Homeमध्यप्रदेशकागजों में कुपोषण मुक्त श्योपुर:50 फीसदी मासूम बिना स्वस्थ हुए सिस्टम से...

कागजों में कुपोषण मुक्त श्योपुर:50 फीसदी मासूम बिना स्वस्थ हुए सिस्टम से बाहर, पंजीयन का लक्ष्य 166 फीसदी पार

रिकवरी दर गिरकर 56.5 फीसदी, जो बच्चे कुपोषित, उनके नाम आंगनबाड़ी के रिकॉर्ड में ही नहीं श्योपुर भले ही कागजों में कुपोषण मुक्त दिख रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत चिंताजनक है। मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संजीवनी कोष के आंकड़े बताते हैं कि गंभीर कुपोषण से पीड़ित 50% से 61% बच्चों को बिना ठीक हुए डिस्चार्ज किया जा रहा है। जून में डिस्चार्ज हुए 1,957 बच्चों में से केवल 57.7% स्वस्थ हुए, जबकि 42.3% को अधूरा इलाज देकर घर भेज दिया गया। जुलाई में भी 1,205 बच्चों में से सिर्फ 56.5% ही ठीक हो सके और 43.5% बिना ठीक हुए बाहर हो गए। कागजों में पंजीयन का लक्ष्य 166% पूरा दिखाया जा रहा है, पर गिरती रिकवरी दर पूरी इलाज व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। एनआरसी में भर्ती कान्हा का वजन नहीं बढ़ रहा
एनआरसी में भर्ती ढाई साल के कान्हा के पिता मंगल आदिवासी का कहना है कि बच्चा जन्म से ही कमजोर है, जबकि उसे पिछले माह ही अति कुपोषित की सूची में जोड़ा है। अधिकारी बीमारी की दलील दे रहे हैं, लेकिन बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो रहा है। 25 घरों की बस्ती में 3 बच्चे कुपोषित, रिकॉर्ड में नहीं
रघुनाथपुर के पास 25 परिवारों की सहराना बस्ती में तीन कमजोर बच्चे मिले, जो किसी आंगनबाड़ी केंद्र में दर्ज ही नहीं हैं। भास्कर टीम के वजन करने पर 3 साल के आशिक का वजन केवल 6.9 किग्रा और 4 साल के चेतन का वजन महज 5.35 किग्रा निकला। शर्मनाक आंकड़े (NFHS-6 के अनुसार)
दुबलेपन में मप्र देश में नंबर-1: राज्य में 100 में से 24 बच्चे लंबाई के हिसाब से बहुत दुबले हैं। 5 साल पहले यह आंकड़ा 19 था, यानी सुधार की जगह स्थिति और बिगड़ी है।
कम वजन में दूसरे नंबर पर: प्रदेश में 100 में से 39.7% (लगभग 40) बच्चों का वजन उम्र के हिसाब से बहुत कम है। पिछले सर्वेक्षण में यह 33 था।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here