Homeमध्यप्रदेशजेवर गिरवी रखे, 22 लाख दिए फिर भी नहीं छोड़ा:दंपती को 96...

जेवर गिरवी रखे, 22 लाख दिए फिर भी नहीं छोड़ा:दंपती को 96 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, ठग बोले- तुम्हारे नाम अरेस्ट वारंट; संपत्ति सीज होगी

भोपाल के कोलार इलाके में रहने वाले बुजुर्ग दंपती को ठगों ने 3 महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी, चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर और सुप्रीम कोर्ट का जज बताया। दंपती को करोड़ों रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी। डर के कारण दंपती ने जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपए दे दिए। आरोपियों ने 7 अलग-अलग WhatsApp नंबरों का इस्तेमाल किया। दंपती को लगातार वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा गया।बुजुर्ग दंपती को ठगी का संदेह हुआ। इसके बाद साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं बुजुर्ग दंपती पुलिस के मुताबिक, कृष्णा कॉम्प्लेक्स गणपति एन्क्लेव निवासी सुवर्णा लक्ष्मी और नरसिम्हा राव मूल रूप से आंध्र प्रदेश के पलनाडू जिले के रहने वाले हैं। फरवरी में शिवरात्रि मनाने परिवार के साथ आंध्र प्रदेश गए थे। 19 मई को सुवर्णा के मोबाइल पर कॉल आया। कॉलर ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी खन्ना बताते हुए कहा कि उनके नाम गिरफ्तारी वारंट है। दिल्ली केनरा बैंक खाते से नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग केस में करोड़ों रुपए के लेनदेन का आरोप लगाया। फर्जी जज ने संपत्ति सीज करने का डर दिखाया इसके बाद वीडियो कॉल पर पूछताछ शुरू हुई। दंपती को किसी से बात करने और घर से बाहर निकलने से रोक दिया गया। 21 मई को खुद को चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताने वाली महिला ने बैंक खातों की जानकारी ली। अगले दिन वीडियो कॉल पर फर्जी जज से बात कराई गई। उसने दंपती के आधार कार्ड की जानकारी दिखाकर कार्रवाई की धमकी दी। 9 जून को फिर फर्जी जज ने संपत्ति सीज करने का आदेश सुनाया। इसके बाद निशा पटेल नाम की महिला ने दंपती को भोपाल लौटने को कहा। जेवर गिरवी रख 22 लाख जमा किए आरोपियों ने मामला खत्म करने के नाम पर एफडी और जेवर बेचने या गिरवी रखने को कहा। दंपती 10 जून को आंध्र प्रदेश से रवाना होकर 11 जून को भोपाल पहुंचे। 12 जून को जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपए जुटाए। इस दौरान आरोपियों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में पांच बार रकम जमा की। ठगों ने संपर्क के लिए 7 अलग-अलग WhatsApp नंबरों का इस्तेमाल किया। 22 लाख रुपए देने के बाद भी दंपती को नहीं छोड़ा गया। 23 अगस्त तक वीडियो कॉल के जरिए निगरानी चलती रही। बाद में संदेह होने पर दंपती ने मामले की जानकारी जुटाई तो पता चला कि सुप्रीम कोर्ट का बताया गया आदेश फर्जी था। 19 मई से 23 अगस्त तक कुल 96 दिन का यह घटनाक्रम है। 27 अगस्त को FIR दर्ज ठगी का पता चलने के बाद दंपती ने साइबर सेल में शिकायत की। 27 अगस्त को FIR दर्ज की गई। केस की डायरी कोलार थाने भेजी गई। पुलिस अब सातों WhatsApp नंबरों, वीडियो कॉल और पांच अलग-अलग खातों में हुए ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। …………………………………………. ये खबर भी पढ़ें… 33 दिन डराकर रिटायर्ड लेडी ऑफिसर से ठगे डेढ़ करोड़ ग्वालियर में स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन महिला से साइबर बदमाशों ने एक करोड़ 57 लाख 90 हजार रुपए ठग लिए। बदमाशों ने 69 वर्षीय मीनाक्षी नाखरे को टेलीकॉम डिपार्टमेंट, दिल्ली का आईपीएस अधिकारी और सीबीआई अफसर बनकर फोन किया। उन्होंने मीनाक्षी से कहा- आपके नाम से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी काम हो रहे हैं। इससे 6.80 करोड़ रुपए का अवैध ट्रांजेक्शन किया गया है।पूरी खबर पढ़ें

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here