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नई नजर से देखिए भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया:6 रियासतें पहली बार एक साथ, यही है ग्रेटर भोपाल

सच्ची बात, बेधड़क। दैनिक भास्कर भोपाल संस्करण के 68 वर्ष पूरे होने पर हम 11 दिन तक हर सुबह भोपाल की नई कहानी, अनदेखे पहलू की एक विशेष श्रृंखला लेकर आए हैं। पढ़िए आज की कहानी भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया 6 रियासतों को मिलकर बन रहा.. इनमें दो राजपूत, दो मराठा, एक मुस्लिम और एक अंग्रेजों के शासन वाली, पहली बार भोपाल, ग्वालियर, नरसिंहगढ़, राजगढ़, देवास और सेंट्रल प्रोविन्स एक साथ आएंगी… आजादी के बाद मध्य भारत का भूगोल पहली बार एक नए विकास मानचित्र पर आकार ले रहा है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया के गठन से केवल छह जिले ही नहीं, बल्कि भोपाल, ग्वालियर, नरसिंहगढ़, राजगढ़, देवास और अंग्रेजों के सेंट्रल प्रोविन्स की ऐतिहासिक विरासत भी एक ही महानगरीय ढांचे में जुड़ रही है। अब इस पूरे क्षेत्र के विकास को अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों के बजाय एक क्षेत्रीय दृष्टि से देखा जाएगा। मकसद सिर्फ भोपाल शहर का विस्तार नहीं, बल्कि पूरे इलाके को आर्थिक, सामाजिक व शहरी विकास की एकीकृत दिशा देना है। जहां कभी रियासतों की सीमाएं मध्य भारत की राजनीति तय करती थीं, अब वही भूगोल विकास की नई इबारत लिखने जा रहा है। यही है ग्रेटर भोपाल। भास्कर एक्सप्लेनर 1778 : भोपाल अंग्रेजों का साथी बना पहले अंग्रेज-मराठा युद्ध (1778) के दौरान ब्रिटिश जनरल थॉमस गोडार्ड की सेना को दक्कन पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ते की जरूरत थी। मराठों के दबदबे के बीच भोपाल नवाब हयात मोहम्मद खान ने बिना औपचारिक संधि के अंग्रेजों को सुरक्षित मार्ग, रसद और सुरक्षा उपलब्ध कराई। यहीं से अंग्रेजों ने मध्य भारत में भोपाल के सामरिक महत्व को समझा। 1818: सीहोर में अंग्रेजों का कंट्रोल रूम 26 फरवरी 1818 को रायसेन में ईस्ट इंडिया कंपनी और नवाब नजर मोहम्मद खान के बीच संधि हुई। बाहरी सुरक्षा अंग्रेजों ने संभाली, नवाब को आंतरिक शासन की स्वतंत्रता मिली। अंग्रेजों ने सीहोर को सैन्य छावनी बनाया। यहां से आसपास की रियासतों की निगरानी होती थी। 1861 : इनाम में मिला बैरसिया 1857 के विद्रोह में सिकंदर बेगम ने अंग्रेजों का साथ दिया। विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने धार रियासत से बैरसिया परगना लेकर 7 जनवरी 1861 को इसे सिकंदर बेगम को सौंप दिया।1884 में शुरू हुई इटारसी-भोपाल-भिलसा (विदिशा) रेलवे लाइन बनी। तब विदिशा ग्वालियर रियासत का हिस्सा था। इन्हीं को मिलाकर क्यों बना? 1. सैकड़ों का रोज भोपाल आना-जाना सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम से हर दिन बड़ी संख्या में लोग नौकरी, पढ़ाई, इलाज, कारोबार और सरकारी कामों के लिए भोपाल आते हैं। लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी जिला सीमा से नहीं, बल्कि भोपाल से जुड़ी है। 