जिन घायल वन्यजीवों को इलाज के बाद भी जंगल में वापस छोड़ना संभव नहीं होता, उनके लिए अब जबलपुर में अलग ठिकाना तैयार होगा। नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय ने इसका विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को भेज दिया है। ये अत्याधुनिक वाइल्डलाइफ केयर, रिहैब एंड रिकवरी सेंटर होगा। विश्वविद्यालय के आमानाला स्थित फार्म की जमीन पर 8 से 10 हेक्टेयर क्षेत्र में इसे विकसित किया जाएगा। यहां करीब 20 बड़े प्राकृतिक एन्क्लोजर बनाए जाने की योजना है। इनमें एक समय में 10 बाघ और 10 तेंदुओं सहित अन्य बचाए गए वन्यजीवों को रखा जा सकेगा। एनक्लोजर का स्वरूप ऐसा रखने की योजना है कि वन्यजीवों को बाड़े के बजाय जंगल जैसा वातावरण मिले। शाकाहारी वन्य प्राणियों के लिए भी एन्कलोजर बनेंगे। इस मामले में समीता राजोरा सेन, पीसीसीएफ, वाइल्डलाइफ ने कहा कि घायल और बीमार वन्यजीवों के उपचार व लंबे समय तक देखभाल के लिए वाइल्डलाइफ केयर, रिहैब एंड रिकवरी सेंटर बनाने का प्रस्ताव आया है। इस पर काम चल रहा है। कान्हा से नौरादेही तक के वन्यजीवों को लाभ जबलपुर में केंद्र बनने से कान्हा, पेंच, बांधवगढ़, संजय और वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के साथ आसपास के वन मंडलों से रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को भी उपचार और देखभाल की सुविधा मिल सकेगी। अभी गंभीर रूप से घायल या बीमार बड़े वन्यजीवों के लिए ऐसी दीर्घकालीन व्यवस्था सीमित है। कई बार वन विहार भेजना पड़ता है या संबंधित क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों से ही देखभाल करनी पड़ती है।
