दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी जहां अपने भितरघातियों को खोजकर उनपर कार्रवाई करने जा रही है। वहीं दतिया में जीत के बाद भी कांग्रेस ने चुनाव में प्रचार और जीत की रणनीति बनाने के लिए कलस्टर से सेक्टर और बूथ तक तैनात किए गए नेताओं का रिपोर्ट कार्ड तैयार कराया है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चुनाव में भेजे गए नेताओं की कार्यप्रणाली का असेसमेंट कराया है। चुनाव के दौरान पूरी विधानसभा को आठ क्लस्टरों और कई सेक्टरों में बांटकर सीनियर नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी। मतदान के बाद बूथवार नतीजों के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट में यह आकलन किया गया कि किस क्लस्टर प्रभारी और सेक्टर प्रभारी के क्षेत्र में कांग्रेस को कितनी सफलता मिली और कहां संगठन कमजोर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक जिन क्लस्टरों में नेतृत्व सक्रिय रहा, बूथ प्रबंधन मजबूत रहा और लगातार मॉनिटरिंग हुई, वहां कांग्रेस ने निर्णायक बढ़त बनाई। वहीं जिन क्षेत्रों में संगठनात्मक कमजोरी दिखाई दी, वहां कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा। यही कारण है कि पार्टी अब इस मॉडल को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी का आधार मान रही है। जयवर्धन के क्लस्टर में सबसे ज्यादा बूथ जीते रिपोर्ट में सबसे अधिक चर्चा जयवर्धन सिंह की है। उनके जिम्मे क्लस्टर-6 था, जहां कांग्रेस ने 35 में से 30 बूथ जीते और 3637 वोटों की बढ़त बनाई। बूथ जीतने के लिहाज से यह पूरे चुनाव का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इसी वजह से संगठन के भीतर जयवर्धन को इस चुनाव का सबसे सफल या ‘सुपर कैम्पेनर’ माना जा रहा है। क्लस्टर 6 का प्रभार पूर्व मंत्री व विधायक जयवर्धन सिंह को दिया गया था। विधायक देवेन्द्र सखवार, मनोज राजानी(देवास), संतोष लिटोरिया(दतिया)सीएल बौद्व(दतिया) को सह प्रभारी बनाया गया था।
इस क्लस्टर के 35 बूथों में से कांग्रेस ने 30 बूथ जीते। 5 बूथ पर कांग्रेस को हार मिली। इस क्लस्टर में कांग्रेस को 3637 वोटों की लीड मिली। बैजनाथ के क्लस्टर में पांचों सेक्टर जीते, 4954 की लीड मिली यदि वोटों की बढ़त के आधार पर देखा जाए तो पूर्व विधायक बैजनाथ कुशवाह का क्लस्टर-8 सबसे आगे रहा। उनके क्षेत्र में कांग्रेस ने 31 में से 27 बूथ जीतकर 4754 वोटों की सबसे बड़ी बढ़त बनाई। इस क्लस्टर में प्रेमनारायण यादव ने अपने सभी आठ बूथ जिताकर अकेले 1760 वोटों की बढ़त दिलाई। कमलेश साहू ने 919, नंदराम कुशवाह ने 844 और राहुल भदौरिया-दिविजय सिंह की टीम ने 745 वोटों का योगदान दिया। इस क्लस्टर को रिपोर्ट में पूरे चुनाव का सबसे सफल क्लस्टर बताया गया है। क्लस्टर 8 का प्रभार पूर्व विधायक बैजनाथ कुशवाह को दिया गया था। पवन अहिरवार, अनूप पाठक और रामकुमार मोगिया को सह प्रभारी बनाया गया था। इस क्लस्टर के 31 बूथों में से कांग्रेस ने 27 बूथ जीते। 4 बूथ पर कांग्रेस को हार मिली। इस क्लस्टर में कांग्रेस को 4954 वोटों की लीड मिली। जौरा विधायक के क्लस्टर में 2905 वोटों से जीती कांग्रेस तीसरे स्थान पर पंकज उपाध्याय का क्लस्टर-7 रहा। इस क्लस्टर में जितेंद्र जैन ने अपने सेक्टर के सभी चार बूथ जीतकर 1099 वोटों की बढ़त दिलाई, जबकि दिनेश मेघानी और लोकेन्द्र यादव ने भी अपने-अपने सभी बूथ जीतकर संगठन की रणनीति को सफल बनाया। क्लस्टर 7 का प्रभार विधायक पंकज उपाध्याय को दिया गया था। अजय शुक्ला और मुन्ना खान को सह प्रभारी बनाया गया था। इस क्लस्टर के 29 बूथों में से कांग्रेस ने 25 बूथ जीते। 