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इंदौर में इंटरनेशनल स्विमिंग कोच के साथ धोखा:तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के टेंडर के लिए सौंपे दस्तावेजों से हथिया लिया IDA का ठेका

इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी (IDA) के स्विमिंग पूल संचालन के टेंडर में दिल्ली के रिटायर्ड इंटरनेशनल स्विमिंग कोच मुकुंद मोहन शर्मा के शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेजों के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। कोच का आरोप है कि उन्होंने ये दस्तावेज फरवरी 2023 में दिल्ली के तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के टेंडर के लिए देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट को दिए थे। बाद में उनकी अनुमति के बिना उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल इंदौर में आईडीए का स्विमिंग पूल संचालन हासिल करने के लिए कर लिया गया। उन्होंने इंदौर आकर पुलिस कमिश्नर से शिकायत की है। अब क्राइम ब्रांच मामले में जल्द FIR दर्ज की तैयारी कर रही है। शर्मा ने संबंधित टेंडर निरस्त करने, संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। खास बात यह है कि 3 साल बाद फरियादी को पता चला कि उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर आईडीए का टेंडर हासिल कर लिया गया। इसकी शिकायत के बाद आईडीए और क्राइम ब्रांच कर रहा है। तालकटोरा के टेंडर के लिए दिए थे दस्तावेज शर्मा ने बताया कि वे वर्ष 2022 में अपने छात्र संदीप तोकस के माध्यम से देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट, इंदौर से जुड़े थे। इसके बाद 21 फरवरी 2023 को उन्होंने अपने शैक्षणिक और पेशे से जुड़े दस्तावेज संस्था के डायरेक्टर देवेंद्र लांबा और उनकी पत्नी मधुलिका को दिए थे। उनका कहना है कि ये दस्तावेज केवल नई दिल्ली के तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के स्विमिंग पूल टेंडर में भाग लेने के लिए दिए गए थे। बाद में यह टेंडर निरस्त हो गया। शर्मा का दावा है कि इसके बाद उन्होंने अपने दस्तावेज किसी अन्य सरकारी, अर्द्धसरकारी या निजी संस्था के टेंडर में इस्तेमाल करने की कोई अनुमति नहीं दी थी। आरोप- बिना अनुमति IDA का टेंडर हासिल करने में इस्तेमाल किए दस्तावेज शर्मा का आरोप है कि बाद में उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल IDA के स्विमिंग पूल संचालन का टेंडर हासिल करने के लिए किया गया। उनके अनुसार, 8 सितंबर 2023 को IDA का अनुबंध हासिल किया गया। शर्मा का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में उनसे न तो अनुमति ली गई और न ही उनकी लिखित सहमति ली गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर में जिन छात्रों से संबंधित दस्तावेज लगाए गए, वे कभी देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट से जुड़े ही नहीं थे। जनवरी में मिली जानकारी, IDA को भेजी शिकायत शर्मा के मुताबिक उन्हें मामले की जानकारी 3 साल बाद जनवरी 2026 में एक परिचित के माध्यम से जानकारी मिली कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल इंदौर के IDA टेंडर में किया गया है। इसके बाद उन्होंने IDA के CEO को ई-मेल के जरिए शिकायत की। शिकायत का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने लिखित शिकायत के साथ शपथपत्र भी दिया। शर्मा का आरोप है कि इसके बावजूद मामले में कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई। 25 फरवरी को ई-मेल, 7 मार्च को रिमाइंडर
25 फरवरी 2026 को IDA को ई-मेल भेजकर दस्तावेजों के कथित गलत इस्तेमाल की जानकारी दी थी। 7 मार्च 2026 को रिमाइंडर भी भेजा। कई महीने बीतने के बाद भी उन्हें जांच या कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने IDA को लिखित शिकायत और एफिडेविट दिया। अब मामला पुलिस की क्राइम ब्रांच तक पहुंच गया है। दूसरे शहरों के टेंडर में भी दस्तावेज इस्तेमाल होने की आशंका शर्मा ने आशंका जताई है कि उनके शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेजों का इस्तेमाल अन्य शहरों में स्विमिंग पूल के टेंडर, लाइसेंस या परमिट हासिल करने के लिए भी किया गया हो सकता है। उन्होंने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के लखनऊ स्थित रीजनल सेंटर के स्विमिंग पूल का उल्लेख करते हुए वहां भी अपने दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच कराने की मांग की है। देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट के संचालक देवेंद्र लांबा ने मुकुंद मोहन शर्मा की ओर से लगाए गए आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। उनका कहना है कि वे इस मामले में क्राइम ब्रांच को अपना जवाब दे चुके हैं। जांच के दौरान संबंधित दस्तावेज और अंडरटेकिंग भी उपलब्ध करा दी जाएगी। लांबा के मुताबिक मुकुंद मोहन शर्मा पहले उनके संस्थान से जुड़े हुए थे और उनके शैक्षणिक योग्यता तथा उपलब्धियों से संबंधित दस्तावेज संस्था के रिकॉर्ड में उपलब्ध थे। उनका कहना है कि किसी कर्मचारी या कोच के संस्थान से जुड़ने के दौरान उसकी योग्यता और उपलब्धियों से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड में रखना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि मामले में क्राइम ब्रांच में शिकायत के बाद संस्था की ओर से जवाब दिया जा चुका है और लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उनके मुताबिक देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हेड ऑफिस गुरुग्राम में है और देश के अलग-अलग स्थानों पर उसके कई सेंटर हैं। टेंडर प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि हेड ऑफिस द्वारा की जाती है। आईडीए ने कहा-जांच की जा रही है डॉ. परीक्षित झाडे (CEO,IDA) ने बताया कि इस मामले में उन्हें मुकुंद मोहन शर्मा की ओर से शिकायत मिली है। विभाग द्वारा इसकी जांच की जा रही है। गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधितों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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