सतना मुख्यालय और तराई इलाके में शुक्रवार रात हुई तेज बारिश के बाद चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। शनिवार सुबह तक नदी का पानी लगातार बढ़ता रहा। रामघाट समेत दूसरे घाटों की सीढ़ियां पूरी तरह पानी में डूब गईं। जलस्तर में तेजी से हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का प्रशासन अलर्ट पर है। सावधानी के तौर पर प्रशासन ने घाटों पर बैरिकेडिंग लगा दी है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को निचले इलाकों में जाने से रोका गया है। घाट किनारे के दुकानदारों को भी सतर्क रहने और नदी के बढ़ते पानी को देखते हुए सामान सुरक्षित जगह पर हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर रख रहा है। जलस्तर खतरे से करीब 3 मीटर नीचे
फिलहाल राहत की बात यह है कि मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 3 मीटर नीचे है। हालांकि, रातभर हुई बारिश के बाद पानी तेजी से बढ़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पिछले दिनों आई बाढ़ के बाद नदी के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी को लेकर घाटों पर खास नजर रखी जा रही है। शुक्रवार को दिनभर बादल आते-जाते रहे। कभी हल्की बारिश हुई तो कुछ देर बाद तेज धूप निकल आई। इससे अधिकतम तापमान में करीब 2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई और पारा 31.9 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से आधा डिग्री ज्यादा रहा। न्यूनतम तापमान 24.4 डिग्री रहा, जो सामान्य था। शाम को मौसम ने अचानक करवट बदली और करीब 15 मिनट तक हल्की से मध्यम बारिश हुई। इसके बाद रात 11.30 बजे से तेज बारिश शुरू हुई, जो रातभर रुक-रुककर जारी रही। 24 घंटे में आधा इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली। ये है मौसम सिस्टम
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र वर्तमान में ओडिशा के ऊपर बना हुआ है। इसके साथ ही मानसून ट्रफ लाइन बंगाल की खाड़ी से छत्तीसगढ़, दक्षिण-पश्चिम मध्यप्रदेश होते हुए राजस्थान तक बनी हुई है। इसके प्रभाव से सतना समेत रीवा संभाग में अगले दौर में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी हुई है। यह भी पढ़ें… ‘चित्रकूट में बाढ़ नहीं, हम नदी के रास्ते में आए’ सतना जिले के चित्रकूट में 5 दिनों में 3 बार आई बाढ़ के पीछे अतिक्रमण, अव्यवस्थित विकास और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 12 साल पहले मंदाकिनी के किनारे अतिक्रमण के सर्वे के निर्देश दिए थे, लेकिन कार्रवाई प्रभावी रूप से आगे नहीं बढ़ी। पूरी खबर पढ़िए…
