गुना के फतेहगढ़ इलाके के चिरौली गांव में हुई डकैती का पुलिस ने रविवार को खुलासा कर दिया है। पुलिस ने आरोपियों से 985 ग्राम से ज्यादा सोना बरामद किया है। पारदी बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया था। यह पहली बार है, जब पारदियों से इतनी बड़ी मात्रा में रिकवरी हुई है। पुलिस ने इस बार आरोपी पकड़ने से ज्यादा माल बरामद करने की स्ट्रेटजी पर काम किया। बरामद माल की कीमत लगभग 1.47 करोड़ बताई गई है। पहले मामला जान लीजिए…
बता दें कि घटना 3 अगस्त की है। फतेहगढ़ इलाके के चिरौली गांव के रहने वाले पवन मीना पंचायत सचिव हैं। घटना वाले दिन उनके घर पर माता, पीट और छोटा भाई ही था। उनके अनुसार रोजाना की तरह सभी लोग रात में अपने अपने कमरे में सो गए थे। उनके पिता बाबूलाल मीना रात 2:30 बजे उठे, तब तक सब ठीक था। इसके बाद वे वापस सो गए। रात 2:30 से 4 बजे के बीच अज्ञात बदमाशों ने उनके यहां डकैती कर डाली। सुबह जब 4:30 बजे उठे, तो परिवार वाले कमरे की कुंडी बाहर से लगी हुई थी। जैसे तैसे उसे खुलवाया और देखा तो बाकी कमरों से सामान गया था। लाखों की नकदी, बाइक ले गए थे
उन्होंने बताया कि बदमाश घर से बहुओं का एक किलो सोना, छह किलो चांदी, दस लाख रुपए नकद और बाइक चोरी कर ले गए। सूचना मिलते ही पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। SP हितिका वासल ने कई टीमों का गठन कर जल्द मामले का खुलासा करने के निर्देश दिए। SP हितिका वासल ने बताया कि फिंगर प्रिंट टीम और डॉग स्क्वाड की मदद से घटनास्थल पर साक्ष्य जुटाए गए। इसके साथ ही पूछताछ, मुखबिर तंत्र और तकनीकी विश्लेषण के जरिए पुलिस टीमों ने सुराग जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई। गुना, शिवपुरी, विदिशा, उज्जैन, रतलाम, राजगढ़, भोपाल, इंदौर, शाजापुर, देवास, श्योपुर सहित राजस्थान के बारां, कोटा, झालावाड़, छबड़ा, करौली जैसे इलाकों में लगातार दबिशें दी गईं। शनिवार को पुलिस ने ग्राम कनेरा, थाना धरनावदा निवासी राजू पिता कवरया पारदी (35) और गजानंद पिता देवला पारदी (48) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने 1.47 करोड़ के 985.15 ग्राम वजनी सोने के जेवरात बरामद कर लिए। पहली बार इतनी बड़ी रिकवरी
पारदी बदमाशों से पहली बार इतनी बड़ी रिकवरी हुई है। इससे पहले वर्ष 2024 के जुलाई महीने में बीलाखेड़ी गांव से 57 किलो चांदी बरामद की थी। इसकी कीमत लगभग 50 लाख आंकी गई थी। अमूमन यह देखने में आया है कि पारदियों से बहुत कम ही रिकवरी हो पाती है। इसका कारण है कि उन्हें यह जानकारी है कि रिकवरी नहीं होगी, तो वह सजा से भी बच जाएंगे। कोर्ट में केस नहीं टिक पाएगा। इसी कारण वे रिकवरी नहीं कराते। चाहे गुना में ही कई वर्षों पहले हुई डकैतियां हों, चाहे पूर्व गृहमंत्री के भतीजे के घर डकैती का मामला हो या फिर गुना में रजिस्ट्रार के घर चोरी का मामला हो, इन सभी मामलों में पारदी बदमाशों का हाथ था। आरोपी भी पकड़े गए, लेकिन उनसे रिकवरी नाम मात्र की ही हो पाई थी। SP की स्ट्रेटजी आई काम
इस बार SP ने भी एक खास स्ट्रेटजी पर काम किया। घटना के बाद पहले दिन से ही इस स्ट्रेटजी पर काम किया गया की ज्यादा से ज्यादा माल रिकवर करना है। आरोपी पकड़ने से ज्यादा इस बात पर काम करना है कि माल ज्यादा से ज्यादा बरामद हो। ये स्ट्रेटजी काम भी आई और पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में पारदियों से माल रिकवर हुआ। चौतरफा बना दबाव
इस बार पुलिस ने एक साथ कई मोर्चों पर काम किया। एक तरफ आरोपियों की तलाश में अलग अलग टीमें लगी हुई थीं। वहीं दूसरी तरफ प्रशासन भी सक्रिय हुआ। आरोपियों की पहचान हो जाने के बाद उनके अवैध अतिक्रमण चिन्हित किए गए। गुरुवार को प्रशासन और पुलिस की टीम बुलडोजर लेकर कनेरा गांव पहुंच गई। यहां अवैध अतिक्रमण कर बनाए गए घर को जमीदोज कर दिया। साथ ही राजनैतिक, सामाजिक दवाब भी बनाना शुरू किया गया। इससे पारदियों पर लगातार दबाव बढ़ता गया।
