग-अलग खातों में जमा करीब 22 लाख रुपए फ्रीज किए जा चुके हैं, जिनमें पीड़िता की रकम भी शामिल है। करीब 11 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि फ्रीज कराने की प्रक्रिया भी जारी बताई गई है जो पूरी होने के बाद न्यायालय के माध्यम से पीड़िता को रकम वापस दिलाने की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का नेटवर्क अलग-अलग टीमों में बंटा था। एक टीम जरूरतमंद लोगों के नाम पर बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम उपलब्ध कराती थी। दूसरी टीम अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बदलकर खातों से रकम निकालती थी। खाता फ्रीज होने पर आरोपी मोबाइल, सिम, एटीएम कार्ड और पासबुक नष्ट कर नए खातों से काम शुरू कर देते थे। नेपाल के कैसीनो में हुई थी शिवम से दोस्ती
जांच में बिहार के गोपालगंज जिले के छपिया निवासी टोनी कुमार को गिरोह का मुख्य सरगना बताया गया है। पुलिसिया जांच से जुड़े इनपुट के अनुसार, टोनी बिहार के कनेर क्षेत्र में पंचायत सचिव भी है। टोनी की साथी शिवम गुप्ता की मुलाकात करीब पांच साल पहले नेपाल के वीरगंज और काठमांडू स्थित कैसीनो में हुई थी। दोनों महंगे शौक और गैंबलिंग के लिए रकम जुटाने के उद्देश्य से साइबर ठगी के अपराध में शामिल हुए। टोनी पहले खुद साइबर ठगी का शिकार हुआ था। बाद में वह इसी अपराध में शामिल हो गया और धीरे-धीरे गिरोह का मुख्य सरगना बन गया। गिरोह में भरोसेमंद लोगों को जोड़कर अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गईं। कुछ आरोपियों के नेपाल में रिश्तेदार होने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। गिरोह के पाकिस्तान कनेक्शन को लेकर पुलिस को मोबाइल चैट, कॉलिंग और लेन-देन से जुड़े संदिग्ध इनपुट मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ डिजिटल रिकॉर्ड में कराची से जुड़े अब्दुल, रज्जाक और अन्य नामों का उल्लेख मिला है। आरोपियों को ठगी की रकम का करीब 10 प्रतिशत अपने पास रखने और शेष 90 प्रतिशत आगे भेजने के निर्देश मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि पुलिस इन जानकारियों का सत्यापन कर रही है।
क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पाकिस्तान भेजने का संदेह
पुलिस की जांच में मुख्य आरोपी टोनी कुमार के जरिए ठगी की रकम क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर पाकिस्तान भेजे जाने का संदेह सामने आया है। पुलिस बैंक खातों, भुगतान चैनलों, क्रिप्टो एक्सचेंज और डिजिटल वॉलेट की जानकारी जुटा रही है। क्रिप्टो एक्सचेंज के रिकॉर्ड, केवाईसी, वॉलेट एड्रेस और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री के आधार पर रकम की मनी-ट्रेल पता करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि गिरोह के सदस्य बैंक खातों से रकम निकालने के बाद कैश डिपॉजिट मशीन के जरिए अन्य खातों में पैसा जमा करते थे। इसके बाद रकम अलग-अलग माध्यमों से आगे भेजी जाती थी। अब सीडीएम ऑपरेट करने वाले संदिग्धों की तलाश की जा रही है, ताकि रकम की पूरी ट्रांजेक्शन चेन का पता चल सके। रतलाम रेंज डीआईजी निमिष अग्रवाल के अनुसार, मामले में क्रिप्टो ट्रांजेक्शन सहित दूसरे पहलुओं पर जांच जारी है। विदेशी कनेक्शन की पुष्टि होने पर केंद्रीय एजेंसियों का सहयोग लिया जाएगा। पुलिस बिहार सरकार को भी मामले से जुड़ी जानकारी भेजने और आरोपियों की अवैध संपत्तियों को फ्रीज करने संबंधी प्रस्ताव पर कार्रवाई की तैयारी कर रही है। मैट्रिमोनियल साइट पर NRI बनकर युवती को फंसाया
