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जो शिक्षक जेल गया उसके स्कूल में पढ़ाने का दावा:कलेक्टर ने निलंबित बताया, जेडी बोले- प्रस्ताव भेजा है; ग्रामीणों का दावा-टूर पर भी गया शिक्षक

जबलपुर में नाबालिग को प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में जेल जा चुका सगड़ा-छपनी शासकीय स्कूल का शिक्षक संतोष पटेल अब स्कूल में उपस्थिति दर्ज कराने और बच्चों को पढ़ाने के आरोपों के घेरे में है। जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने छह दिन पहले उसे निलंबित किए जाने और विभागीय जांच चलने की बात कही थी। लेकिन दो दिन बाद ग्रामीणों ने उसे स्कूल आते-जाते देखने का दावा किया। ग्रामीणों के मुताबिक, शिक्षक उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करता है और हाल ही में बच्चों के साथ टूर पर भी गया था। दूसरी ओर, स्कूल शिक्षा विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर घनश्याम सोनी का कहना है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षक के निलंबन का प्रस्ताव लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को भेजा है। ऐसे में शिक्षक के निलंबन और स्कूल में उसकी उपस्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पंचायत में किशोरी पर लगाए थे आरोप, बाद में की थी आत्महत्या पुलिस जांच के मुताबिक, 19 अक्टूबर 2025 को शिक्षक संतोष पटेल ने अपने तीन भाइयों राममिलन पटेल, अशोक पटेल और राजेश पटेल के साथ मिलकर नाबालिग बच्ची के परिवार और रिश्तेदारों को बुलाकर पंचायत की थी। इसमें बच्ची के चरित्र और गतिविधियों को लेकर आरोप लगाए गए। पुलिस के अनुसार, 15 अक्टूबर को कैमरे लगाकर उसका वीडियो बनवाया गया था, जिसे पंचायत में मौजूद लोगों को स्क्रीन पर दिखाया गया। पंचायत में बच्ची और उसके माता-पिता भी मौजूद थे। पुलिस के मुताबिक, बच्ची पर चोरी सहित अन्य आपत्तिजनक आरोप लगाए गए और उसे अपमानित करने वाले शब्द कहे गए। उसके पिता से कथित तौर पर 3 लाख रुपए हर्जाने के रूप में मांगने की धमकी भी दी गई। घटना के बाद माता-पिता ने किशोरी को कुछ दिनों के लिए उसके मामा के घर भेज दिया था। 10 नवंबर 2025 को उसने वहीं जहर खा लिया। परिजन उसे बरगी स्वास्थ्य केंद्र ले गए, लेकिन हालत गंभीर होने पर जबलपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 10 महीने बाद FIR, चारों आरोपी जेल गए किशोरी की मौत के मामले में बरगी पुलिस ने करीब 10 महीने बाद संतोष पटेल और उसके तीन भाइयों के खिलाफ FIR दर्ज की। आरोपियों पर नाबालिग को प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई। चारों आरोपियों को कोर्ट ने जेल भेज दिया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, संतोष पटेल को 10 दिन बाद जमानत मिल गई। जेल जाने और जमानत पर छूटने की जानकारी उसने शिक्षा विभाग को नहीं दी थी। इसके बाद उसके स्कूल आने और उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करने को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। जेल जाने से पहले मेडिकल लीव, लौटने के बाद भी रजिस्टर में छुट्टी का दावा ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के उपस्थिति रजिस्टर में भी गड़बड़ी हुई है। उनके मुताबिक, संतोष पटेल ने गिरफ्तारी से पहले 17 अगस्त को मेडिकल लीव का आवेदन दिया था। 19 अगस्त को गिरफ्तारी के बाद 27 अगस्त को जमानत पर बाहर आने पर वह लगातार तीन दिन स्कूल आया, लेकिन रजिस्टर में उन दिनों की छुट्टी दर्ज थी। