एरोड्रम थाने में भाजपा कार्यकर्ता पं. जयदीप दुबे और उनके बहनोई पंकज शुक्ला के साथ कथित मारपीट के मामले को तीन दिन होने जा रहे हैं, लेकिन घटनाक्रम अब भी सवालों के घेरे में है। कार्रवाई से ज्यादा चर्चा पुलिस अधिकारियों के बदलते बयानों की हो रही है। घटना वाली रात पहले टीआई समेत सात पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने की बात कही गई। इसके बाद चार से पांच पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आने का बयान आया और अंत में चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर टीआई वेदेंद्र सिंह को लाइन अटैच किया गया। राजनीतिक दबाव और प्रभाव के बीच फरियादी भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस की थ्योरी भी अलग-अलग रही। दूसरी ओर, पुलिस, जयदीप दुबे और पड़ोसी पक्ष के बयानों में भी अंतर है। पुलिस के मुताबिक, दुबे का पड़ोसी से विवाद हुआ था और मारपीट का वीडियो सामने आया। इसके बाद वे थाने पहुंचे, जहां देर रात तक घटनाक्रम चलता रहा। जयदीप का आरोप है कि वे शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे, लेकिन थाने में उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें घसीटा गया। पड़ोसी पक्ष ने विवाद की शुरुआत वाहन चलाने को लेकर होने का दावा किया है। रविवार को सीने में तेज दर्द के बाद जयदीप को निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। परिजनों ने उनकी तबीयत बिगड़ने की वजह मारपीट को बताया, जबकि डॉक्टरों की ओर से हार्ट अटैक की आशंका जताए जाने की जानकारी सामने आई है। इसकी पुष्टि करने वाली मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध होने की जानकारी नहीं है। पहले सात के सस्पेंशन की बात, फिर चार पर कार्रवाई घटना वाली रात थाने पर हुए हंगामे के बाद मामला तेजी से राजनीतिक और पुलिस-प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, घटना की जानकारी रात में ही भोपाल तक पहुंच गई थी। आधी रात को मौके पर पहुंचे एडिशनल डीसीपी सुमित केरकट्टा ने कैमरे के सामने टीआई वेदेंद्र सिंह समेत सात पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने और एफआईआर दर्ज करने की बात कही थी। इसके बाद सुबह करीब पांच बजे प्रदर्शन समाप्त हुआ। मामला मीडिया की सुर्खियों में आने के बाद पुलिस अधिकारियों के बयानों में बदलाव दिखा। एडिशनल डीसीपी (क्राइम) राजेश दंडोतिया ने कहा कि घटना में चार से पांच पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आई है और उन्हें सस्पेंड किया गया है। इस बयान में टीआई की भूमिका और उन पर कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद डीसीपी नरेंद्र रावत ने बताया कि एक एएसआई, दो हेड कांस्टेबल और एक कांस्टेबल को सस्पेंड किया गया है। इस दौरान भी टीआई पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। शनिवार देर रात टीआई को हटाने की जानकारी दी गई। बाद में स्पष्ट किया गया कि उन्हें लाइन अटैच किया गया है। उनके स्थान पर एसआई संजय विश्नोई को थाने का प्रभार सौंपने का आदेश जारी हुआ। कार्रवाई का दायरा बदला इस तरह शुरुआती घोषणा और अंतिम कार्रवाई के बीच अंतर सामने आया। सवाल यह है कि शुरुआत में सात पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने की बात कहने के बाद कार्रवाई का दायरा कैसे बदला और क्या यह बदलाव जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर हुआ? टीआई की भूमिका पर भी सवाल मामले में टीआई वेदेंद्र सिंह की भूमिका को लेकर भी अलग-अलग चर्चाएं रहीं। घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जिस समय जयदीप दुबे थाने पहुंचे थे, उस दौरान टीआई डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के इंदौर आगमन के सिलसिले में एयरपोर्ट पर थे। इसके बाद वे नवरात्रि की व्यवस्थाओं के संबंध में बिजासन माता मंदिर गए थे। इसी आधार पर सवाल उठा कि जब शुरुआती घंटों में टीआई थाने में मौजूद नहीं थे, तो उनके खिलाफ कार्रवाई का आधार क्या था। दूसरी ओर, थाने में हुए घटनाक्रम के दौरान उनकी जिम्मेदारी और भूमिका की जांच भी अहम है। फिलहाल उन्हें लाइन अटैच किया गया है। उनकी भूमिका को लेकर विभागीय जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है, यह देखना होगा। पुलिस की थ्योरी: पड़ोसी से विवाद के बाद थाने पहुंचे दुबे पुलिस के अनुसार, 9 अक्टूबर की शाम करीब 5.30 बजे जयदीप दुबे का पड़ोसी से विवाद हुआ था। इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें पटक-पटककर पीटा गया। घटना का एक वीडियो भी सामने आया था। इसके बाद दुबे शाम करीब सात बजे एरोड्रम थाने पहुंचे। इसके बाद रात में क्या हुआ, यही मामले का सबसे विवादित हिस्सा है। दुबे ने विधायक गोलू शुक्ला को फोन कर आरोप लगाया कि थाने में उनके और उनके बहनोई पंकज शुक्ला के साथ मारपीट की गई और उन्हें घसीटा गया। उन्होंने शिकायत नहीं लिखे जाने का भी आरोप लगाया। इसके बाद बड़ी संख्या में विधायक