भोपाल के 2 पेट्रोल पंपों में पानी मिला है। सोमवार को हंगामा होने के बाद खाद्य विभाग ने दोनों पंपों को सील कर दिया। मंगलवार को ऑयल कंपनियों के साथ फिर से जांच होगी। ताकि, साफ हो सके कि आखिर पेट्रोल में पानी आया कहां से? इधर, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सोमवार को अब तक हुई कार्रवाई के आंकड़े जारी किए। इनमें 73 नमूने फेल होने और 8 लाइसेंस निरस्त किए जाने की बात बताई गई है। अशोका गार्डन में 80 फीट रोड स्थित फेम पेट्रोल पंप पर हंगामे के बाद खाद्य विभाग की टीम पहुंची थी। लोग बॉटलों में पेट्रोल भरकर लाए। यह उन्होंने इसी पंप से खरीदा था। बॉटल में पानी और पेट्रोल दोनों अलग-अलग साफ दिख था। हंगामा और शिकायत के बाद फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने जांच के लिए एक टीम मौके पर पहुंची। यही शिकायत जहांगीराबाद स्थित राजधानी पेट्रोल पंप की भी हुई। यहां से बॉटलों में भरा पेट्रोल ग्राहकों ने खाद्य विभाग की टीम को दिखाया। इसके बाद दोनों ही पंप सील कर दिए गए। ताकि, पेट्रोल की आगे से बिक्री न हो सके। हंगामा होने पर पुलिस पहुंची
पेट्रोल में पानी मिलने का मामला सामने आने के बाद बड़ी संख्या में ग्राहक पंप पर पहुंच गए। उन्होंने विरोध जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को संभाला। जांच के बाद ग्राहक वापस लौटे। ग्राहकों ने पानी मिले पेट्रोल से गाड़ी खराब होने का आंदेशा भी जताया। जांच में बारिश के पानी के मिलना सामने आया
फूड कंट्रोलर जादौन ने बताया कि ईंधन टैंक में जंग जगने और उसमें से बारिश का पानी अंदर जाने की जानकारी सामने आई है। पंप संचालक का कहना है कि बारिश की वजह से पानी पेट्रोल में चला गया। जिन ग्राहकों ने शिकायत की थी, उनके पंप संचालक ने रुपए भी लौटा दिए। ऐसा ही मामला जहांगीराबाद में भी देखने को मिला है। इसलिए दोनों पंपों को सील किया। मंगलवार को फिर से जांच की जाएगी। भोपाल में मिलावटखोरी की हद…73 नमूने फेल, 8 लाइसेंस निरस्त
इधर, खाद्य एवं औषधि विभाग ने सोमवार को कार्रवाई को लेकर अपने आंकड़े जारी किए। बताया कि 20 जुलाई से 10 अगस्त के बीच कुल 2234 दूध या दुग्ध उत्पादों के सैंपल लिए गए। इनमें दूध के 849, मावा के 106, पनीर के 296, घी के 601 और अन्य उत्पादन के 382 नमूने शामिल हैं। कुल 44 हजार 407 किलो सामग्री की कीमत 2.73 करोड़ रुपए है। इस दौरान 8 लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए। 73 नमूने फेल हुए। एफएसएस एक्ट के तहत 38 प्रकरण पंजीबद्ध करते हुए एक मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई गई। जांच के बाद द्वारकेश, गोवर्धन, भूमि, धोलपुर फ्रेश, गोपीश्री के असुरक्षित नमूने पाए गए। इनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।
