आगर-मालवा में मां बगलामुखी मंदिर के पास शनिवार आधी रात ओडिशा से आए श्रद्धालुओं की कार नाले में गिर गई। हादसे में 7 श्रद्धालुओं समेत 8 लोगों की मौत हो गई। मंदिर से करीब 60 फीट दूर हुए इस हादसे के बाद पुलिस-प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है। हादसे के दूसरे दिन रविवार को आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज सामने आए। एक फुटेज में सफेद कार मंदिर की तरफ जाती दिख रही है, जबकि दूसरे में रात करीब 12:07 बजे कार पुलिया से आगे बढ़ते ही नाले में गिरती दिखाई दे रही है। घटना के बाद दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची। यहां पुलिस और प्रशासन की तीन लापरवाही सामने आईं। पुलिया के पास बैरिकेड और साइन बोर्ड नहीं मंदिर के मुख्यद्वार के 60 फीट पहले नाले पर बनी 15 फीट चौड़ी और 100 फीट लंबी पुलिया है। नाला करीब 20 फीट गहरा है। मंदिर तक आने–जाने के लिए यही मुख्य रास्ता है। बाहर से आने वाले श्रद्धालु इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। इसके अलावा, वैकल्पिक मार्ग भी है। मुख्य सड़क से अंदर कुछ मकानों के बीच से होकर यह मार्ग पार्किंग तक जाता है। हालांकि इसके बारे में कम ही लोगों को पता है। इसकी जानकारी जानकारी नए श्रद्धालुओं को नहीं होती। पुलिया पर एंगल और पाइप लगे हैं। रेलिंग पर लगे एंगल भी टूटे हैं। करीब 10 से 12 फीट के एरिया में तो कुछ नहीं है, यहीं से कार नाले में गिरी थी।वैकल्पिक मार्ग के बारे में बताने के लिए बैरिकेड्स और साइन बोर्ड भी नहीं लगे। साथ ही, पुलिया के पास भी खतरे वाले चेतावनी बोर्ड नहीं लगे हैं। सुरक्षा व्यवस्था, गार्ड की तैनाती नदारद आधी रात को जिस वक्त हादसा हुआ, उस समय तेज बारिश हो रही थी। पुलिया के ऊपर करीब 4 फीट पानी था। आशंका है कि कार ड्राइवर को रास्ता नहीं दिखा। कार नाले में समा गई। बता दें कि नवरात्रि, वीकेंड और ज्यादा भीड़ के समय दो गार्ड तैनात कर दिए जाते हैं। मंदिर जाने के दौरान पुलिया शुरू होते ही बैरिकेड्स भी लगा दिए जाते हैं। लोागें को वैकल्पिक मार्ग से जाने की सलाह दी जाती है। यहां से गाड़ियों की आवाजाही बंद कर दी जाती है, लेकिन लौटते समय यह व्यवस्था नहीं रहती। जब पुलिया पर पानी था, तो पुलिस को गार्ड तैनात करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। एसडीओपी देवनारायण यादव का कहना है कि पुलिया की दूसरी तरफ यानी मंदिर जाने वाले मार्ग पर गार्ड मौजूद था। बिजली भी नहीं थी। बारिश हो रही थी, इस कारण पता नहीं चला। एसडीओपी का कहना है कि परिवार रात करीब 8 बजे मंदिर पहुंचा था। यहां पूजन और हवन कराया। रात करीब 12 बजे यहां से निकले थे। लौटते वक्त हादसा हो गया। मंदिर समिति की चूक- कलेक्टर के आदेश की अनदेखी कलेक्टर शेर सिंह मीणा ने 18 अगस्त काे आदेश जारी किया था। इसमें सुरक्षा के लिए मंदिर समिति अपने बैरिकेड्स बनवाने और पीडब्ल्यूडी के बैरिकेड्स लौटाने के लिए कहा गया था। अदेश के बाद समिति ने लोक निर्माण विभाग को बैरिकेड्स तो लौटा दिए, लेकिन अभी तक नए बैरिकेड्स बनवाकर नहीं लगाए। इस बारे में मंदिर समिति के पदाधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। सीसीटीवी में कार गिरते दिखी पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले। रविवार