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि जिस रजिस्टर में संतोष पटेल के नाम के सामने मेडिकल लीव का उल्लेख था, उसे बदलकर नया रजिस्टर लाया गया। हालांकि, रजिस्टर बदले जाने और उसमें दर्ज प्रविष्टियों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ग्रामीण मनोज अग्रवाल ने प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शिक्षक के जेल जाने की जानकारी पहले विभागीय स्तर पर सामने नहीं आई और अब कलेक्टर के निलंबन संबंधी बयान के बावजूद शिक्षक के स्कूल आने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि शिक्षक बच्चों के साथ टूर पर गया था। कलेक्टर ने कहा- निलंबित किया, ज्वाइंट डायरेक्टर बोले- प्रस्ताव भेजा है मामला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और जिला शिक्षा अधिकारी गौरव वर्वे तक पहुंचा। डीईओ का कहना था कि स्कूल से शिक्षक के जेल जाने की जानकारी नहीं मिली है और इसके लिए जानकारी मांगी जा रही है। जबलपुर जेल से भी संपर्क करने की बात कही गई थी। छह दिन पहले कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा था कि संतोष पटेल को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। लेकिन इसके दो दिन बाद ग्रामीणों ने शिक्षक को स्कूल आते-जाते देखने का दावा किया। जल्द कार्रवाई का दावा इस बीच स्कूल शिक्षा विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर घनश्याम सोनी ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी हाल ही में मिली है। वे पता करेंगे कि कलेक्टर को शिक्षक के निलंबन की जानकारी किसने दी। उन्होंने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षक के निलंबन का प्रस्ताव DPI को भेजा है और जल्द कार्रवाई की जाएगी। विभागीय अधिकारी के बयान और कलेक्टर के पहले के दावे में अंतर के चलते अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि शिक्षक का निलंबन औपचारिक रूप से हुआ है या नहीं। वहीं, स्कूल में उसकी उपस्थिति और रजिस्टर में दर्ज छुट्टियों को लेकर उठे सवालों पर भी विभागीय स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। ये खबर भी पढ़ें… बच्ची को ‘चोर-डायन’ कहा, 10 दिन जेल में रहा शिक्षक जबलपुर में 17 नाबालिग की आत्महत्या के केस में शिक्षक संतोष पटेल ने गिरफ्तारी की जानकारी शिक्षा विभाग से छिपाई। किशोरी को चोर और डायन कहने के मामले में शिक्षक को 19 अगस्त 2026 को जेल भेजा गया था। मामले में 3 और आरोपी थे। जानकारी के मुताबिक, करीब 10 दिन बाद शिक्षक जमानत पर बाहर आ गया।पूरी खबर पढ़ें ——————— रिपोर्टर कॉपी जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि सगड़ा-छपनी शासकीय स्कूल में पदस्थ शिक्षक संतोष पटेल जेल जाने के बाद भी स्कूल आ रहा था, जिसे कि निलंबति करने के बाद उसके खिलाफ विभागीय जांच की जा रही है, वह शिक्षक ना सिर्फ आज भी स्कूल आ रहा है, बच्चों को पढा रहा है, और उनके साथ टूर भी कर रहा है। ऐसे में समझा जा सकता है कि शिक्षा विभाग ने शिक्षक संतोष पटेल के विषय में कलेक्टर को गलत जानकारी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि सस्पेंड होने के बाद भी वह रोजाना सुबह करीब 11 बजे स्कूल आकर रजिस्टर में साइन करता, और फिर चले जाता। शासकीय स्कूल सगड़ा छपनी में पदस्थ संतोष पटेल ने एक साल पहले अपने तीन भाई राममिलन पटेल, अशोक पटेल और राजेश पटेल के साथ मिलकर नाबालिग बच्ची के परिवार और रिश्तेदारों को बुलाकर पंचायत की थी। पुलिस जांच के मुताबिक, 19 अक्टूबर 2025 को हुई इस पंचायत में बच्ची के चरित्र और उसकी गतिविधियों को लेकर आरोप लगाए गए थे। पंचायत में मौजूद लोगों को उसका वीडियो स्क्रीन पर दिखाया गया। पुलिस के मुताबिक, यह वीडियो 15 अक्टूबर को कैमरे लगाकर बनवाया गया था। बच्ची और उसके माता-पिता की मौजूदगी में हुई पंचायत में उस पर चोरी समेत अन्य आपत्तिजनक आरोप लगाए गए। उसे अपमानित करने वाले शब्द कहे गए। पिता से कथित तौर पर 3 लाख रुपए हर्जाने के रूप में मांगने की धमकी भी दी गई। घटना के बाद माता-पिता ने किशोरी को कुछ दिनों के लिए मामा के घर भेज दिया था। 