17 के फोन परिजन-पीए ने उठाए, 9 से संपर्क नहीं हुआ नगर निगम में महिलाओं को 50% आरक्षण मिला है। 2022 में चुनाव हुए थे। अब करीब चार साल बीत चुके हैं। महिला पार्षदों को अपने वार्ड को समझने और जनता से जुड़े काम कराने का पर्याप्त अनुभव मिल चुका है। बावजूद इसके जनप्रतिनिधि खुद जनता के फोन नहीं उठाते हैं। जनता उनसे सीधे कितनी आसानी से संपर्क कर सकती है? यह जानने के लिए भास्कर ने 44 महिला पार्षदों के सरकारी और निजी नंबरों पर फोन लगाया। पड़ताल में 60% यानी 26 मामलों में महिला पार्षदों से सीधे बात नहीं हो सकी। इनमें 17 के फोन पति, बेटे, भाई या पीए ने उठाए, जबकि 9 पार्षदों से सरकारी नंबर पर संपर्क नहीं हो सका। कई ने प्राइवेट नंबर तक नहीं उठाए। सिर्फ 18 पार्षदों ने खुद फोन उठाकर बात की और वार्ड-जोन में जनता के मुद्दों पर जवाब दिया। जोन अध्यक्ष का नंबर बंद, बैठकों में पति
वार्ड 3 की करिश्मा मीना पार्षद और जोन-1 अध्यक्ष हैं। उनका सरकारी नंबर बंद मिला। जोन का काम उनके पति विकास मीना देखते हैं और जोन की बैठकों में भी वे शामिल होते हैं। पता चला है कि कई अन्य महिला पार्षदों के पति या परिजन भी बैठकों में शामिल होते हैं। 8 के सरकारी नंबर बंद या कॉल रिसीव नहीं
वार्ड 20 की पूजा शर्मा, 24 की शबिस्ता आसिफ जकी, 32 की आरती राजू अनेजा, 38 की गौरी नितिन पाठक, 55 की अर्चना परमार, 61 की मधु शिवनानी, 79 की अंजू राजपूत (बब्लेश) और 80 की सुनीता गुड्डू भदौरिया के सरकारी नंबर बंद मिले या कॉल रिसीव नहीं हुई। निजी नंबरों पर भी संपर्क नहीं हो सका। इनमें किसी का नंबर बंद या सेवा में नहीं था, किसी ने फोन नहीं उठाया।
