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गुजरात मॉडल के नाम पर दवा सप्लाई-मैनेजमेंट व्यवस्था में बदलाव:अस्पतालों तक बिना खर्च पहुंचती थी दवाएं, अब निजी कंपनी पर 200 करोड़ खर्च होंगे

मध्यप्रदेश के 18 मेडिकल कॉलेज, 55 जिला अस्पताल, 160 सिविल अस्पताल और 350 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक दवाइयों और चिकित्सा सामग्री की सप्लाई, वेयरहाउस मैनेजमेंट का जो काम स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी बिना किसी खर्च के करते थे, वह काम अब गुजरात की एक निजी कंपनी को 10 साल के लिए सौंप दिया है। इस व्यवस्था पर हर साल 20 से 30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यानी अगले 10 साल में सरकार करीब 200 करोड़
रुपए चुकाएगी। हालांकि सरकार का दावा है कि इससे सप्लाई व्यवस्था पारदर्शी और तेज होगी। नई व्यवस्था में गुजरात मॉडल की तर्ज पर कंपनी को 4 से 6 महीने का बफर स्टॉक बनाए रखना होगा, ताकि इमरजेंसी दवाओं की कमी न हो। दवाओं की पैकेजिंग, स्टॉक रिकॉर्ड, सुरक्षित परिवहन और समय पर आपूर्ति की जिम्मेदारी भी उसी की होगी। टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है, पूरी सप्लाई चेन होगी पारदर्शी अब दवा सप्लाई और उसके स्टोरेज का पूरा काम एक निजी एजेंसी संभालेगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अगले चार से छह महीने के भीतर कंपनी अपने वेयरहाउस स्थापित कर काम शुरू कर देगी।
मयंक अग्रवाल, महाप्रबंधक, एमपीपीएचएससीएल

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