सच्ची बात, बेधड़क। दैनिक भास्कर भोपाल संस्करण के 68 वर्ष पूरे होने पर हम आज से 11 दिन हर सुबह भोपाल की नई कहानी, अनदेखे पहलू की एक विशेष श्रृंखला लेकर आए हैं। अगले 11 दिनों तक हम आपको भोपाल के सबसे बड़े बदलावों, शहर को जीवन देने वाली धरोहरों पर विशेषज्ञों के मंथन, पुराने दस्तावेजों और दुर्लभ अभिलेखों की पड़ताल से निकले अनकहे सच, तथ्यों पर आधारित एक्सक्लूसिव खुलासों और दुर्लभ तस्वीरों के संग्रह से रूबरू कराएंगे। पढ़िए आज की कहानी… भोपाल अब देश की टॉप-10 स्पोर्ट्स सिटीज में शामिल होने से चंद कदम दूर है। यह उन चुनिंदा शहरों में होगा, जहां एक साथ कई खेलों के बड़े राष्ट्रीय आयोजन कराए जा सकें। नाथूबरखेड़ा में बन रहा 140 एकड़ का इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स राजधानी को पहली बार ऐसा मल्टी-स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर देगा, जहां एथलेटिक्स, हॉकी, क्रिकेट, फुटबॉल, तैराकी, जिम्नास्टिक्स और इंडोर खेलों के लिए अलग-अलग स्टेडियम और प्रशिक्षण सुविधाएं एक ही परिसर में होंगी। इनमें से कई का निर्माण चल रहा है, जबकि कुछ का निर्माण बाकी है। अभी मप्र में ऐसा कोई स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स नहीं है, जहां इतनी खेल सुविधाएं एक साथ हों। नाथूबरखेड़ा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को पहला अंतरराष्ट्रीय आयोजन भी मिल चुका है। अक्टूबर-नवंबर में यहां महिला एशियन हॉकी चैंपियनशिप होगी। इसमें भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और थाईलैंड की टीमें हिस्सा लेंगी।
आगे का रोडमैप? हमारे पास पहले से शूटिंग, हॉकी घुड़सवारी, वॉटर स्पोर्ट्स जैसी अन्य खेल अकादमियां हैं… बस इन्हें साथ लाना होगा। सबसे बड़ा लक्ष्य: बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग के अनुसार, संबंधित खेल महासंघों के मानकों के अनुरूप राष्ट्रीय प्रतियोगितियों की मेजबानी के लिए दावेदारी की जाएगी। पहला कदम महिला एशियन हॉकी चैंपियनशिप से शुरू हो चुका है। सबसे बड़ी ताकत: पूरा स्पोर्ट्स इकोसिस्टम प्रशिक्षण, खिलाड़ियों के हॉस्टल, स्पोर्ट्स साइंस, स्पोर्ट्स मेडिसिन और रिकवरी सेंटर को एक ही परिसर में विकसित किया जा रहा है, ताकि राष्ट्रीय शिविर भी भोपाल आ सकें। सबसे बड़ा अवसर: ताकत को जोड़ना भोपाल के पास पहले से बिशनखेड़ी में शूटिंग अकादमी, बड़े तालाब पर वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी, टीटी नगर स्टेडियम, साई (साई) एथलेटिक्स सेंटर और ऐशबाग स्टेडियम जैसे स्थापित खेल केंद्र हैं। इन्हें नाथूबरखेड़ा इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से जोड़कर शहर में प्रशिक्षण, प्रतियोगिता और हाई-परफॉर्मेंस का एकीकृत खेल नेटवर्क विकसित किया जा सकता है। सबसे बड़ी चुनौती: खाली नहीं रहने चाहिए स्टेडियम राष्ट्रीय शिविर, लीग और प्रतियोगितियों का नियमित कैलेंडर तैयार करना होगा। परियोजना की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि यहां सिर्फ इक्का-दुक्का आयोजन नहीं, बल्कि लीग, चैंपियनशिप, राष्ट्रीय शिविर होते रहें। सबसे बड़ा फायदा: खेल से अर्थव्यवस्था चलेगी बड़े खेल आयोजन बढ़ने से खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। होटल, पर्यटन, परिवहन, व्यापार व रोजगार को नई गति मिलेगी। अहमदाबाद और भुवनेश्वर इसका उदाहरण हैं। {यह पूरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स 140 एकड़ में बन रहा है। इसका निर्माण 3 चरणों में हो रहा है। पहले चरण में ₹350 करोड़, दूसरे में ₹450 करोड़ लागत आएगी। अब तक कुल ₹800 करोड़ स्वीकृत किए जा चुके हैं। (कल पार्ट 8 में पढ़िए नई कहानी)
