मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। नए प्रभारी ने टटोल ही ली पार्टी की नब्ज
मध्य प्रदेश भाजपा के नए-नवेले प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब से जब पार्टी के बड़े लीडर्स के बीच कॉर्डिनेशन की कमी को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सवाल को ही सवाल बनाकर टालने की कोशिश की। बोले कि आपको किसने कहा कि कॉर्डिनेशन की कमी है? हालांकि, प्रभारी जी सवाल से बच निकले, गोलमोल जवाब दे दिया। लेकिन उनके पास बैठे प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के चेहरे के भाव बहुत कुछ कह गए। एक्सप्रेशन ऐसे थे, मानो वे कह रहे हों- भई बात तो सही है। इधर, प्रभारी भले ही सवाल पर अनजान बन गए हों, लेकिन दो दिन के मध्य प्रदेश दौरे में उन्होंने पार्टी की नब्ज जरूर टटोल ली। शायद तभी उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ अध्यक्ष तक सभी को मिलकर काम करने की नसीहत दे डाली। बिप्लब कुमार देब ने कहा कि संगठन की सभी इकाइयों और प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ प्रेसिडेंट तक सभी को मिलकर काम करना है। बात सिर्फ नसीहत तक सीमित नहीं रही। प्रभारी ने यह भी माना कि नेताओं के बीच मतभेद हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने इसे लोकतंत्र का हिस्सा बताते हुए कहा कि जहां डिफरेंस है, वहीं डेमोक्रेसी है। बस ये डिफरेंस सार्वजनिक स्तर पर नहीं आना चाहिए। अब प्रभारी जी की बातों का मतलब समझिए। मतभेद हैं, ये बात मान ली गई। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश भाजपा में सब कुछ ‘ऑल इज वेल’ जैसा है, ऐसा कहना शायद जल्दबाजी होगी। राहुल के दौरे पर भाजपा-कांग्रेस में तकरार
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बालाघाट में आदिवासी समाज के बच्चों की मौत को लेकर मध्य प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में 100 प्रतिशत सरकारी फेल्योर है। राहुल गांधी के बालाघाट दौरे पर सियासत होना भी तय था। भाजपा ने उनके दौरे को ‘पॉलिटिकल टूरिज्म’ करार दिया। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सवाल उठाया कि घटना के तीन महीने बाद राहुल गांधी बालाघाट पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि इसे पॉलिटिकल टूरिज्म नहीं तो और क्या कहेंगे। अब स्वास्थ्य मंत्री का इतना कहना था कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी पलटवार कर दिया। पटवारी ने राजेंद्र शुक्ल को ‘मौत का सौदागर’ तक कह दिया। हालांकि, पलटवार के चक्कर में पटवारी से स्वास्थ्य मंत्री का सरनेम ही गड़बड़ा गया। पहले उन्हें राजेंद्र मिश्रा कहा, फिर शर्मा और आखिर में शुक्ला पर बात आकर रुकी। अब इसे लेकर लोग भी चुटकी ले रहे हैं। सवाल यही है कि सही नाम याद नहीं आया या नाम याद ही नहीं था? वजह जो भी हो, राजनीति में पलटवार का ये अंदाज भी चर्चा में जरूर आ गया। जब भाजपा सांसद राजेश मिश्रा ने तले समोसे
राजनीति जो कराए, सो कम है। सीधी से भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा एक समोसे की दुकान पर पहुंचे और यहां समोसे तलने लगे। इतना ही नहीं, उन्होंने समोसे वाले भैया से संवाद भी किया। सांसद ने पूछा कि कब से समोसे बना रहे हो? जवाब मिला- 20 साल से। फिर सवाल हुआ कि आर्थिक सहायता कहां से मिली है? जवाब आया- नगर पालिका से, मोदी जी ने दिया। इसके बाद सांसद ने पूछा- योजना का नाम क्या है? अब भैया को योजना का नाम ही पता नहीं था। फिर सांसद जी ने खुद ही पीएम स्वनिधि योजना का नाम बताया। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लोग चुटकी ले रहे हैं। इसे सांसद का पब्लिसिटी स्टंट बता रहे हैं। कह रहे हैं कि सुर्खियों में कैसे रहना है, सांसद जी की शायद इसमें भी ‘डॉक्टरी’ है। और अब अंदर की बात.. दामाद के लिए ससुर ने जमाई फील्डिंग
मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से के एक जिले में तैनात कलेक्टर साहब का जिले से हटना तय माना जा रहा है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि एक उद्योगपति से तनातनी का खामियाजा साहब को भुगतना पड़ सकता है। अब इस संभावना के चलते मंत्रालय में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी के मन में लड्डू फूटने लगे हैं। दरअसल, उनकी ख्वाहिश एक बार फिर कलेक्टरी की पारी खेलने की है। इसके लिए उन्होंने सेटिंग बैठाना भी शुरू कर दिया है। सुना है कि इस आईएएस दामाद के लिए उनके रिटायर्ड आईपीएस ससुर ने भी फील्डिंग जमा दी है। ऐसे में उनका कलेक्टर बनने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है। ये साहब पहले भी एक जिले में कलेक्टर रह चुके हैं। बता दें कि जल्द ही आईएएस अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट आने वाली है। इसमें मौजूदा कलेक्टर की विदाई और इन अधिकारी की फील्ड में कलेक्टर के रूप में पोस्टिंग तय मानी जा रही है। इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल), आशीष उरमलिया और सुनील कोरे (बालाघाट), मनोज शुक्ला (सीधी) ये भी पढ़ें –
मोहन से बोले मामा- मुख्यमंत्री जी, मान जाओ यार: शिवराज बने ‘महापुरुष’, विजयवर्गीय को ‘खास तवज्जो’ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरे मंच से सीएम डॉ. मोहन यादव से कहा- मुख्यमंत्री जी, मान जाओ यार जल्दी से। वे मुख्यमंत्री से नर्मदा के पानी के लिए गुहार लगा रहे थे। इधर, इसी कार्यक्रम में मंत्री करण सिंह वर्मा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को महापुरुष बता दिया। पूरी खबर पढ़ें
