मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने कॉन्स्टेबल (बैंड) भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू के परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है। उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने के तरीके पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। मामला याचिकाकर्ता निलेश सिंह और मध्यप्रदेश शासन के बीच है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट गगन बजाड़ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा। वहीं, शासन की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल सुदीप भार्गव उपस्थित हुए। भास्कर ने किया था स्टिंग, कोडवर्ड में डील इससे पहले भास्कर डिजिटल ने कॉन्स्टेबल (बैंड) भर्ती में सेटिंग को लेकर इन्वेस्टिगेशन किया था। इसमें चयन समिति के सदस्य इंस्पेक्टर सुनील कटारे कैमरे पर डमी कैंडिडेट का रोल नंबर नोट करते और कोडवर्ड में रकम की डील करते नजर आए थे। डमी कैंडिडेट के सिलेक्शन की जुगाड़ के लिए रिपोर्टर ने कटारे से चार बार मुलाकात की थी। वह हर बार रकम सीधे मांगने के बजाय कोडवर्ड का इस्तेमाल किया। चौथी मुलाकात में कटारे पुलिस की वर्दी में मिले। बातचीत में ‘5 बजे की ट्रेन’ और ‘4 बजे की ट्रेन’ जैसे कोड सामने आए थे। 2 राउंड पास किए, तीसरे राउंड के इंटरव्यू में नहीं बुलाया भास्कर डिजिटल के स्टिंग के बाद निलेश सिंह ने 21 अगस्त 2026 को याचिका लगाई गई थी। कोर्ट को बताया था कि उन्होंने कॉन्स्टेबल (बैंड) पद की चयन प्रक्रिया के पहले और दूसरे राउंड को सफलतापूर्वक पूरा किया था। इसके बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया के तीसरे राउंड यानी इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने यह भी कहा कि विभाग ने अब तक पात्र उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक नहीं की है। भर्ती विज्ञापन में पदों की संख्या के तीन गुना उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने का जिक्र किया गया था। हालांकि, आरोप है कि केवल पदों की संख्या के दो गुना उम्मीदवारों को ही इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से उन्हें भी इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की। सरकार ने कहा- तय प्रक्रिया के तहत बुलाए उम्मीदवार राज्य सरकार ने याचिका का विरोध किया। शासन की ओर से कहा गया कि भर्ती के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। सरकार ने यह भी दलील दी कि इंटरव्यू पहले ही आयोजित किए जा चुके हैं। ऐसे में अब याचिकाकर्ता को इंटरव्यू में शामिल होने का निर्देश देना उचित नहीं होगा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इंटरव्यू के लिए उम्मीदवारों को बुलाने में अपनाई गई प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह का समय दिया कोर्ट ने राज्य के एडवोकेट को इंटरव्यू के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया और पात्र उम्मीदवारों की सूची के संबंध में सरकार से आवश्यक निर्देश लेने को कहा है। इसके लिए कोर्ट ने एक सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने फिलहाल इंटरव्यू के परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। तब तक भर्ती के इंटरव्यू के परिणाम घोषित नहीं किए जा सकेंगे। ……………………………….. यह खबर भी पढ़ें 5 बजे की ‘ट्रेन’ से पुलिस बैंड ‘नौकरी का टिकट’! हर कैंडिडेट को एक नंबर दिया जाता है। किसे कौन सा नंबर मिला, यह सिर्फ PHQ को पता रहता है। इसलिए गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं। यह दावा विशेष सशस्त्र बल (SAF) के एडीजी चंचल शेखर का है। वे मध्य प्रदेश पुलिस बैंड की भर्ती प्रक्रिया को फुलप्रूफ और पारदर्शी बताते हैं, लेकिन दैनिक भास्कर के इन्वेस्टिगेशन में तस्वीर कुछ और सामने आई। पढ़ें पूरी खबर…