2. विकास की चुनौतियां भी साझा हैं 2031 तक भोपाल की आबादी करीब 36 लाख होने का अनुमान है। शहर नगर निगम की सीमा से आगे कई जिलों तक फैल चुका है। नई कॉलोनियों, औद्योगिक क्षेत्रों और सड़क नेटवर्क के विस्तार के कारण सड़क, परिवहन, जलापूर्ति, पर्यावरण और भूमि उपयोग जैसी योजनाओं के लिए एकीकृत नियोजन जरूरी माना गया।। 3. प्रशासनिक जुड़ाव पहले से मौजूद भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़ और विदिशा पहले से भोपाल संभाग का हिस्सा हैं और भोपाल इसका मुख्यालय है। यानी इन जिलों के बीच प्रशासनिक समन्वय पहले से मौजूद है। 4. इनके उद्योग पहले से जुड़े हुए गोविंदपुरा, मंडीदीप, बगरोदा, पीलूखेड़ी और बुदनी जैसे औद्योगिक क्षेत्र अलग-अलग जिलों में हैं, लेकिन उनकी सप्लाई चेन, कामगार, परिवहन और बाजार एक-दूसरे से जुड़े हैं। वो सबकुछ जो आपको जानना जरूरी मास्टर प्लान : क्या पूरे क्षेत्र का एक बनेगा? पूरे एरिया का एक मास्टर प्लान, इसी के हिसाब से शहरों के बनेंगे भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में पूरे क्षेत्र के लिए एक मास्टर प्लान बनेगा। यही तय करेगा कि कहां कॉलोनियां बसेंगी, उद्योग लगेंगे, सड़कें और फ्लाईओवर बनेंगे तथा सार्वजनिक परिवहन का विस्तार कैसे होगा। Q. तो जिलों के मास्टर प्लान का क्या होगा? – जरूरत पड़ने पर किसी शहर या इलाके का अलग एरिया डेवलपमेंट प्लान बनाया जा सकेगा, पर उसे मुख्य मास्टर प्लान के अनुरूप ही रखना होगा। यानी स्थानीय जरूरतें पूरी होंगी, लेकिन पूरी योजना एक ही दिशा में चलेगी। Q. इसमें जनता की क्या भूमिका होगी? ड्राफ्ट प्लान पहले राजपत्र और अखबारों में प्रकाशित होगा। इसकी प्रतियां विकास प्राधिकरण, कलेक्टर, टीएंडसीपी और स्थानीय निकायों के कार्यालयों में रखी जाएंगी, ताकि नागरिक बिना आरटीआई इसे देख सकें, राय दे सकें। ड्राफ्ट जारी होने के बाद 30 दिन तक सुझाव-आपत्तियां ली जाएंगी। सुनवाई 5 सदस्यीय समिति करेगी। जरूरत हो तो वीडियोग्राफी होगी। लैंड यूज : कृषि भूमि पर कॉलोनी कितना आसान? 100 एकड़ से कम पर नहीं बदलेगा लैंड यूज, 15% विकास शुल्क भी खेती की जमीन का उपयोग बदलने के लिए कम से कम 40 हेक्टेयर (100 एकड़) का एकमुश्त और जुड़ा हुआ भूखंड जरूरी होगा। मकसद अनियोजित छोटी कॉलोनियों की बजाय बड़े और नियोजित विकास को बढ़ावा देना है। Q. लैंड यूज बदलने में कितना खर्च आएगा? निवेश योजना में संशोधन के लिए ₹25 हजार/हेक्टेयर, एरिया डेवलपमेंट प्लान में 10 हजार/हेक्टेयर आवेदन शुल्क। सिंचित कृषि भूमि का लैंड यूज बदलने पर कलेक्टर गाइडलाइन का 15% डेवलपमेंट लेवी (विकास शुल्क) देना होगा। उदाहरण: यदि किसी सिंचित जमीन की कलेक्टर गाइडलाइन कीमत ₹2 करोड़ है तो लैंड यूज बदलने के लिए केवल डेवलपमेंट लेवी के रूप में ₹30 लाख (15%) देने होंगे। इसके अलावा आवेदन शुल्क अलग से लगेगा। Q. बीएमआर में शामिल होते ही गांव की जमीन शहरी हो जाएगी? – नहीं। महानगर क्षेत्र में आने से जमीन का उपयोग अपने-आप नहीं बदलेगा। वह मास्टर प्लान और क्षेत्र विकास योजना के अनुसार ही तय होगा। स्थानीय निकाय : इनके हक सीमित हो जाएंगे? स्थानीय काम पहले जैसे होंगे… बड़े