मामले की शुरुआत शामगढ़ थाना क्षेत्र की एक युवती से हुई, जिसने मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनाई थी। आरोपी ने खुद को एनआरआई बताकर उससे संपर्क किया और नकली फोटो तथा फर्जी परिजनों के जरिए भरोसा जीता। शादी का झांसा देने के बाद विदेश से महंगा गिफ्ट भेजने की बात कही गई। इसके बाद युवती को बताया गया कि गिफ्ट कस्टम विभाग में पकड़ा गया है। कस्टम ड्यूटी, सेल्स टैक्स और अन्य शुल्क के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराने को कहा गया। इस तरह युवती से किश्तों में करीब 7.5 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। ठगी का पता चलने पर उसने शामगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। एसपी विनोद कुमार मीना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम गठित की। पुलिस ने करीब डेढ़ महीने तक बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड और डिजिटल ट्रांजेक्शन का विश्लेषण किया। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में करीब 15 दिन तक दबिश देकर आरोपियों को पकड़ा। भोपाल से दो खाताधारक और म्यूल अकाउंट सप्लायर गिरफ्तार
छह मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने भोपाल के सरस्वती नगर निवासी शिवांश उर्फ शिवा यादव (29) को उत्तरप्रदेश के वृंदावन से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, वह जरूरतमंद लोगों के नाम पर खोले गए म्यूल अकाउंट, बैंक दस्तावेज, पासबुक और एटीएम कार्ड करीब 12 हजार रुपए में खरीदता था और फिर उन्हें बिहार की गैंग को लगभग 17 हजार रुपए में बेचता था। शिवांश ने शुरुआती पूछताछ में 15 से 20 म्यूल खातों की जानकारी दी। उसने टोनी और शिवम से नेपाल में दोस्ती होने की बात भी बताई। पुलिस अब इन खातों के धारकों की तलाश कर रही है। जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि कुछ लोगों ने मामूली रकम के लालच में अपने बैंक दस्तावेज दूसरों को दिए थे। ऐसे खाताधारकों की भूमिका की जांच की जा रही है और संलिप्तता मिलने पर उन्हें भी आरोपी बनाया जा सकता है। इसके बाद पुलिस ने भोपाल के नेहरू नगर निवासी कृष्णासिंह दोहरे (20) को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, उसने अपने और अन्य लोगों के बैंक संबंधी दस्तावेज गिरोह को उपलब्ध कराए थे। उसके नाम के बैंक खाते में करीब दो लाख रुपए जमा हुए, जिन्हें कैश डिपॉजिट मशीन के जरिए आगे भेजा गया। प्रारंभिक पूछताछ में उसके द्वारा अपने चार से पांच खाते उपलब्ध कराने की बात सामने आई। पुलिस ने आगरा से जुड़े ट्रांजेक्शन की भी जांच की। नौवां आरोपी वासील हरदोई से गिरफ्तार
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में शामगढ़ पुलिस की टीमें आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और उत्तरप्रदेश के अन्य शहरों में दबिश दे रही थीं। इसी क्रम में शनिवार को फिरोजाबाद जिले के रसूलपुर थाना क्षेत्र के हाजीपुरा निवासी वासील पिता अख्तर सिद्दिकी (23) को हरदोई से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, वासील गिरोह को आगरा और फिरोजाबाद के म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराता था। उससे पूछताछ कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। उसकी गिरफ्तारी के साथ मामले में कुल नौ आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। शामगढ़ थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। अब जांच का मुख्य फोकस म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वालों, खाताधारकों, सीडीएम के जरिए रकम आगे भेजने वाले लोगों और संदिग्ध विदेशी संपर्कों पर है। पुलिस का कहना है कि पाकिस्तान और नेपाल से जुड़े कनेक्शन की पुष्टि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार केंद्रीय एजेंसियों को विस्तृत डाटा और जांच संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