समर्थक थाने पहुंचे और घेराव कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग उठी। मामला बढ़ने के साथ वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और कार्रवाई को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए। जयदीप की थ्योरी: मेडिकल के बाद लौटे थाने, फिर बढ़ा विवाद जयदीप दुबे के मुताबिक, 9 अक्टूबर की शाम करीब 5.30 बजे वाहन को लेकर पड़ोसी से विवाद हुआ और उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद वे शाम करीब 6.30 बजे एरोड्रम थाने पहुंचे और पुलिस को घटना की जानकारी दी। उनके अनुसार, पुलिस ने शाम करीब 6.45 बजे मेडिकल परीक्षण के लिए एमएलसी फॉर्म भरकर उन्हें जिला अस्पताल भेजा। वहां पहुंचने के करीब आधे घंटे बाद उन्होंने सीने में चोट की बात कही, जिसके बाद उन्हें एमवाय अस्पताल रेफर किया गया। दस्तावेजों के मुताबिक, एमवाय अस्पताल में रात 9.42 बजे डॉक्टरों ने उनका परीक्षण किया और जांच कराई। इसके बाद वे रात करीब 10.30 बजे एरोड्रम थाने लौटे। दुबे का कहना है कि थाने पहुंचकर उन्होंने ड्यूटी अधिकारी से रिपोर्ट लिखने को कहा। उन्होंने सिर, कमर और सीने में दर्द होने की बात कही। वहीं, पुलिसकर्मियों का कहना था कि मेडिकल परीक्षण में फ्रैक्चर या हड्डी खिसकने जैसी चोट सामने नहीं आई थी। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ने का आरोप है। उनके बहनोई और मंडल अध्यक्ष पंकज शुक्ला के थाने पहुंचने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। जयदीप का दावा है कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और घसीटा। थाने के अंदर की घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, पूरे घटनाक्रम और मारपीट की परिस्थितियों की पुष्टि के लिए फुटेज की जांच अहम होगी। पड़ोसी पक्ष का पलटवार: पहले विवाद और मारपीट का वीडियो सामने आए इस मामले में दूसरे पक्ष के बालकदास ने अलग कहानी बताई है। उनके मुताबिक, विवाद की शुरुआत सड़क पर वाहन चलाने को लेकर हुई थी। जयदीप दुबे की गाड़ी अचानक रुकने से पीछे आ रहे उनके छोटे भाई का इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन फिसल गया था। इसके बाद उनके भाई ने गाड़ी देखकर चलाने की बात कही, जिस पर कहासुनी हुई। बालकदास का आरोप है कि जयदीप दुबे ने उनके भाई को गाली दी, जिसके बाद विवाद बढ़ा और दुबे के घर के पास मारपीट हुई। उनका दावा है कि मीडिया में दिखाया जा रहा वीडियो बाद के घटनाक्रम का है, जबकि शुरुआती विवाद और मारपीट का वीडियो सामने नहीं आया है। उन्होंने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग की है। बालकदास ने यह भी आरोप लगाया कि उनके परिवार के कई लोगों को थाने में बैठाकर रखा गया और महिलाओं को भी रातभर थाने में रुकना पड़ा। उनका दावा है कि दूसरे पक्ष की शिकायत पर कार्रवाई हुई, जबकि उनकी ओर से रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इन आरोपों पर पुलिस की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। 12 घंटे बाद रिपोर्ट, एक आरोपी गिरफ्तार घटनाक्रम के बीच जयदीप दुबे की शिकायत पर पुलिस ने बालकदास, उनके पिता किशनलाल जाटव और अन्य साथियों के खिलाफ केस दर्ज किया। मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी भी हुई। शिकायत दर्ज होने और गिरफ्तारी के बाद थाने पर चल रहा हंगामा शांत हो गया। हालांकि, थाने के अंदर कथित मारपीट और पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर सवाल बने हुए हैं। शिकायत दर्ज करने में देरी क्यों हुई, थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों के बीच क्या हुआ और सीसीटीवी फुटेज में क्या दर्ज है—इन सवालों के जवाब जांच से ही सामने आएंगे। आईसीयू में भर्ती होने के बाद मामला फिर गरमाया रविवार को जयदीप दुबे के सीने में तेज दर्द होने के बाद परिजन उन्हें निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने हार्ट अटैक की आशंका जताई। परिजनों का आरोप है कि कॉलोनी में पड़ोसी और फिर थाने में हुई मारपीट के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी। फिलहाल, अस्पताल में भर्ती होने और परिजनों के आरोपों के बीच यह स्पष्ट होना बाकी है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति का घटनाक्रम से चिकित्सकीय रूप से क्या संबंध है। मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की पुष्टि के बिना इसे थाने में हुई कथित मारपीट का प्रत्यक्ष परिणाम मानना उचित नहीं होगा। ये खबर भी पढ़ें… BJP कार्यकर्ता को थाने में पीटा-घसीटा, टीआई लाइन अटैच दौर में एरोड्रम थाने में भाजपा कार्यकर्ता पं. जयदीप दुबे और उनके जीजा पंकज चौबे के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में थाना प्रभारी वेदेंद्र सिंह कुशवाह को लाइन अटैच किया गया है।एएसआई मुकेश परमार, हेड कॉन्स्टेबल विजय वर्मा, दिनेश मीणा और कॉन्स्टेबल सुरेंद्र देवड़ा को सस्पेंड कर लाइन अटैच किया गया है।पूरी खबर पढ़ें
