हर कैंडिडेट को एक नंबर दिया जाता है। किसे कौन सा नंबर मिला, यह सिर्फ PHQ को पता रहता है। इसलिए गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं। यह दावा विशेष सशस्त्र बल (SAF) के एडीजी चंचल शेखर का है। वे मध्य प्रदेश पुलिस बैंड की भर्ती प्रक्रिया को फुलप्रूफ और पारदर्शी बताते हैं, लेकिन दैनिक भास्कर के इन्वेस्टिगेशन में तस्वीर कुछ और सामने आई। इसी भर्ती के प्रभारी और चयन समिति के सदस्य सुनील कटारे कैमरे पर डमी कैंडिडेट का रोल नंबर नोट करते और कोडवर्ड में रकम की डील करते दिखे। डमी कैंडिडेट के सिलेक्शन की जुगाड़ के लिए रिपोर्टर ने कटारे से चार बार मुलाकात की। हर बार रकम सीधे मांगने के बजाय कोडवर्ड का इस्तेमाल हुआ। चौथी मुलाकात में कटारे पुलिस की वर्दी में मिले। बातचीत में ‘5 बजे की ट्रेन’ और ‘4 बजे की ट्रेन’ जैसे कोड सामने आए, जिन्हें संदर्भ के आधार पर क्रमशः 5 लाख और 4 लाख रुपए की रकम के संकेत के तौर पर समझा जा सकता है। एक तरफ भर्ती प्रक्रिया को ‘फुलप्रूफ’ बताया गया, दूसरी तरफ कैमरे पर रकम और डमी कैंडिडेट के रोल नंबर से जुड़ी बातचीत सामने आई। आखिर पुलिस बैंड भर्ती में जुगाड़ और रकम का यह खेल कैसे चल रहा था? पढ़िए दैनिक भास्कर का यह इन्वेस्टिगेशन…. ऐसे तैयार हुआ डमी कैंडिडेट और शुरू हुई पड़ताल दैनिक भास्कर को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि पुलिस आरक्षक बैंड भर्ती में गड़बड़ियां हो रही हैं। आरोप था कि वादन प्रदर्शन (म्यूजिक टेस्ट) के दौरान योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर चहेतों को चयन का मौका दिया जा रहा है। नौकरी के नाम पर अभ्यर्थियों से रकम मांगे जाने की शिकायतें थीं। इन शिकायतों की सच्चाई जानने के लिए भास्कर ने एक डमी कैंडिडेट तैयार किया। 4 मुलाकातें और दरगाह के पास डील की पूरी कहानी पहला दिन (18 अगस्त): ‘नंबर पर बात नहीं करते, मैं खुद कॉल करूंगा’ रिपोर्टर अभ्यर्थी का रिश्तेदार बनकर लाल परेड मैदान पहुंचा। वहां से उसे पुलिस बैंड स्कूल भेजा गया। बैंड प्रभारी सुनील कटारे सरकारी जीप के पास मिले। कटारे: आपको मेरे बारे में किसने बताया?
रिपोर्टर: नरसिंहगढ़ में हमारे रिश्तेदार हैं, जो पुलिस बैंड में थे। पूछते-पूछते आ गए। क्या दूसरी लिस्ट आएगी?