10 नवंबर 2025 को उसने वहीं जहर खा लिया। परिजन उसे बरगी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर जबलपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बरगी पुलिस ने करीब 10 महीने बाद संतोष पटेल समेत चारों आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। नाबालिग को प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में कार्रवाई की गई। आरोपी संतोष पटेल, राममिलन पटेल, अशोक पटेल और राजेश पटेल को कोर्ट ने जेल भेज दिया था। 10 दिन बाद संतोष पटेल को जमानत मिल गई। जेल से बाहर आने के बाद वह स्कूल पहुंच गया, लेकिन उसने अपनी गिरफ्तारी और जेल जाने की जानकारी शिक्षा विभाग को नहीं दी। मामला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और जिला शिक्षा अधिकारी गौरव वर्वे तक भी पहुंचा। डीईओ का कहना था कि स्कूल से शिक्षक संतोष पटेल के जेल जाने की जानकारी नहीं मिली है, जिसे कि मांगा जा रहा है। जबलपुर जेल से भी संपर्क किया जा रहा है। इधर जबलपुर कलेक्टर ने 6 दिन पहले दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा कि संतोष पटेल को निलंबित कर दिया है, और उसके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। कलेक्टर का यह बयान तब गलत हो गया जब दो दिन बाद ग्रामीणों ने संतोष पटेल को अन्य टीचरों की तरह से स्कूल आते और फिर जाते देखा। ग्रामीण मनोज अग्रवाल ने प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए है। उनका कहना है कि स्कूल विभाग ने पहले तो संतोष पटेल के जेल जाने की बात छिपाई, उसके बाद कलेक्टर को भी गुमराह किया गया। उन्होंने बताया कि टीचर के खिलाफ कार्रवाई ना होना यह बता रहा है कि प्रशासन का उसे संरक्षण प्राप्त है। जेल गए-मेडिकल छुट्टी लगाई-रजिस्टर बदला नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले पर बरगी पुलिस चौकी ने 19 अगस्त को गिरफ्तार किया। जानकारी के मुताबिक संतोष ने उसके पहले ही 17 अगस्त को ही स्कूल के रजिस्टर में मेडिकल लीव लगाकर आवेदन दे दिया। 10 दिन बाद 27अगस्त को जेल से जामानत पर छूट के आने के बाद तीन दिन तक लगातार वह स्कूल आया, जबकि उस दौरान भी रजिस्टर में छुट्टी डाली गई थी। बताया जा रहा है कि स्कूल के जिस रजिस्टर में संतोष पटेल का नाम और उसके मेडिकल लीव का जिक्र था, उस रजिस्टर को भी बदलकर नया लाया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग में पदस्थ अधिकारियों से सवाल किए है कि कलेक्टर जिस टीचर को निलंबित होना बता रहे है, आखिर कैसे वह रोजाना स्कूल आ रहा है, और बकायदा स्कूल के उपस्थिति रजिस्टर में साइन भी कर रहा है। हाल ही में स्कूली बच्चो के साथ उसने टूर भी किया था। मैं पता करता हूं स्कूल शिक्षा विभाग में पदस्त ज्वाइंट डायरेक्टर घनश्याम सोनी का कहना है कि मुझे इस विषय का जानकारी हाल ही में लगी है। मैं यह पता करता हूं कि कलेक्टर सर को किसने बताया कि टीचर संतोष पटेल को निलंबित कर दिया है। उन्होंने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी ने लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) को निलंबन का प्रस्ताव भेज दिया है, जल्द ही कार्रवाई भी होगी।

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