इंदौर में वाल्मीकि समाज ने शनिवार को अपने आराध्य वीर गोगादेव की नवमी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई। शहर की करीब 28 वाल्मीकि बस्तियों से शाम को आकर्षक झांकियां, निशान और अखाड़े बैंड-बाजों के साथ निकलें। सभी निशान रात करीब 9 बजे तक राजबाड़ा पहुंचें। इसके बाद यहां से चल समारोह यशवंत रोड होते हुए पंढरीनाथ स्थित वीर गोगादेव चौहान मंदिर पहुंचेगा। इस बार चल समारोह में 65 से अधिक निशान शामिल होंगे। पंढरीनाथ मंदिर पहुंचने के बाद रातभर धार्मिक कार्यक्रम और जलसा होगा। समाजजन एक-दूसरे को अरगजा लगाकर गोगा नवमी की शुभकामनाएं देंगे। सावन माह से ही गोगादेव की पूजा-अर्चना
वाल्मीकि युवा संगठन के अध्यक्ष एवं वीर गोगादेव जन्मोत्सव निर्णायक मंडल मंच के अध्यक्ष चौधरी लीलाधर करोसिया ने बताया कि सावन माह से ही गोगादेव के भक्त नियमित पूजा-अर्चना कर रहे हैं। राजमोहल्ला, उषाफाटक, पलासिया, कमाठीपुरा, गाड़ी अड्डा, भंवरकुआं, वाल्मीकि नगर और अमर टेकरी सहित कई बस्तियों से झांकियां और छड़ी निशान निकाले गए। गोगादेव को शौर्य का प्रतीक मानते हैं गोगादेव महाराज को गोगाजी, जाहरवीर और जाहर पीर के नाम से भी जाना जाता है। लोक मान्यता में उन्हें शौर्य और वीरता का प्रतीक माना जाता है। राजस्थान के चूरू जिले के ददरेवा को उनका जन्मस्थान माना जाता है। मान्यता है कि गुरु गोरक्षनाथ के आशीर्वाद से उनका जन्म हुआ था। उन्हें सर्पों के देवता के रूप में भी पूजा जाता है।
