भोपाल में 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह यानी, 5 डे वीक वर्किंग की मांग को लेकर बुधवार को बैंककर्मियों ने प्रदर्शन किया। शाम को वे अरेरा हिल्स स्थित पंजाब नेशनल बैंक जोनल ऑफिस के सामने जुटे और नारेबाजी की। यहां पर सभा भी हुई। इसमें संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि केंद्र सरकार जल्द मांग को नहीं मानती है तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल भी जा सकते हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने बुधवार को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों का आह्वान किया था। इसके चलते फोरम की स्थानीय भोपाल इकाई के आह्वान पर यहां भी प्रदर्शन हुआ। बैंककर्मियों ने अपनी मांग के समर्थन में नारेबाजी कर प्रभावी प्रदर्शन एवं सभा का आयोजन किया। सभा को फोरम में शामिल बैंक यूनियंस के पदाधिकारी संजीव मिश्रा, वीके शर्मा, दिनेश झा, प्रवीण मेघानी, दीपक रत्न शर्मा, निर्भय सिंह ठाकुर, संजय कुदेशिया, वीएस नेगी, देवेंद्र खरे, मनीष भार्गव आदि ने संबोधित किया। काम बढ़ा, लेकिन व्यवस्था नहीं की
वक्ताओं ने कहा कि पहले बैंक सोमवार से शुक्रवार तक पूरे दिन और प्रत्येक शनिवार को आधे दिन काम करते थे। वर्ष 2015 में सरकार और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के बीच सहमति बनी। जिसके अनुसार दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश घोषित किया गया और शेष शनिवारों को पूर्ण कार्य दिवस बनाया गया। यह निर्णय इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया था कि डिजिटल बैंकिंग के बढ़ने से बैंक शाखाओं में ग्राहकों की संख्या कम हुई है। साथ ही यह भी सहमति बनी थी कि शेष शनिवारों को भी अवकाश घोषित करने के विषय पर उचित समय पर विचार किया जाएगा। मार्च 2024 में वेतन संशोधन समझौते के दौरान इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने सहमति दी कि ग्राहकों के लिए बैंकिंग व्यवसाय के समय में प्रतिदिन 40 मिनट की वृद्धि की जाएगी और इसके बदले शेष शनिवारों को बैंक अवकाश घोषित किया जाएगा। इस प्रकार ग्राहकों के लिए कुल बैंकिंग व्यवसाय के घंटों में कोई कमी नहीं होने की व्यवस्था की गई। वित्त मंत्रालय को भेजा गया प्रस्ताव
इस प्रस्ताव को विधिवत स्वीकृति के लिए वित्त मंत्रालय को भेजा गया था, लेकिन पिछले दो वर्ष से अधिक समय से यह मामला सरकार की स्वीकृति के लिए लंबित है। सभी प्रयास किए जाने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तब यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने मार्च 2024 के समझौते में किए गए वादे को लागू कराने और सप्ताह में 5 दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर इसी साल 27 जनवरी को बैंक हड़ताल की थी। यह मामला अभी भी सरकार के पास लंबित है।
