मध्यप्रदेश में अगले साल होने वाले नगर निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटा राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त की तर्ज पर मतदान केंद्रों में वेबकास्टिंग शुरू करा सकता है। इस काम में लगने वाले निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे हर छोटी बात को गंभीरता से लें, क्योंकि निर्वाचन कार्यों में छोटी-सी लापरवाही अविश्वास का कारण बन जाती है। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने ये बातें गुरुवार को उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और मास्टर ट्रेनर्स की राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में कहीं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यशाला में अपनी सभी शंकाओं का समुचित समाधान करें और अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी दें। राज्य निर्वाचन आयुक्त श्रीवास्तव ने कहा कि स्थानीय निकायों के निर्वाचन तुलनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील होते हैं। इसमें उप जिला निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। अधिकारी निर्वाचन प्रक्रियाओं की नई तकनीकों को अपनाने के साथ ही इस बात पर विशेष ध्यान दें कि इन तकनीकों पर मतदाताओं का पूरा विश्वास कायम रहे। मतदान की पवित्रता को मतदाता हमेशा याद रखता है। निकाय चुनाव के दौरान वेबकास्टिंग करने पर विचार राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि मतदान की प्रक्रिया की वेबकास्टिंग करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ईवीएम के माध्यम से मतदान एक साथ कराने पर भी गहन विचार किया जा रहा है। इससे पंचायत और नगरीय निकाय, सभी जगह ईवीएम से वोटिंग होने पर रिजल्ट आने में कम समय लगेगा। श्रीवास्तव ने बताया कि सहयोगात्मक संघवाद की भावना के अनुरूप किराये पर मध्यप्रदेश, त्रिपुरा, सिक्किम, महाराष्ट्र और राजस्थान में स्थानीय निकायों के निर्वाचन के लिए ईवीएम उपलब्ध कराई गई हैं। स्थानीय निर्वाचन लोकतंत्र की प्रयोगशाला राज्य निर्वाचन आयुक्त श्रीवास्तव ने कहा कि स्थानीय निर्वाचन लोकतंत्र की प्रयोगशाला हैं। मध्यप्रदेश में स्थानीय निकायों के निर्वाचन में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के साथ ही अन्य कई प्रयोग किए गए हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्फिडेंस नीचे तक पहुंचना चाहिए। इससे कार्य में सुगमता आती है। मतदान के दौरान ऐप के माध्यम से रियल टाइम रिपोर्टिंग करें। राज्य निर्वाचन आयोग नवाचारों में अग्रणी सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग नवाचारों में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि इस बात का ध्यान रखें कि निर्वाचन में छोटी-सी त्रुटि भी क्षम्य नहीं है। प्रशिक्षण को गंभीरता से लें। कार्यशाला में राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स पी.एन. सनेसर ने डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन मैनेजमेंट प्लान, समीरा नईम ने इलेक्शन रिजल्ट, डॉ. संजय गाड़गे ने ईवीएम रैंडमाइजेशन, डॉ. महेश अग्रवाल ने आईपी बीएमएस और आयोग के विधिक सलाहकार डॉ. प्रदीप शुक्ला ने व्यय लेखा एवं आदर्श आचरण संहिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उप सचिव संजू कुमारी ने कार्यशाला के उद्देश्यों के बारे में बताया। इस दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव मनोज मालवीय, सतीश शाक्य सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। अगले साल मई से अगस्त के बीच हो सकते हैं चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2022 में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव जुलाई और अगस्त महीने में कराए थे। इसलिए 2027 में पांच साल बाद होने वाले चुनाव मई से अगस्त के बीच कराए जा सकते हैं। इसी के चलते चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के बाद अधिकारियों को प्रशिक्षण देने और अन्य तैयारियों पर फोकस किया है।