4 बूथ पर कांग्रेस को हार मिली। इस क्लस्टर में कांग्रेस को 2905 वोटों की लीड मिली। रिपोर्ट के अनुसार इन तीनों क्लस्टरों ने मिलकर 11,296 वोटों की बढ़त दिलाई, जबकि कांग्रेस की कुल जीत का अंतर 6029 वोट रहा। यानी पार्टी की पूरी जीत की सबसे मजबूत नींव इन्हीं तीन क्लस्टरों ने तैयार की। सेक्टर-2 में 1028, सेक्टर-4 में 1010 और सेक्टर-5 में 980 वोटों से पिछड़ना सबसे बड़ी कमजोरी के रूप में सामने आया। रिपोर्ट में इस पूरे क्षेत्र में संगठनात्मक पुनर्गठन, नेतृत्व विकास और बूथ स्तर पर नए सिरे से काम करने की जरूरत बताई गई है। पूर्व मंत्री प्रभु सिंह के क्लस्टर में सिर्फ दो बूथ जीती कांग्रेस प्रभु सिंह ठाकुर का क्लस्टर-5 सबसे कमजोर साबित हुआ। क्लस्टर 5 का प्रभार पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर को दिया गया था। प्रांजल सिंह चौहान और पुष्पराज राजपूत को सह प्रभारी बनाया गया था। इस क्लस्टर के 29 बूथों में से कांग्रेस 2 बूथ जीती और 27 बूथ हारे। इस क्लस्टर में कांग्रेस को 4633 वोटों से बुरी तरह हार मिली।
क्लस्टर 3 के 45 में 28 बूथों पर हारी कांग्रेस क्लस्टर-3 का प्रभार पूर्व विधायक सत्यपाल सिंह नीटू सिकरवार को दिया गया था पूर्व विधायक प्रागीलाल जाटव, शेर सिंह और जसवंत बघेल को सह प्रभारी बनाया गया था। इस क्लस्टर के 45 बूथों में से कांग्रेस ने 17 बूथ जीते। 28 बूथों पर कांग्रेस को हार मिली। इस क्लस्टर में कांग्रेस को 1250 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। सचिन यादव के कलस्टर में 688 वोटों से हारी कांग्रेस क्लस्टर 4 का प्रभार विधायक व पूर्व मंत्री सचिन यादव को दिया गया था। दतिया के पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामकिंकर गुर्जर, रामू यादव(दिनारा) और दिनारा के ब्लॉक अध्यक्ष शिशुपाल यादव को सह प्रभारी बनाया गया था।
इस क्लस्टर के 42 बूथों में से कांग्रेस 17 बूथ जीती और 25 बूथ हारे। इस क्लस्टर में कांग्रेस को 688 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। लाखन सिंह यादव के क्लस्टर-1 इस क्लस्टर के 39 बूथों में से कांग्रेस 18 बूथ जीती और 21 बूथ हारे। इस क्लस्टर में कांग्रेस को 562 वोटों से कांग्रेस की हार हुई। मुरैना विधायक के कलस्टर में 144 वोटों की लीड मिली मुरैना विधायक दिनेश गुर्जर को क्लस्टर-2 का जिम्मा सौंपा गया था। इस क्लस्टर के 40 बूथों में से कांग्रेस 19 बूथ जीती और 21 बूथ हारे। इस क्लस्टर में कांग्रेस को 144 वोटों से लीड मिली। यानी कम बूथ जीतने के बावजूद प्रभावी बूथ प्रबंधन ने क्लस्टर को फायदे में रखा। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि चुनाव में क्लस्टर और सेक्टर मॉडल पूरी तरह सफल रहा। जहां नियमित समीक्षा, स्पष्ट जिम्मेदारी और मजबूत स्थानीय नेतृत्व रहा, वहां कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया। बूथ स्तर तक जवाबदेही तय होने से कार्यकर्ता अंतिम मतदाता तक पहुंच सके और मतदान दिवस पर प्रभावी प्रबंधन देखने को मिला। पार्टी ने रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि दतिया मॉडल को मध्यप्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर लागू किया जाए। चुनाव से कम से कम छह माह पहले क्लस्टर और सेक्टर प्रभारियों की नियुक्ति हो, प्रत्येक प्रभारी का बूथवार मूल्यांकन किया जाए, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया जाए और कमजोर क्लस्टरों में विशेष प्रशिक्षण व नियमित फील्ड मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाए। कांग्रेस संगठन का मानना है कि दतिया उपचुनाव ने यह साबित कर दिया कि चुनाव केवल बड़ी सभाओं और प्रचार अभियानों से नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक सक्रिय संगठन, स्पष्ट जिम्मेदारी और लगातार निगरानी से जीते जाते हैं। यही वजह है कि दतिया का यह क्लस्टर-सेक्टर मॉडल अब आगामी विधानसभा चुनावों के लिए संगठन का संभावित ब्लूप्रिंट माना जा रहा है। ये खबर भी पढ़ें… दतिया उपचुनाव हार के बाद भाजपा जिला कार्यकारिणी भंग दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। पार्टी नेतृत्व ने जिला कार्यकारिणी समेत दतिया के सभी मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभागों की इकाइयों को भंग कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने ये एक्शन हार की समीक्षा के लिए बनाई गई विशेष समिति की रिपोर्ट पर लिया है।पूरी खबर पढ़ें
