Homeछत्तीसगढ़चौथे दिन शून्यकाल में धान खरीदी समेत कई मुद्दे उठे:महंत बोले-किसानों को...

चौथे दिन शून्यकाल में धान खरीदी समेत कई मुद्दे उठे:महंत बोले-किसानों को चोर समझा जा रहा हंगामे के बाद कांग्रेसी विधायक निलंबित

विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन शून्यकाल में धान खरीदी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने–सामने आ गए। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की नीति को किसान विरोधी बताते हुए इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव दिया। लेकिन आसंदी ने इसे अग्राह्य कर दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए, जिससे वे स्वमेव निलंबित माने गए। दरअसल नेता प्रतिपक्ष डा.चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव रखते हुए कहा कि धान खरीदी में सरकार की नीति पूरी तरह विफल रही है। किसानों को पहले दिन से ही चोर समझा गया, उनका पूरा धान नहीं खरीदा गया और टोकन के नाम पर परेशान किया गया। हालात अंग्रेजों के जमाने से भी बदतर हो गए हैं, इसलिए इस पर सदन में गंभीर चर्चा जरूरी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार की मंशा शुरू से साफ है कि धान और किसान पर चर्चा न हो। प्रदेश में अधिकारी राज चल रहा है। किसानों के घरों और खलिहानों में जबरन प्रवेश किया गया, टोकन मांगने पर अधिकारियों को भेजा गया और किसानों को चोर समझा गया। दावा किया कि उनके घर में भी अधिकारी बलात तरीके से घुसे थे। उमेश पटेल ने किसानों की कर्ज माफी या दोबारा खरीदी शुरू करने की मांग की। संगीता सिन्हा ने कहा कि किसानों को धान समर्पण के लिए मजबूर किया गया और बालोद जिले में पूरा धान नहीं खरीदा गया। राघवेंद्र सिंह ने जांजगीर जिले का हवाला देते हुए कहा कि किसानों की प्रताड़ना इतनी बढ़ी कि एक किसान ने जहर पी लिया और दूसरे को टावर पर चढ़ना पड़ा। ब्यास कश्यप ने बताया कि जांजगीर जिले में केवल 93% किसानों का ही धान खरीदा गया। शेष किसानों को अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ा और एफआईआर तक झेलनी पड़ी। द्वारिकाधीश यादव, रामकुमार यादव, बालेश्वर साहू और विक्रम मंडावी ने कहा कि बस्तर से सरगुजा तक किसान परेशान हैं और रकबा समर्पण व पुलिस दबाव से किसान कर्ज में डूब गए हैं। आसंदी ने कहा कि बजट सत्र में आय–व्यय पर चर्चा का प्रावधान होता है, इसलिए स्थगन स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की और वेल में पहुंच गया, जिससे कांग्रेस विधायक स्वमेव निलंबित हो गए। जेलों में 66 कैदियों की मौत का मुद्दा उठा भूपेश ने पूछा- ड्रग्स मामले में नव्या मलिक का नाम क्यों नहीं विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन छत्तीसगढ़ की जेलों में कस्टोडियल डेथ पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायकों ने इस पूरे मामले की इस पूरे मामले की सदन की समिति से जांच कराई जाए। वहीं ड्रग्स मामले में भूपेश ने पूछा कि आखिर नव्या मलिक का नाम इसमें क्यों नहीं है आखिर वह किसके साथ विदेश गई थी। सवाल के जवाब में गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच कुल 66 बंदियों की मौत हुई है। 18 प्रकरणों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 48 मामलों में जांच अभी लंबित है। कांग्रेस ने गृहमंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से वाकआउट कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार के जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मृत बंदियों के नाम और संबंधित जेलों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने कवर्धा जेल में बंद पंकज साहू और कांकेर जेल से रायपुर स्थानांतरित किए गए आदिवासी नेता जीवन ठाकुर के मामलों को उठाया और पूछा कि क्या ये दोनों प्रकरण 66 मौतों की सूची में शामिल हैं। इस पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि पंकज साहू की मृत्यु, मांगी गई अवधि से पहले की है, इसलिए उसे इस आंकड़े में शामिल नहीं किया गया। वहीं जीवन ठाकुर को न्यायालय की अनुमति से कांकेर से रायपुर लाया गया था और उनका प्रकरण 66 मामलों में शामिल है। जेल अधीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार उपचार के दौरान वे चिकित्सकीय परामर्श का पूरा पालन नहीं कर रहे थे। इसके बाद न्यायालय के निर्देश पर उनका रायपुर स्थानांतरण किया गया। बेटे को अलग रखा, विधायकों को मिलने नहीं दिया
भूपेश ने आरोप लगाया कि जीवन ठाकुर आदिवासी समाज के प्रमुख नेता थे और उन्हें जेल में समुचित इलाज नहीं मिला। गिरफ्तारी के विरोध में आदिवासी समाज ने प्रदर्शन भी किया था। कोई भी शुगर का मरीज जानबूझकर अपनी हालत क्यों बिगाड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उसी जेल में बंद उनके बेटे को पिता से अलग रखा गया, जबकि वह बेहतर देखभाल कर सकता था। कांग्रेस विधायकों को मिलने की अनुमति नहीं देने का आरोप भी लगाया गया। भूपेश बघेल ने मामले की जांच विधानसभा की समिति से कराने की मांग की और इसे ‘सरकारी हत्या’ करार दिया। एक साल में पकड़े गए तस्करों की सूची मांगी
भूपेश ने 12 महीनों में पकड़े गए अंतर्राज्यीय ड्रग तस्करों की सूची भी मांगी। इसके जवाब में मंत्री ने बताया कि ड्रग के 282 प्रकरणों में अंतर्राज्यीय मामले से जुड़े आरोपियों के नाम शामिल है। इस पर भूपेश ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जो नाम घटना के समय सुर्खियों में थे नव्या मलिक आखिर उसका नाम इसमें क्यों नहीं है। इसका विदेश से क्या कनेक्शन है? कितनी बार विदेश गई और किनके साथ गई? इसका एक साथ उत्तर दे दीजिए। सदन में गृहमंत्री ने जवाब नहीं दिया लेकिन सदन के बाहर उन्होंने बताया कि भूपेश बघेल ने अंतर्राज्यीय तस्करों की सूची मांगी थी पर जिसका नाम 2 राज्यों में नहीं होगा, उसे अंतर्राजीय कैसे कहेंगे? रही बात नाव्या मलिक की तो उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here