प्रोजेक्ट महानगर स्तर पर नगर निगम, पालिका और ग्राम पंचायतों के अधिकार खत्म नहीं होंगे। वे पहले की तरह स्थानीय नागरिक सुविधाएं और रोजमर्रा के प्रशासनिक काम संभालेंगे। Q. फिर महानगर प्राधिकरण क्या करेगा? – रिंग रोड, औद्योगिक कॉरिडोर, बड़ी जलापूर्ति और अन्य बहु-जिला परियोजनाओं की योजना और समन्वय महानगर स्तर पर किया जाएगा। Q. स्थानीय निकायों की भूमिका क्या रहेगी? – महानगर नियोजन समिति में 45 सदस्य होंगे। इनमें 30 सदस्य नगर निगम, नगर पालिका और ग्राम पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधि होंगे। Q. क्या सीहोर, रायसेन व विदिशा जैसे शहर भोपाल में मिल जाएंगे? – नहीं। जिले और स्थानीय निकाय पहले जैसे ही रहेंगे। बदलाव सिर्फ इतना होगा कि सड़क, सार्वजनिक परिवहन, औद्योगिक क्षेत्र और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे महानगर क्षेत्र को एक इकाई मानकर योजना के तहत होंगे। ट्रैफिक : क्षेत्रीय परिवहन पर क्या असर? अब मेट्रो, बस, रेलवे और हाईवे की योजना अलग-अलग नहीं बनेगी… एकीकृत महानगर परिवहन प्राधिकरण (यूएमटीए) बनेगा। उद्देश्य सड़क, बस, मेट्रो, रेलवे से जुड़े फैसलों को एक ही मंच पर लेना है। Q. इससे क्या फायदा होगा? – अभी मेट्रो, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, रेलवे, एमपीआरडीसी, NHAI अपनी-अपनी योजनाएं बनाते हैं। कई बार तालमेल न होने से परियोजनाएं प्रभावित होती हैं। यूएमटीए में सभी एजेंसियां मिलकर योजना बनाएंगी। Q. भोपाल में इसका असर कहां दिख सकता है? – मान लीजिए मेट्रो स्टेशन तो बन गया, पर वहां तक बस नहीं पहुंचती या पार्किंग और सड़क का तालमेल नहीं है। यूएमटीए का उद्देश्य ऐसी कमियां दूर करना है। भविष्य में मेट्रो विस्तार में आसानी होगी। Q. नई कॉलोनियों पर इसका क्या असर होगा? – नई कॉलोनियां, टाउनशिप और व्यावसायिक क्षेत्र मुख्य सड़क, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को ध्यान में रखकर विकसित होंगे। जानिए कैसा है भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र? क्षेत्रफल में सीहोर सबसे बड़ा जिला, लेकिन आबादी में भोपाल का सबसे बड़ा हिस्सा 62 लाख आबादी, 12 हजार वर्ग किमी क्षेत्र… देश का तीसरा सबसे बड़ा महानगर सीहोर सबसे बड़ा जिला है। अकेले इसका हिस्सा बीएमआर के 27% क्षेत्रफल में है, जबकि भोपाल केवल 19% क्षेत्रफल में फैला है। आबादी का सबसे बड़ा केंद्र भोपाल है। कुल आबादी का लगभग आधा (49%) हिस्सा अकेले भोपाल में रहता है। सीहोर, राजगढ़ और रायसेन मिलकर बीएमआर का 70% क्षेत्रफल घेरते हैं, लेकिन इनकी संयुक्त आबादी 25.4 लाख है। यानी विकास की सबसे अधिक संभावनाएं इन्हीं जिलों में हैं। भोपाल-रायसेन औद्योगिक धुरी सबसे मजबूत आर्थिक ताकत है। अकेले भोपाल और रायसेन में 5 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र स्थित हैं। सीहोर, राजगढ़ व नर्मदापुरम में एग्रो प्रोसेसिंग, फार्मा और नए औद्योगिक क्षेत्रों के कारण उद्योगों का विस्तार राजधानी से बाहर भी हो रहा है। (पार्ट 8 में पढ़िए कल की कहानी)

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