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पैसे नहीं थे…2 घंटे पत्नी की लाश लिए बैठा रहा:झांसी में अस्पताल के बाहर 8 साल की बच्ची रो पड़ी, बोली- मां अब तो उठ जाओ

झांसी मेडिकल कॉलेज के बाहर शुक्रवार सुबह पत्नी की लाश लेकर बैठा युवक बेबस दिखा। उसके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि पत्नी का शव घर तक ले जा सके। युवक एक ओर स्ट्रेचर पर पड़ी पत्नी और दूसरी ओर 8 साल की बेटी को देख खुद को कोस रहा था। बेटी बार-बार कह रही थी…मां बस एक बार उठ जाओ न। युवक ने लोगों से कहा- इमरजेंसी के डॉक्टर ने भी मदद नहीं की। उन्होंने कहा कि किराए की एंबुलेंस करो और पत्नी की लाश ले जाओ। करीब दो घंटे बाद एक सिपाही की नजर पड़ी तो उसने पूरा मामला समझा। फिर एक संस्था को जानकारी दी। संस्था के कोषाध्यक्ष ने 16 किमी दूर घर तक फ्री में शव भिजवाया। पति बोला- 15 दिन से बीमार थी पत्नी झांसी से सटे मध्य प्रदेश के ओरछा इलाके के नकटा गांव निवासी राहुल आदिवासी ने बताया- हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। मैं और मेरी पत्नी रामवती (35) मजदूरी करते थे। हमारे दो बेटे विजय (20), राकेश (15) और एक बेटी नंदिनी (8) हैं। करीब 15 दिन से पत्नी रामवती बीमार चल रही थी। शुक्रवार सुबह पत्नी की तबीयत अचानक से ज्यादा खराब हो गई। उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। मैं अपनी बेटी के साथ पत्नी को ओरछा सीएचसी ले गया। वहां डॉक्टरों ने झांसी ले जाने के लिए कहा। मैं ऑटो करके पत्नी को झांसी मेडिकल कॉलेज लाया। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पार्किंग में पत्नी का शव लिए बैठे रहे पति ने बताया- घर में पैसों की व्यवस्था नहीं थी। अचानक पत्नी की तबीयत खराब हुई तो पैसों का इंतजाम भी नहीं कर पाया। सोचा था कि सरकारी अस्पताल है तो पैसे नहीं लगेंगे। मगर डॉक्टर ने किराए की एंबुलेंस करके शव को घर ले जाने के लिए कहा। पैसे नहीं थे तो शव को स्ट्रेचर पर इमरजेंसी के सामने बनी पार्किंग में ले गया। वहां पर पत्नी के शव को रखकर भगवान को याद करने लगा। लगभग दो घंटे बाद एक सिपाही अजय ने हमारी मदद की। उन्होंने ही एंबुलेंस बुलाकर शव को घर भिजवाने की व्यवस्था की। संस्था के कोषाध्यक्ष बोले- गांव जाकर देखा तो परिवार की स्थिति दयनीय पार्किंग में स्ट्रेचर पर शव रखकर राहुल जमीन पर बैठ गया। जबकि उसकी बेटी मां के शव के पास खड़ी थी। उनके पास एक डॉग का बच्चा भी था। मासूम बेटी मां को बुलाते हुए रोती रही। इस दौरान बारिश भी हो रही थी। राजाराम स्वयंसेवी संस्था के कोषाध्यक्ष श्यामसुंदर शर्मा ने बताया- आज दोपहर को मेडिकल चौकी के एक सिपाही अजय का फोन आया था। उसने एक परिवार की मदद करने के लिए कहा। जब इमरजेंसी के बाहर पहुंचा तो एक युवक अपनी पत्नी की लाश रखकर बैठा था। उसके पास पत्नी की लाश घर तक ले जाने के लिए पैसे नहीं थे। पास में बैठी उसकी मासूम बच्ची रो रही थी। तब अपनी एंबुलेंस से शव को फ्री में घर तक पहुंचाया। गांव में जाकर देखा तो परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय थी। एक झोपड़ी बनाकर परिवार रह रहा है। CMS बोले- शव वाहन दिलाया जाता है, जांच कराएंगे मेडिकल कॉलेज के सीएमएस सचिन माहौर ने कहा- अस्पताल की इमरजेंसी में मरीज की मौत होने पर परिजन शव वाहन की डिमांड करते हैं। हम लोग उनको शव वाहन उपलब्ध करा देते हैं। हो सकता है कि डॉक्टर ने शव परिजनों को सौंपा हो, लेकिन परिजनों ने शव वाहन की जरूरत के बारे में डॉक्टर को न बताया हो। फिर भी हम मामले की जांच करा रहे हैं। ——————————– ये खबर भी पढ़िए- हत्या के बाद 20 दिन तक ‘जिंदा’ रहा फोटोग्राफर: प्रयागराज में मर्डर करने वाला दोस्त गर्लफ्रेंड से चैट करता रहा; शव के हाथ-पैर तोड़े थे प्रयागराज के धूमनगंज में फोटोग्राफर की हत्या के मामले में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। हत्या करने के बाद फोटोग्राफर आलोक गुप्ता (27) के तीनों दोस्त सिर्फ लाश ठिकाने लगाने तक नहीं रुके। तीनों मौत छिपाने के लिए उसके आईफोन का भी इस्तेमाल करते रहे। पुलिस के अनुसार, हत्या का मास्टरमाइंड शुभम तिवारी आलोक बनकर उसकी गर्लफ्रेंड से चैट करता रहा, जिससे किसी को उसकी मौत का शक न हो। पढ़ें पूरी खबर…

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