जबलपुर में एक शिक्षक की चौंकाने वाली करतूत सामने आई है। मामला सालीबाड़ा संकुल स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल सगड़ा-छपनी का है। यहां पदस्थ शिक्षक संतोष पटेल ने एक नाबालिग बच्ची को कथित तौर पर ‘चोर’ और ‘डायन’ जैसे शब्द कहे थे। इससे आहत होकर बच्ची ने सुसाइड कर लिया। पुलिस ने संतोष पटेल समेत 4 लोगों को गिरफ्तार कर 19 अगस्त 2026 को जेल भेज दिया। लेकिन, शिक्षक ने इसकी जानकारी शिक्षा विभाग को नहीं दी। उसने जेल भेजे जाने से पहले स्कूल के रजिस्टर में मेडिकल लीव का आवेदन लगा दिया। 10 दिन बाद वह जमानत पर बाहर आया तो दोबारा स्कूल पहुंच गया। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले की विभाग के आला अफसरों को डेढ़ महीने तक भनक भी नहीं लग सकी। बच्ची को पंचायत बुलाकर वीडियो दिखाया था मामला 17 वर्षीय किशोरी से जुड़ा है। उसने 10 नवंबर 2025 को जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस जांच के मुताबिक, शिक्षक संतोष पटेल और राममिलन पटेल, अशोक पटेल और राजेश पटेल ने 19 अक्टूबर 2025 को बच्ची के रिश्तेदारों और परिवार के लोगों को बुलाया था। इस दौरान इन्होंने बच्ची के चरित्र और उसकी गतिविधियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। बच्ची का वीडियो भी वहां मौजूद लोगों के सामने स्क्रीन पर चलाकर दिखाया गया था। शिक्षक ने यह वीडियो 15 अक्टूबर 2025 को कैमरे लगाकर बनवाए थे। बच्ची और उसके माता-पिता की मौजूदगी में पंचायत में बच्ची पर चोरी और अन्य आपत्तिजनक आरोप लगाए गए। उसे अपमानित करने वाले शब्द कहे गए। पिता से कथित तौर पर 3 लाख रुपए हर्जाने के रूप में मांगने की धमकी भी दी गई। बच्ची को मामा के घर भेजा, वहां खा लिया जहर इस घटना के बाद बच्ची के माता-पिता ने उसे कुछ दिनों के लिए मामा के घर भेज दिया था। जहां 10 नवंबर 2025 को बच्ची ने जहर खा लिया। परिजन उसे तत्काल बरगी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर उसे जबलपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। लार्डगंज थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी। बाद में घटनास्थल बरगी पुलिस चौकी क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण जांच बरगी पुलिस को ट्रांसफर कर दी गई। 10 महीने बाद दर्ज हुई एफआईआर किशोरी की मौत के बाद पहले लार्डगंज और फिर बरगी पुलिस ने मामले की जांच की। करीब 10 महीने बाद बरगी पुलिस चौकी ने शिक्षक संतोष पटेल समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने आरोपियों पर नाबालिग को प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी धाराओं में कार्रवाई की। 19 अगस्त 2026 को संतोष पटेल, राममिलन पटेल, अशोक पटेल और राजेश पटेल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को जेल भेज दिया। मामले में विभाग की भूमिका संदिग्ध इस पूरे मामले में विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि शिक्षक ने जेल से लौटकर स्कूल ज्वाइन कर लिया। इसके बाद सगड़ा-छपनी स्कूल की प्राचार्या की ओर से 3 सितंबर को जिला शिक्षा अधिकारी को एक पत्र भेजा गया। जो 8 सितंबर 2026 को डीईओ कार्यालय में रिसीव हुआ।
पत्र में प्राचार्या ने जानकारी दी कि उन्हें स्कूल के शिक्षक संतोष कुमार पटेल का आवेदन प्राप्त हुआ था। आवेदन में शिक्षक ने दावा किया कि पारिवारिक विवाद के चलते उसके खिलाफ झूठा प्रकरण दर्ज कराया गया। 19 अगस्त 2026 की शाम पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल भेज दिया था। आवेदन में यह भी बताया गया कि कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से रिहा हो गया। डीईओ बोले- जानकारी नहीं थी, अब जांच कराएंगे जिला शिक्षा अधिकारी गौतम बर्वे का कहना है कि उन्हें शिक्षक की गिरफ्तारी और जेल जाने की जानकारी पहले नहीं थी। उन्होंने कहा कि स्कूल से आए पत्र की जानकारी भी अभी उनके संज्ञान में नहीं थी। एएसपी बोले- शिक्षक को किया था गिरफ्तार एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि जांच में सामने आया कि किशोरी पर चोरी के आरोप लगाए गए थे और उसके वीडियो को परिवार के लोगों की मौजूदगी में पंचायत बुलाकर दिखाया गया था। इस घटनाक्रम से बच्ची व्यथित हुई और बाद में उसने आत्महत्या कर ली। मामले में चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
