छत्तीसगढ़ राज्य की वन सीमा पार कर अनूपपुर वन मंडल में प्रवेश करने वाले दो हाथियों का समूह रविवार दोपहर चोलना के जंगल से धनगवां के जंगल पहुंच गया। धनगवां हाथियों का पुराना रहवास स्थल है, जहां उन्होंने फिर से डेरा जमाया है। हाथियों के धनगवां जंगल में पुनः आगमन से आसपास के ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ गई हैं। वन विभाग की टीम ने गांवों के साथ-साथ हाथियों पर निगरानी के लिए अमला बढ़ा दिया है। दो स्थानों में गश्त जारी वन परिक्षेत्राधिकारी जैतहरी विवेक मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में दो स्थानों पर निगरानी की जा रही है। सीमा के भीतर पहुंचे हाथियों की निगरानी धनगवां के जंगल में हो रही है, जबकि जैतहरी की सीमा से लगे छत्तीसगढ़ राज्य के मरवाही स्थित सिवनी के जंगल पर भी नजर रखी जा रही है। लगातार बारिश के कारण निगरानी में परेशानी आ रही है, लेकिन वनकर्मी मुस्तैद हैं। मिश्रा ने यह भी बताया कि वर्तमान में एक अन्य एक दांत वाला हाथी सीमा पर विचरण कर रहा है, जिसके कभी भी अनूपपुर वन सीमा में प्रवेश करने की आशंका है। यह हाथी पिछले कई दिनों से मरवाही वन परिक्षेत्र के घुसरिया बीट अंतर्गत चरचेड़ी गांव में उत्पात मचा रहा है और किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंचाते हुए घुसरिया बीट के लेगरा पहाड़ जंगल में ठहरा हुआ है। इन गांवों में पहुंचे हाथी रविवार शाम को दोनों हाथी जंगल से निकलकर ग्राम पंचायत पड़रिया के चोई गांव अंतर्गत भलुवान टोला, चौधरी टोला और पडमनिया टोला में ग्रामीणों के खेतों में लगी फसलों को खाते हुए आमापानी के जंगल की ओर बढ़े। हालांकि, वन विभाग का कहना है कि हाथी आसपास के क्षेत्रों में विचरण के लिए जाते हैं, लेकिन सुबह तक धनगवां के जंगल में लौट आते हैं। गश्ती दल दोनों हाथियों के विचरण पर निरंतर निगरानी रख रहा है। ग्रामीण जनों को सचेत और सतर्क रहने, हाथियों के साथ किसी भी तरह की छेड़खानी न करने और कच्चे घरों में रहने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित रहने के लिए पक्के घरों में जाने की अपील की गई है।