को 3 सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं। पहले फुटेज में सफेद रंग की कार रात करीब 8 बजे मंदिर के रास्ते से गुजरते हुए दिख रही है। दूसरे फुटेज में रात करीब 12: 07 बजे कार पुलिया से निकलती दिख रही है। आगे बढ़ती ही कार नाले में समा जाती है। वहीं, तीसरा फुटेज भी सामने आया है। यह वीडियो इसी रात 11:10 मिनट बजे का है। बताया जाता है कि दो शख्स नाले में गिर गए थे। वह खुद ही निकल आए थे। फुटेज में एक शख्स नाले से बचकर आते हुए भी दिख रहा है। हालांकि इस बारे में थाने में कोई शिकायत या गुमशुदगी दर्ज नहीं की गई है। इस कारण पुलिस को भी जानकारी नहीं है कि ये शख्स कौन थे। 10 साल पहले भी गिर चुकी है कार साल 2016 में भी इसी नाले में कार गिर गई थी। उस वक्त तीन लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। इसके बाद से ही स्थानीय लोग पुलिया के चौड़ीकरण और ऊंचा उठाने की मांग करते रहे हैं। बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। स्थानीय श्रद्धालु विपिन पाटनी, पंकज सोनी, मनीष जैन, सीताराम पाटीदार ने भी घटना के लिए प्रशासन को दोषी ठहराया है। सभी का कहना है कि मंदिर में देशभर से श्रद्धालु आते हैं। यहां तक कि कई वीआईपी भी आते हैं। ऐसे में यहां पर्याप्त व्यवस्था होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। मंदिर के आसपास दुकान लगाने वाली कृष्णा राठौर ने बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप सुरक्षा व सुविधाओं के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। पार्किंग पर वसूली, मैदान में कीचड़ मंदिर में पास ही बड़ा सा पार्किंग मैदान है। यहां 20 रुपए प्रति चार पहिया वाहन से शुल्क लिया जाता है। इसके लिए करीब 20 लोग तैनात हैं। पूरा मैदान कच्चा और मिट्टी का है, इसलिए बारिश के दिनों में यहां कीचड़ हो जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। आए दिन पार्किंग कर्मचारी भी कई बार आने वाले श्रद्धालुओं से विवाद करते हैं। मंदिर समिति की व्यवस्थाओं पर भी सवाल मां बगलामुखी मंदिर की व्यवस्थाएं पहले भी विवादों में रही हैं। हाल में शासकीय प्रबंध समिति के समानांतर अन्य समिति द्वारा श्रद्धालुओं से सोना, चांदी और नकदी के रूप में दान लेने को लेकर विवाद सामने आया था। मंदिर के पंजीकृत और अपंजीकृत पंडितों को लेकर भी विवाद होते रहे हैं। हवन की राशि को लेकर पंडितों और प्रशासन के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी है। इसके अलावा, मंदिर मिर्च के हवल के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन मिर्च का हवन फिलहाल बंद है। अगर कोई श्रद्धालु इसके लिए बोलता है, तो अपंजीकृत पुजारी अलग जगह ले जाकर हवन संपन्न कराते हैं। …………………………………… यह खबर भी पढ़ें- MP में उफनते नाले में बही कार, 8 की मौत मध्य प्रदेश के आगर-मालवा के नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के पास बरसाती नाले में कार बहने से 8 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 3 बच्चे, 2 महिलाएं और 3 पुरुष हैं। 7 मृतक ओडिशा के रहने वाले थे, जबकि कार ड्राइवर अरुण गोयल आगर-मालवा के बड़ौद का निवासी था। सभी श्रद्धालु उज्जैन से कार किराए पर लेकर मां बगलामुखी मंदिर दर्शन के लिए आए थे। पढ़ें पूरी खबर
