रीवा के मनगवां अस्पताल में शुक्रवार रात हार्ट अटैक के बाद पहुंचे 45 वर्षीय गोविंद पटेल को समय पर इलाज नहीं मिल पाने का आरोप लगा है। परिजनों के मुताबिक गोविंद की सांस चल रही थी और वे खुद गाड़ी से उसे अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां एक गार्ड और नर्स मौजूद मिले, लेकिन डॉक्टर के बारे में पूछने पर बताया गया कि डॉक्टर घर में हैं। करीब 45 मिनट इंतजार के बाद भी डॉक्टर नहीं पहुंचे। इसके बाद परिजन मजबूरी में गोविंद को रीवा लेकर रवाना हुए। परिजनों ने बताया कि रीवा पहुंचते-पहुंचते हालत बेहद गंभीर हो गई। रास्ते में बिहान अपस्ताल दिखा। जब वहां ले गए तब सांस चल रही थी। वहां के डॉक्टरों ने बोला कि अब तो लेट कर दिया आप सब ने क्योंकि हालत बिगड़ गई। अब आप लोग सुपर स्पेशलिटी में ले जाइए। सुपर स्पेशलिटी में डॉक्टरों ने कहा कि आधे घंटे पहले ले आते तो कुछ हो सकता था। मनगवां अस्पताल लाते समय सांसे चल रही थी
गोविंद पटेल ग्राम तेंदुआ, थाना गढ़ के रहने वाले थे। उनके साथ अस्पताल पहुंचे शिवम मिश्रा ने बताया कि जब गोविंद को मनगवां अस्पताल लेकर पहुंचे थे, तब उनकी सांस चल रही थी। वह खुद अपनी गाड़ी से उन्हें अस्पताल लेकर गए थे। अस्पताल में डॉक्टर के बारे में पूछने पर बताया गया कि डॉक्टर घर में हैं और आने में समय लगेगा। डॉक्टर को फोन किए गए, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। करीब 45 मिनट तक इंतजार करने के बाद भी डॉक्टर नहीं आए तो गोविंद को रीवा ले जाना पड़ा। परिजन बृजेन्द्र पटेल ने आरोप लगाया कि अगर डॉक्टर अस्पताल में मौजूद होते और समय पर इलाज मिल जाता तो गोविंद की जान बच सकती थी। प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग
मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी के विधानसभा अध्यक्ष मनगवां प्रकाश तिवारी ने भी अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति को हार्ट अटैक आया और उसे मनगवां अस्पताल लाया गया, लेकिन वहां कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था। इलाज के अभाव में उसकी जान चली गई। उन्होंने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मामले में कड़े कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, अन्यथा युवा कांग्रेस आंदोलन करेगी। बीएमओ बोले- डॉक्टर को अस्पताल में कमरा तक दिया
मनगवां अस्पताल के बीएमओ डॉक्टर देवव्रत पांडेय ने बताया कि डॉक्टर कृष्णा पटेल पिछले 3 महीने से अस्पताल में पदस्थ हैं और उनकी नाइट ड्यूटी रहती है। शुरुआत में डॉक्टर ने अस्पताल से कमरा दूर होने की बात कही थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल परिसर के भीतर ही रहने के लिए कमरा उपलब्ध कराया गया था। बीएमओ के मुताबिक, इसके बावजूद डॉक्टर रात में अस्पताल में मौजूद नहीं रहते। कोई मरीज रात में आता है तो डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते। उन्होंने बताया कि डॉक्टर को कई बार समझाइश दी जा चुकी है। अब उन्हें नोटिस जारी किया जा रहा है। गोविंद के भाई की मौत पहले हो चुकी
गोविंद पटेल के छोटे भाई अशोक पटेल की कुछ समय पहले कैंसर से मौत हो गई थी। अशोक की पत्नी और 3 बेटियों के खर्च की जिम्मेदारी भी गोविंद ही उठा रहे थे। गोविंद के परिवार में 4 बेटियां और एक बेटा है। इनमें एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि बेटा कक्षा 3 में पढ़ता है और 3 बेटियां अभी छोटी हैं। परिजनों के मुताबिक गोविंद की मौत से परिवार के साथ ही उनके छोटे भाई का परिवार भी मुश्किल में आ गया है। परिजनों का कहना है कि अब कुल 7 बच्चे पिता का साया खो चुके हैं। परिजनों ने कहा कि गोविंद की मौत को लेकर वे एफआईआर दर्ज करवाएंगे। फिलहाल वे मृत्यु उपरांत होने वाले संस्कार में व्यस्त हैं। संस्कार पूरा होने के बाद मामले में शिकायत की जाएगी।
