शिक्षक दिवस पर शनिवार को तेज बारिश के बीच अतिथि शिक्षकों ने शाहजहानी पार्क में सांकेतिक प्रदर्शन किया। मौसम खराब होने के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके। संगठन के मुताबिक, शिक्षकों से केवल उन्हीं लोगों को आने के लिए कहा गया था, जो बारिश के बीच आसानी से पहुंच सकते हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से वर्षों से लंबित घोषणाओं को पूरा करने और अतिथि शिक्षकों के लिए स्थायी रोजगार की नीति बनाने की मांग की। अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि सरकार ने अतिथि शिक्षकों के वार्षिक अनुबंध, बीच सत्र में बेरोजगार नहीं करने, गुरुजियों की तरह नीति बनाकर नियमित करने और सीधी भर्ती में बोनस अंक देने की घोषणाएं की थीं। इन पर अब तक अमल नहीं हुआ है। परिहार ने कहा कि अतिथि शिक्षक वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनका भविष्य अब भी असुरक्षित है। सरकार को उनके लिए स्थायी रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए। एक महीने का अल्टीमेटम, 2 अक्टूबर से धरना बारिश के कारण शनिवार का प्रदर्शन सांकेतिक रखा गया। संगठन ने सरकार को मांगें पूरी करने के लिए एक महीने का अल्टीमेटम दिया है। परिहार ने कहा कि यदि एक महीने में अतिथि शिक्षकों के हित में स्थायी नीति नहीं बनाई गई तो 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से भोपाल में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। 18 साल से अंशकालीन व्यवस्था में काम संगठन का कहना है कि मध्यप्रदेश में अतिथि शिक्षक व्यवस्था वर्ष 2008 में शुरू हुई थी। करीब 18 साल बाद भी अतिथि शिक्षक अंशकालीन व्यवस्था में काम कर रहे हैं। संगठन ने सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के साथ अवकाश, मेडिकल बीमा और महिला अतिथि शिक्षकों को प्रसूति अवकाश जैसी सुविधाएं नहीं मिलने का भी आरोप लगाया। 2023 की घोषणाओं पर अमल नहीं होने का आरोप अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के मुताबिक, 2 सितंबर 2023 को भोपाल के लाल परेड मैदान में हुई अतिथि शिक्षक पंचायत में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई घोषणाएं की थीं। इनमें वार्षिक अनुबंध, बीच सत्र में बेरोजगार नहीं करने, गुरुजियों की तरह नीति बनाने और सीधी भर्ती में बोनस अंक देने की घोषणाएं शामिल थीं। संगठन का आरोप है कि तीन साल बाद भी इन घोषणाओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। अब अतिथि शिक्षक सरकार से आश्वासन के बजाय स्थायी रोजगार का आदेश जारी करने की मांग कर रहे हैं।
