नीमच जिले की जीरन तहसील से 5 किलोमीटर दूर स्थित प्राचीन गांव बमोरा में रविवार को सावन की नवमी के मौके पर सदियों पुरानी ब्रह्मभोज की परंपरा निभाई गई। गांव की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए ग्रामीणों ने मिलकर इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस आयोजन में पूर्वजों के तय किए गए 40 गांवों से आए करीब 3000 से 3500 ब्राह्मणों को परिवार सहित आदर-सत्कार के साथ भोजन कराया गया। गांव के बुजुर्गों और पंडित शिव बैरागी के मुताबिक, बमोरा का इतिहास करीब 600 साल पुराना है। पूर्वजों की शुरू की गई यह ब्रह्मभोज की प्रथा पिछले 110 से ज्यादा सालों से बिना रुके लगातार चली आ रही है। पूरा गांव रखता है उपवास, मेहमानों की सेवा में जुटता है हर नागरिक इस दिन की सबसे अनोखी बात यह है कि जब तक मेहमान भोजन नहीं कर लेते, तब तक गांव का कोई भी व्यक्ति (बच्चा, बुजुर्ग या महिला) खाना नहीं खाता। पूरा गांव मेहमानों की सेवा में लगा रहता है। ब्राह्मणों के भोजन के बाद बचे हुए प्रसाद को पूरे गांव में बांटा जाता है, जिसे खाकर ही लोग अपना व्रत खोलते हैं। 600 साल पुराना इतिहास, आज बन चुका है समृद्ध गांव गुजरात से आए पूर्वजों ने शिव मंदिर के पास पड़ाव डालकर इस गांव को बसाया था। कभी महज 4-5 लोगों से शुरू हुआ यह गांव आज 300 परिवारों और 2200 की आबादी वाला समृद्ध इलाका बन चुका है। यहां के लोग आधुनिक खेती, मसाला उद्योग, कच्ची घानी तेल और सरकारी नौकरियों के जरिए गांव की तरक्की में योगदान दे रहे हैं।
