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रायपुर के शादाब 15 साल से बना रहे गणेश प्रतिमाएं:हर मूर्तियों के अलग नाम और स्वरूप, कहा- धर्म कोई भी हो, सम्मान जरूरी

रायपुर के शादाब ने इस साल 250 गणपति की मूर्तियां तैयार की हैं। चेहरे के भाव से लेकर मुकुट, आभूषण और गणपति के अलग-अलग स्वरूपों को मूर्ति में उतारने की उनकी कला लोगों को बेहद पसंद आ रही है। वे पिछले करीब 15 साल से गणपति की मूर्तियां बना रहे हैं। शादाब (30) का कहना है कि बचपन से ही उन्हें कला में रुचि थी। मोहल्ले में लोग गणपति की मूर्तियां स्थापित करते थे, तो वे भी समिति में जुड़कर काम करते थे। और यही से गणपति के प्रति उनकी श्रद्धा और इस ओर काम करने की शुरुआत हुई। 5 साल पहले अश्विनी नगर में उन्होंने शादाब स्टूडियो शुरू किया है। यही अब उनका वर्कशॉप भी है। उनकी बनाई प्रतिमाओं की खासियत यह है कि हर प्रतिमा का अलग नाम और रूप है। वर्कशॉप में देव गणेश, तुर्जा गणपति, कीर्तिमुख गणेश, गजवक्र, बाल विनायक जैसे अलग-अलग स्वरूपों की मूर्तियां देखने को मिलती हैं। धर्म के मुद्दे पर शादाब ने कहा कि धर्म कोई भी हो, सभी का सम्मान जरूरी है। गणपति से लगाव है और इस काम से उन्हें लोगों से सम्मान भी मिलता है। उनके लिए यह काम सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मसंतुष्टि भी देता है। पहले देखिए ये तस्वीरें- मोहल्ले में गणपति समिति में काम करने की शुरुआत शादाब बताते हैं कि बचपन में मोहल्ले में गणपति की मूर्तियां स्थापित होती थी। वे घंटों वहां बैठकर पंडाल में कलाकारों को काम करते देखते थे। इसके बाद खुद पंडाल को सजाना डेकोरेशन करने की शुरुआत हुई। इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने अपने मोहल्ले की गणपति प्रतिमाएं बनाना शुरू कर दिया। इसके साथ पंडाल की सजावट का काम भी करने लगे। जब लोगों ने उनके काम की तारीफ की तो उनका उत्साह बढ़ता गया। एक दिन उनके काम को देखकर एक परिचित ने उन्हें एक स्थानीय मूर्तिकार के पास काम सीखने के लिए भेजा। यहीं से उनके हुनर को सही दिशा मिली। इसके बाद उन्होंने करीब 10 साल तक दूसरे कलाकार के साथ काम करके मूर्ति बनाने की बारीकियां सीखीं। 5 साल पहले शुरू किया अपना स्टूडियो करीब 5 साल पहले शादाब ने अपना शादाब आर्ट स्टूडियो शुरू किया। अब वे अपने परिवार और कुछ दोस्तों के साथ मिलकर मूर्तियां बनाते हैं। उनके भाई और परिवार के अन्य सदस्य भी इस काम में हाथ बंटाते हैं। पिछले दो-तीन साल से उनके कुछ दोस्त भी उनके साथ काम कर रहे हैं। उनका स्टूडियो ही उनकी वर्कशॉप है। यहीं मूर्तियां बनाई जाती हैं, फिनिशिंग होती है और यहीं से ग्राहकों को दी जाती हैं। वे अपनी मूर्तियां बाजार में ले जाकर बेचने के बजाय सीधे ऑर्डर के हिसाब से तैयार करते हैं। 900 से 10 हजार रुपए तक की मूर्तियां शादाब के पास इस बार करीब 250 गणपति की मूर्तियां तैयार हैं। इनकी कीमत करीब 900 रुपए से लेकर 10 हजार रुपए तक है। ज्यादातर मूर्तियां ग्राहकों के ऑर्डर पर तैयार की गई हैं। इसके अलावा कुछ रेडीमेड मूर्तियां भी बनाई गई हैं। उनका कहना है कि हर मूर्ति को तैयार करने में वे उसके स्वरूप और नाम का ध्यान रखते हैं। यही वजह है कि उनकी वर्कशॉप में रखी मूर्तियों पर नंबर के साथ उनके अलग-अलग स्वरूपों के नाम भी लिखे गए हैं। गणपति के अलग-अलग नाम और स्वरूप बताते हैं शादाब ने बताया कि गणपति के कई अलग-अलग नाम और स्वरूप हैं, लेकिन आमतौर पर लोगों को कुछ ही नाम पता होते हैं। इसलिए उन्होंने तय किया कि हर मूर्ति को उसके स्वरूप और नाम के साथ प्रदर्शित करेंगे। उनकी वर्कशॉप में देव गणेश, तुर्जा गणपति, कीर्तिमुख गणेश, गजवक्र, बाल विनायक जैसे अलग-अलग स्वरूपों की मूर्तियां भी देखने को मिलती हैं। उनका मानना है कि कलाकार के लिए सिर्फ मूर्ति बेच देना ही सबसे बड़ी खुशी नहीं है। जब कोई व्यक्ति उसकी बनाई मूर्ति देखकर तारीफ करता है, तो उससे मिलने वाली संतुष्टि अलग होती है। ‘धर्म कोई भी हो, सम्मान करना जरूरी’ शादाब से जब पूछा गया कि वे जिस धर्म से आते हैं, उसके बावजूद गणपति की मूर्तियां बनाने को लेकर क्या सोचते हैं, तो उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म को मानना या न मानना व्यक्तिगत विषय हो सकता है, लेकिन दूसरे धर्म का सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उन्हें गणपति से लगाव है और इस काम से उन्हें लोगों से सम्मान भी मिलता है। उनके लिए यह काम सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मसंतुष्टि भी देता है। ‘गणपति उत्सव मिलकर मनाएं, यह सबका त्योहार है’ आज जब धर्म के नाम पर समाज में दूरी और नफरत की बातें होती हैं, ऐसे समय में शादाब का संदेश सीधा है। उनका कहना है कि लोगों को नफरत फैलाने वाले लोगों से दूर रहना चाहिए और अच्छे लोगों के साथ रहना चाहिए। ……………………….. इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… बांस, दाल और धूप-अगरबत्ती से बनी गणेश प्रतिमाएं:रायपुर में 3 महीने की मेहनत से तैयार, 30 साल से मूर्तियां बना रहा परिवार गणेशोत्सव से पहले रायपुर में इस बार अलग-अलग थीम पर भगवान गणेश की खास मूर्तियां तैयार की जा रही हैं। मूर्तिकार ग्राहकों की पसंद और उनके बताए आइडिया के अनुसार मूर्तियां बना रहे हैं। इनमें बांस, पूजा सामग्री, मोती, दाल और धूप-अगरबत्ती जैसी चीजों से बनी मूर्तियां शामिल हैं। कुछ खास मूर्तियों को तैयार करने में तीन महीने तक का समय लगा है। पढ़ें पूरी खबर…

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