टेंडर विवाद के कारण अटकी प्रक्रिया, कब मिलेगी स्पष्ट नहीं सरकारी स्कूल के बच्चों को यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का सरकार का प्लान इस बार फेल हो गया। तीन माह बीतने के बाद भी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले प्रदेश के 52 लाख से ज्यादा बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिल सकी। यूनिफॉर्म कब मिलेगी, सीली हुई मिलेगी या नकद राशि आएगी, यह विभाग स्पष्ट नहीं कर सका। उज्जैन के 88601 बच्चों को बगैर यूनिफॉर्म के ही स्कूल जाना पड़ रहा है। ऐसे में बच्चों को शिक्षा सत्र वर्ष 2026-27 में स्कूल यूनिफॉर्म मिल पाएगी या नहीं, इसका कोई भरोसा नहीं है। टेंडर में उलझी प्रक्रिया के कारण सरकार भी कुछ स्पष्ट करने की स्थिति में नहीं है। हालांकि वीसी में वरिष्ठ अफसरों ने सिली हुई ड्रेस के बजाय डीबीटी से 600 रुपए प्रति बच्चे के हिसाब से नकद भुगतान के तहत योजना का लाभ दिलाने के संकेत दे दिए हैं। इसे लेकर सभी जिलों में पहली से 8वीं तक के 52 लाख से ज्यादा बच्चों के बैंक खाते अपडेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि सरकार स्तर से नकद भुगतान का निर्णय हुआ तो तत्काल सभी बच्चों के खाते में दो जोड़ी यूनिफॉर्म के 600-600 रुपए जमा हो जाए। इसलिए उलझी प्रक्रिया… टेंडर शर्तों पर आपत्ति
सरकार ने 2026-27 के लिए एक समान गुणवत्ता और रंग सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीयकृत तरीके से रेडिमेड यूनिफॉर्म बांटने का फैसला लिया। जून में ही मप्र पाठ्यपुस्तक निगम ने यूनिफॉर्म खरीद के लिए करीब 350 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया। इस पर स्थानीय बुनकरों, एमएसएमई और पावरलूम संगठनों ने टेंडर की कठिन शर्तों पर आपत्ति जताई और हाईकोर्ट का रुख कर लिया और मामला अटक गया। जिले के 80% बच्चों के खातों का अपडेशन… वीसी में स्कूल यूनिफॉर्म के लिए इस बार भी नकद भुगतान व्यवस्था लागू होने की चर्चाओं को देखते हुए जिले के बच्चों का अपडेशन शुरू करा दिया है। कुल 1721 स्कूलों में पढ़ रहे कक्षा 1 से 8वीं तक के कुल 88,601 बच्चों में से 86002 (80%) के बैंक खाते अपडेशन भी हो गए हैं। स्कूल स्तर से शेष 20% बच्चों के खाते अपडेट करने के लिए शिक्षकों को निर्देशित कर दिया है। जिन बच्चों के खाते नहीं खोले, उनके खाते खुलवाना पड़ेंगे। दो साल से स्कीम फेल, फिर भी वही प्लान बना रहे
स्कूली बच्चों को यूनिफॉर्म के पैसे देने के बजाय ड्रेस तैयार कर वितरित करने के लिए सरकार ने दो से तीन बार प्रयास किए। तात्कालीन सीएम शिवराजसिंह चौहान ने स्व सहायता समूहों से यूनिफॉर्म तैयार कराने की घोषणा की। 2019-20 में मॉडल के तौर पर कुछ जिलों में प्रयोग हुआ, लेकिन स्व-सहायता समूह समय पर यूनिफॉर्म तैयार नहीं कर सके। शाजापुर में तो समूह काम नहीं कर सके तो जेल के बंदियों से यूनिफॉर्म सिलाई करवाते हुए काम निपटाना पड़ा। इधर, 2021-22 में भी यही स्थिति बनी। ज्यादातर जिलों में शिक्षा सत्र पूरा होने तक यूनिफॉर्म नहीं बांटी। आखिरकार 2024 व 25 में सरकार ने बच्चों के खाते में सीधे डीबीटी के माध्यम से 2 जोड़ी यूनिफॉर्म के 600-600 रुपए जमा कराए। लेकिन इस बार फिर सरकार ने यूनिफॉर्म तैयार कर बच्चों को देने की पहल शुरू की। इस बार यह प्रक्रिया टेंडर स्टेज पर ही उलझकर रह गई। ^ स्कूल यूनिफॉर्म का मसला मुख्यालय से तय होना है। देरी के कारण विभाग ने नकद भुगतान की तैयारी भी कर ली है, ताकि मुख्यालय से नकद भुगतान के निर्देश मिले तो तत्काल बच्चों के खाते में राशि जमा हो जाए। 80 प्रतिशत बच्चों के खाते अपडेशन करवा लिए हैं। – राहुल भार्गव, डीपीसी उज्जैन
