लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षण संस्थान (एलएनआईपीई) में छात्रों का धरना बुधवार को आठवें दिन भी जारी रहा। दिनभर संस्थान प्रबंधन ने ग्वालियर पुलिस की मौजूदगी में छात्रों से बातचीत कर आंदोलन खत्म कराने का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। छात्रों ने रजिस्ट्रार प्रो. यतेंद्र सिंह के इस्तीफे और मृत छात्रा श्रुति उपाध्याय के परिजनों को 50 लाख रुपए मुआवजा देने समेत छह मांगों पर लिखित आश्वासन की मांग दोहराई। छात्रों का कहना है कि जब तक मांगों पर स्पष्ट निर्णय, लिखित आश्वासन और समय-सीमा नहीं दी जाती, धरना जारी रहेगा। इससे पहले मंगलवार को सात दिन के आंदोलन के बाद कुलगुरु प्रो. कल्पना शर्मा और संस्थान के अधिकारियों के साथ छात्रों की करीब साढ़े तीन से चार घंटे बैठक हुई थी। छात्रों के अनुसार, बैठक में छह मांगों में से किसी पर भी स्पष्ट लिखित आश्वासन नहीं मिला। छात्रों का कहना है कि प्रबंधन की ओर से बार-बार जांच की बात कही गई और बताया गया कि जांच पूरी होने में पांच से छह महीने लग सकते हैं। छात्रों ने कहा कि यदि मांगों पर लिखित आश्वासन के साथ डेडलाइन दी जाती है तो वे आंदोलन खत्म करने पर विचार कर सकते हैं। कुलगुरु ने मांगों को लेकर नोट दिखाया, रजिस्ट्रार को लेकर असमंजस बातचीत के दौरान कुलगुरु ने छात्रों को एक नोट भी दिखाया, जिसमें उनकी मांगों को स्वीकार किए जाने की बात कही गई। हालांकि, छात्रों का कहना है कि रजिस्ट्रार के इस्तीफे को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। छात्रों ने कहा कि वे रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग पर कायम हैं और केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। छात्रों का आरोप है कि संस्थान प्रशासन की जिम्मेदारी होने के कारण पूरे मामले की जवाबदेही रजिस्ट्रार की तय होनी चाहिए। उनका कहना है कि आंदोलन के दौरान संस्थान की ओर से मीडिया के सामने दिए गए बयानों में भी रजिस्ट्रार प्रमुख रूप से सामने रहे हैं, इसलिए वे उनसे जवाबदेही चाहते हैं। मृतका के परिजनों को 50 लाख रुपए देने की मांग छात्रों ने श्रुति उपाध्याय के परिजनों को 50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग भी रखी है। इस पर कुलगुरु प्रो. कल्पना शर्मा ने कहा कि वह अपनी सैलरी से पांच दिन का वेतन मृतका के परिजनों को देंगी। इसके साथ ही उन्होंने अन्य फैकल्टी से भी आर्थिक सहयोग के लिए चर्चा करने की बात कही, ताकि परिवार को अधिक से अधिक राशि उपलब्ध कराई जा सके। कुलगुरु के अनुसार, 8 सितंबर को गुवाहाटी कैंपस की छात्रा की मौत की जानकारी मिलने के बाद वह स्वयं गुवाहाटी पहुंची थीं। वहां छात्रा के परिजनों और विद्यार्थियों से बातचीत की गई। संस्थान की ओर से तत्काल आर्थिक सहायता की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। पहले पांच लाख रुपए की सहायता की बात थी, लेकिन बाद में करीब नौ लाख रुपए की कुल आर्थिक राहत तत्काल उपलब्ध कराई गई। कुलगुरु बोलीं- गुवाहाटी में छात्रों से हुई थी बातचीत कुलगुरु ने बताया कि गुवाहाटी में जिला प्रशासन की मौजूदगी में छात्रों और फैकल्टी के सामने उनकी मांगों पर बातचीत हुई थी। उनका दावा है कि उस समय छात्रों ने आंदोलन समाप्त करने की बात कही थी। हालांकि, बाद में गुवाहाटी के छात्रों ने बताया कि ग्वालियर में आंदोलन जारी है, इसलिए वहां भी प्रदर्शन जारी रखा गया। प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन कुलगुरु की ओर से यह भी कहा गया कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ किसी तरह की एकेडमिक या अन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके बावजूद छात्र आंदोलन समाप्त करने के लिए तैयार नहीं हुए। बातचीत के दौरान रजिस्ट्रार प्रो. यतेंद्र सिंह ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जब कुलगुरु कैंपस में मौजूद नहीं थीं, तब संस्थान के प्रशासनिक स्तर पर उनके द्वारा जो निर्णय लिया गया, वह संस्थान के हित को देखते हुए अपने विवेक से लिया गया था। उन्होंने कहा कि यदि उनके निर्णय से किसी को ठेस पहुंची है या किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे उसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं। एएसपी ने कहा- प्रदर्शन के लिए अनुमति जरूरी बातचीत के दौरान एडिशनल एसपी सुजावल जग्गा ने भी छात्रों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि छात्र खुले में विरोध-प्रदर्शन करना चाहते हैं तो इसके लिए अनुमति लेना जरूरी होगा। छात्रों के चुने हुए प्रतिनिधिमंडल को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी कि प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की घटना या दुर्घटना न हो। प्रबंधन ने कक्षाएं अटेंड करने की अपील की कुलगुरु ने बताया कि 15 सितंबर को ग्वालियर में छात्रों के साथ संवाद किया गया था। बैठक में मीडिया और अन्य लोगों की मौजूदगी पर संस्थान की ओर से कोई रोक नहीं लगाई गई। कुछ पीएचडी स्कॉलर्स ने केंद्रीय मंत्री से भी मुलाकात कर छात्रों की मांगों पर चर्चा की। इसके बाद छात्रों के साथ ऑडिटोरियम में बैठक की गई। प्रबंधन की ओर से छात्रों से कक्षाएं अटेंड करने की अपील की गई है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि जब तक छह मांगों पर लिखित आश्वासन और स्पष्ट समय-सीमा नहीं मिलती, वे कक्षाओं में नहीं जाएंगे और धरना जारी रखेंगे।
