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इंदौर में वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन:न्यायविद साझा करेंगे बाल संरक्षण, पुनर्वास और जेल सुधार पर विचार

इंदौर में वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन 9 अगस्त को न्यायपालिका के सामने बच्चों और बंदियों से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी एवं सामाजिक मुद्दों पर मंथन होगा। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होने वाले कॉन्फ्रेंस में दो तकनीकी सेशन आयोजित किए जाएंगे। इनमें बाल हितैषी न्याय व्यवस्था, बच्चों का संरक्षण एवं पुनर्वास तथा बंदियों और उनके परिवारों के पुनर्वास, पुनर्समावेशन और न्याय तक पहुंच जैसे विषयों पर चर्चा होगी। दूसरे दिन का पहला तकनीकी सेशन सुबह 10.30 से 11.45 बजे तक होगा। इसका विषय ‘Every Child Matters : Strengthening Child-Friendly Justice, Protection and Rehabilitation’ रखा गया है। यानी हर बच्चा महत्वपूर्ण है और उसके लिए बाल हितैषी न्याय, संरक्षण एवं पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा होगी। इस सेशन की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा करेंगे, जबकि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा सह-अध्यक्ष रहेंगे। सत्र में तेलंगाना हाई कोर्ट के जस्टिस पी. साम कोशी और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक वक्ता के रूप में अपने विचार रखेंगे। बंदियों और उनके परिवारों के पुनर्वास पर होगा मंथन दूसरा तकनीकी सेशन दोपहर 12 बजे से 1.30 बजे तक आयोजित होगा। इसका विषय ‘Beyond Incarceration : Rehabilitation, Reintegration and Access to Justice for Prisoners and Their Families’ है। इसमें जेल में रहने के बाद बंदियों के पुनर्वास, समाज में पुनर्समावेश और उन्हें और उनके परिवारों को न्याय तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने के उपायों पर चर्चा होगी। इस सेशन की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट जस्टिस विक्रम नाथ करेंगे। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य जस्टिस रमेश सिन्हा सह-अध्यक्ष रहेंगे। वहीं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई के स्कूल ऑफ सोशल वर्क में सेंटर फॉर क्रिमिनोलॉजी एंड जस्टिस के प्रो. विजय राघवन वक्ता के रूप में शामिल होंगे। न्याय को ज्यादा संवेदनशील बनाने पर जोर कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन के दोनों सत्र न्याय व्यवस्था को केवल अदालत और मुकदमों तक सीमित रखने के बजाय बच्चों, बंदियों और उनके परिवारों जैसे संवेदनशील वर्गों तक न्याय की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने पर केंद्रित रहेंगे। सेशन्स में कानूनी संरक्षण के साथ पुनर्वास, पुनर्समावेशन और समाज में सम्मानजनक जीवन की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। यह खबर भी पढ़ें… CJI सूर्यकांत बोले- सिर्फ कानून बनाने से नहीं मिलेगा न्याय भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- सिर्फ कानून बना देने से आम लोगों तक न्याय नहीं पहुंच सकता। न्याय व्यवस्था और जनता के बीच दूरी नहीं होनी चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति जब कानूनी मदद के लिए पहुंचे तो पहले उसकी बात सुनी जाए, उसे सम्मान मिले। जरूरतमंद की समस्या को समझा जाए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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