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एमपी के 21 जिलों में आज हैवी रेन का अलर्ट:भोपाल में रात भर से तेज बारिश जारी; जबलपुर, नर्मदापुरम-सागर भी भीगेंगे

सूखे जैसे हालात से जूझ रहे मध्य प्रदेश में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हुआ है। मानसून ट्रफ और लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) की वजह से रविवार को प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। सोमवार को भी 21 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। भोपाल में तो रात भर से तेज बारिश हो रही है। उज्जैन संभाग में भी बारिश जारी है। मौसम केंद्र (IMD) के मुताबिक, सोमवार को राजगढ़, विदिशा, सीहोर, हरदा और देवास में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। अगले 24 घंटे में यहां 8 इंच तक पानी गिर सकता है। वहीं, उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, खंडवा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, जबलपुर, गुना, शिवपुरी और श्योपुर में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, भोपाल, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खरगोन, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, रतलाम, ग्वालियर, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश जारी रह सकती है। दो दिन तेज बारिश का दौर
मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि वर्तमान में लो प्रेशर एरिया के बाद मानसूनी गतिविधि बढ़ी है। हालांकि, तेज बारिश का दौर दो दिन ही रहेगा। 11 अगस्त के आसपास उत्तर बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल–बांग्लादेश तट के पास नया साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से 13 अगस्त को नया लो प्रेशर एरिया बनने की संभावना है। 12–13 अगस्त को हल्की बारिश के संकेत है। डिंडौरी में बारिश से गिरा मकान, मंडला में पुल के ऊपर बही नर्मदा
इससे पहले रविवार को डिंडौरी में तेज बारिश से कच्चा मकान गिर गया। मलबे में दबकर 7 साल के राजा की मौत हो गई। नर्मदा नदी का पानी पुल के ऊपर से बह रहा है। किनारे बसे 7 परिवारों को रैन बसेरा में शिफ्ट किया गया। मंडला में भी नर्मदा नदी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है। रविवार सुबह 9 बजे यह 435 मीटर था, जो शाम 4 बजे तक वार्निंग लेबल को क्रॉस कर 437.6 मीटर पर पहुंच गया। छोटा पुल (रपटा) डूब गया है। उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला डैम के 5 गेट 11 मीटर खोलकर पानी छोड़ा गया। भोपाल, बालाघाट, ब्यावरा, विदिशा, हरदा, मंडला और नरसिंहपुर में रुक-रुककर बारिश हुई। इससे पहले डिंडौरी में शनिवार रात 9 बजे से रविवार सुबह 6 बजे तक रिकॉर्ड 6 इंच बारिश हुई। बालाघाट में 24 घंटे में औसतन सवा 2 इंच बारिश दर्ज की गई जबकि बिरसा तहसील में सबसे ज्यादा साढ़े 3 इंच पानी गिरा। विदिशा जिले के पठारी में लगातार बारिश से क्षेत्र की नदी-नाले उफान पर हैं। पठारी-छपारा मार्ग पर रहटी नदी के पुल के ऊपर से पानी बह रहा है। इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर पुल पार कर रहे हैं। देखिए, रविवार को हुई बारिश की तस्वीरें… प्रदेश में अब तक 17.8 इंच बारिश हुई
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 17.8 इंच (453 एमएम) बारिश हो चुकी है। यह औसत बारिश 22 इंच (560 एमएम) से 4.2 कम है। यानी, प्रदेश में 19% पानी कम गिरा है। पूर्वी हिस्से में 20% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 18% बारिश कम हुई है। 49 जिलों में कम बारिश
प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 20% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में 3% से 50% तक कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन, बड़वानी और विदिशा में औसत से 4% से 45% कम पानी गिरा है। 6 जिलों में ज्यादा बारिश
IMD की माने तो पश्चिमी हिस्से के ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास और खरगोन में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम जून के बाद जुलाई में भी आंकड़ा कम
मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच
प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है। अब जानिए, एमपी के 5 बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड… भोपाल में 2006 में अगस्त में 35 इंच बारिश का रिकॉर्ड
भोपाल में अगस्त में मानसून जमकर बरसता है। इस महीने राजधानी में औसत साढ़े 35 इंच तक बारिश हो चुकी है, जो साल 2006 में हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश करीब 12 इंच 14 अगस्त 2006 को हुई थी। पिछले सालों की बात करें तो 2015 और 2022 में 30 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल में इस महीने औसत 14 दिन बारिश होती है। इस दौरान 13 दिन तक पानी गिर जाता है। जुलाई जैसे ही सिस्टम एक्टिव होते हैं। इंदौर में 1944 में गिरा था 28 इंच पानी
इंदौर में अगस्त महीने में औसत 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड है, जो साल 1944 में दर्ज किया गया था। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 22 अगस्त 2020 को बनाया था। इस दिन साढ़े 10 इंच पानी गिरा था। पिछले 10 साल में दो बार 17 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इंदौर में अगस्त महीने की औसत बारिश 10 से 11 इंच है। महीने में 12 से 13 दिन तक बारिश होती है। ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड
ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 10 अगस्त 1927 को बना था। सर्वाधिक मासिक बारिश वर्ष 1916 में 28 इंच हुई थी। इस महीने की औसत बारिश साढ़े 9 इंच है। एवरेज 12 दिन बारिश होती है। जबलपुर में 102 साल पहले गिरा था 44 इंच पानी
जबलपुर में एक महीने में 44 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। 102 साल पहले यानी, वर्ष 1923 में अगस्त महीने में बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इसी साल 20 अगस्त को 24 घंटे में ही 13 इंच बारिश हुई थी। यहां बादल फटने जैसी स्थिति बनी थी। जबलपुर में इस महीने की औसत बारिश 18 इंच है। करीब 16 दिन तक पानी गिरता है। पिछले 10 साल की बात करें तो साल 2019 में यहां 30.61 इंच बारिश हुई थी। उज्जैन में अगस्त में जमकर होती है बारिश
उज्जैन में साल 2006 में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड बना था। इस साल अगस्त महीने में करीब 35 इंच बारिश हुई थी। इसी साल 24 घंटे में सर्वाधिक 12 इंच बारिश का रिकॉर्ड 10 अगस्त को बना था। उज्जैन में अगस्त की औसत बारिश 10 इंच है। 10 से 11 दिन यहां बारिश होती है।

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