इस वर्ष का द्वितीय एवं अंतिम सूर्यग्रहण अमावस्या 12-13 अगस्त को होगा। यह पूर्ण सूर्यग्रहण होगा। भारतीय मानक समय के अनुसार ग्रहण रात्रि 09:04:3 बजे से मध्य रात्रि 01:27:09 तक होगा। सूर्यग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना होती है। सूर्यग्रहण तब होता है जब सूर्य और पृथ्वी के बीच चन्द्रमा आ जाता है। उज्जैन जीवाजीराव वेधशाला के अनुसार बुधवार रात को खगोलीय घटना होने जा रही है। जो की सूर्य ग्रहण के रूप में होगी। वेधशाला के अधीक्षक राजेंद्र गुप्त ने बताया कि चन्द्रमा दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करता है जिससे कभी-कभी अमावस्या को पृथ्वी तथा सूर्य के मध्य एक सीध में स्थित होता है। पूर्ण ग्रहण की स्थिति तब होती है जब चन्द्रमा, पृथ्वी से पास की स्थिति में पृथ्वी तथा सूर्य के मध्य आता है जिससे वह सूर्य को पूरा ढंक लेता है। ग्रहण की अवधि 4 घंटे 31 मिनट तक होगा ग्रहण पूर्ण सूर्यग्रहण का प्रारंभ 12 अगस्त को भारतीय मानक समय के अनुसार रात्रि 09:04:3 बजे से होगा। मध्य की स्थिति दिनांक 12 अगस्त 2026 को मध्य रात्रि 11:15:09 बजे पर होगी। इस समय सूर्य का 103.8 प्रतिशत भाग चंद्रमा के द्वारा ढक लिया जाएगा। जिससे कुछ समय के लिए अंधकार की स्थिति बन जाएगी। मोक्ष की स्थिति 13 अगस्त को मध्य रात्रि 01:27:09 बजे पर होगी। ग्रहण की अवधि 4 घंटे 31 मिनट तक रहेगी। भारत में इस समय रात्रि होने के कारण यह पूर्ण सूर्यग्रहण दृश्य नहीं होगा। यह सूर्यग्रहण पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, ग्रीनलैण्ड, उत्तरी अटलांटिक महासागर एवं उत्तरी प्रशांत महासागर में बहुत अच्छी प्रकार से देखा जा सकेगा।