कटारे: संभावनाएं कम हैं। इसके बाद कटारे ने डायरी निकालकर रिपोर्टर का मोबाइल नंबर लिखा और एडमिट कार्ड मांगा। रिपोर्टर ने उनका नंबर मांगा तो कटारे ने कहा- ‘नहीं… नहीं, नंबर पर बात नहीं करते। मैं खुद आपको कॉल कर लूंगा। अगर, लाइन मिलेगी तो फोन लगा दूंगा। दूसरा दिन (19 अगस्त): दरगाह के सामने ‘ट्रेन’ का कोड अगले दिन दोपहर में कटारे के दफ्तर पर ताला था। शाम को रिपोर्टर ने उनके नंबर पर कॉल किया, लेकिन उन्होंने बात टाल दी। कुछ देर बाद कटारे ने खुद वॉट्सऐप कॉल कर कहा- ‘कहां बैठे हो तुम? उस नंबर पर फोन मत लगाना। दरगाह के सामने मिलो।’ रिपोर्टर पीएचक्यू के सामने स्थित दरगाह पहुंचा। कटारे सरकारी गाड़ी से आए और खिड़की के पास बुलाकर बातचीत की। रिपोर्टर: साहब, व्यवस्था कितनी करनी पड़ेगी? कटारे: 5 बजे की ट्रेन का बोल दो। रिपोर्टर: 4 की बोल दूं? कटारे: सामने वाले (कैंडिडेट) को बुला लो। जैसे तुम्हें देख लिया, उसे भी देख लूंगा। आमने-सामने बात कर लेंगे। अब इस नंबर को सेव मत करना, सिर्फ वॉट्सऐप कॉल करना। तीसरा दिन (20 अगस्त की रात): ‘मेरी रिकॉर्डिंग तो नहीं कर रहे?’ रात करीब 8:30 बजे रिपोर्टर डमी कैंडिडेट को लेकर दरगाह के पास पहुंचा। कटारे सरकारी गाड़ी से आए और कैंडिडेट का नाम व ट्रेड पूछा। इससे पहले फोन पर रिपोर्टर ने सीधे पूछा था कि कितना पैसा लगेगा? रकम पूछे जाने पर कटारे नाराज हुए। आमने-सामने मुलाकात में उन्होंने कहा- कटारे: तुम फोन पर बात करते हुए मेरी रिकॉर्डिंग कर रहे थे? क्या बिगाड़ लोगे मेरा? रिपोर्टर: आप फोन चेक कर लो साहब, हम तो गांव के लोग हैं। फोन देखने के बाद कटारे शांत हुए और अगले दिन सुबह एडमिट कार्ड लेकर आने को कहा। चौथा दिन (21 अगस्त की दोपहर): वर्दी में नोट किया रोल नंबर अगले दिन दोपहर रिपोर्टर फिर दरगाह के पास पहुंचा। करीब एक घंटे बाद कटारे वर्दी में सरकारी जीप से पहुंचे। उन्होंने डमी कैंडिडेट का एडमिट कार्ड देखा और उसका नाम, रोल नंबर व मोबाइल नंबर अपनी डायरी में नोट किया। कटारे: कोई रिकॉर्डिंग तो नहीं कर रहे हो? ऐसी कोशिश मत करना। मुझे कॉल मत करना, मैं खुद बता दूंगा। सब हो जाएगा, देख लेंगे। सवाल: जिस भर्ती प्रक्रिया में कैंडिडेट की पहचान गोपनीय रखने का दावा किया गया था, उसमें कटारे ने डमी कैंडिडेट का नाम, रोल नंबर और मोबाइल नंबर अपनी डायरी में क्यों नोट किया? भर्ती प्रक्रिया पर उठ रहे 6 गंभीर सवाल भ्रष्टाचार के आरोपों के अलावा भर्ती प्रक्रिया के नियमों और सूची में भी कई ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जो इसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं भर्ती पर सवाल, जिम्मेदारों का जवाब और अभ्यर्थियों की शिकायत चंचल शेखर( एडीजी, एसएएफ): ‘पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है’ हमने सामान्य वर्ग के लिए 50% और आरक्षित वर्ग के लिए 40% न्यूनतम अंक तय किए थे। जब अभ्यर्थी ये अंक हासिल नहीं कर पाए, तो सिर्फ कोटा पूरा करने के लिए अयोग्य अभ्यर्थियों को कैसे बुलाते? EWS को अतिरिक्त छूट देने से योग्यता प्रभावित होती। पूरी प्रक्रिया कोड नंबर से लॉक है, इसलिए गड़बड़ी की कोई आशंका नहीं है। जो अभ्यर्थी फेल होते हैं, वे ऐसे सवाल उठाते हैं। डीपी सागर (रिटायर्ड पुलिस बैंड ट्रेनर): ‘अयोग्य को योग्य घोषित किया’ मैंने खुद 31 अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग देकर तैयार किया था। जिन्हें वास्तव में बैंड बजाना आता था, उन्हें बाहर कर दिया गया, जबकि जिन्हें ठीक से बजाना भी नहीं आता था, उन्हें योग्य घोषित कर दिया गया। सुमित मालवीय (अभ्यर्थी): ‘मैंने पुलिस बैंड की प्रैक्टिस की थी’ मैं मंदिर में नगाड़ा बजाता हूं और एक साल से बैंड का अभ्यास कर रहा था। मैंने फीस जमा कर आवेदन किया, लेकिन मुझे परीक्षा के लिए बुलाया तक नहीं गया। मेरे लिए यह भर्ती प्रक्रिया तो पारदर्शी नहीं रही।
