नीमच जिले के सिंगोली इलाके में हुए कन्हैयालाल भील हत्याकांड में विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। मंगलवार को कोर्ट ने आरोपी छीतर गुर्जर (36) निवासी ग्राम पाटन को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और 1,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, सबूतों की कमी के कारण मामले के 7 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया है। घटना 26 अगस्त 2021 की सुबह की है। ग्राम बाणदा के रहने वाले काना उर्फ कन्हैयालाल भील अपने साथी गोविंद के साथ बाइक से अपनी लापता पत्नी को ढूंढने निकले थे। वे सिंगोली-नीमच रोड पर अथवाकलां फंटे के पास आने-जाने वाली गाड़ियों को रोककर पूछताछ कर रहे थे। उसी दौरान आरोपी छीतर गुर्जर ने तेज रफ्तार बाइक से कन्हैयालाल को टक्कर मार दी, जिससे वे सड़क पर गिर गए और उनके सिर में गंभीर चोट आई। गाड़ी के पीछे घसीटने का वीडियो हुआ था वायरल टक्कर मारने के बाद आरोपी ने कन्हैयालाल के साथ मारपीट की। डर के मारे उनका साथी गोविंद मौके से भाग निकला। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने कन्हैयालाल को रस्सी से बांधकर एक पिकअप गाड़ी के पीछे घसीटा था। इस बर्बरता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद काफी बवाल मचा था। सरकार ने इसे ‘जघन्य अपराध’ की श्रेणी में रखा था। इलाज के दौरान कन्हैयालाल की अस्पताल में मौत हो गई थी। कोर्ट ने सबूतों के आधार पर सुनाई सजा विशेष लोक अभियोजक कीर्ति शर्मा और अशोक कुमार सोनी की पैरवी और पुलिस के जुटाए गए फॉरेंसिक समेत डॉक्टर के सबूतों के आधार पर विशेष न्यायाधीश आलोक कुमार सक्सेना की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। पिकअप गाड़ी, मोबाइल और चश्मदीदों के बयानों को अहम सबूत मानते हुए मुख्य आरोपी को उम्रकैद की सजा दी गई।
